Ravana Dahan: गोरखपुर के रामलीला ग्राउंड में शनिवार को विजयादशमी के अवसर पर रामलीला समिति बर्डघाट द्वारा एक भव्य रामलीला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर रावण के 40 फीट के पुतले का दहन किया गया, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। इस आयोजन ने धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का माहौल बना दिया।
रामलीला का दृश्य
रामलीला का मंचन शुरू होते ही दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई। रामलीला में दिखाया गया कि मेघनाथ की हत्या के बाद रावण काफी भयभीत हो जाता है। इस भय के बीच, रावण अपने जनरलों से कहता है, “चक्र तैयार करो, मैं स्वयं युद्ध के लिए जाऊंगा।” रावण का यह बयान दर्शाता है कि वह अपने अदम्य साहस के बावजूद, अपने परिवार के सदस्यों की मौत से भयभीत है।
इसके बाद, रावण अपनी सेना के साथ युद्ध के मैदान की ओर निकल पड़ता है। युद्ध में रावण और भगवान श्री राम के बीच तीव्र संघर्ष होता है। राम के धनुष से निकली तीर रावण को समाप्त कर देती है, और इस विजय पर सभी भक्त ‘जय श्री राम’ का जयकारा करने लगते हैं।
रावण का दहन
रावण की मृत्यु के बाद, रामलीला समिति के सदस्यों ने भगवान श्री राम का पूजन और आरती की। इस धार्मिक क्रिया के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान राम की महिमा का गुणगान किया। इसके बाद, रावण के 40 फीट के पुतले को अग्नि के हवाले कर दिया गया। पुतला जलते ही ‘जय श्री राम’ के नारे गूंजने लगे, जिससे वातावरण में एक अद्भुत श्रद्धा का संचार हुआ।
रावण का दहन केवल एक पुतले का जलना नहीं था, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक था। इस समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि बुराई चाहे कितनी भी विशाल क्यों न हो, अच्छाई हमेशा विजयी होती है।
भगवान राम की यात्रा
रावण के दहन के बाद, मां सीता और लक्ष्मण ने भगवान राम के साथ बासंतपुर चौराहे की ओर प्रस्थान किया। इस दौरान, विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपने-अपने अस्त्र और कौशल का प्रदर्शन कर रहे थे। भगवान राम का रथ उनके पीछे चल रहा था, जिसमें श्रीराम, सीता और लक्ष्मण सवार थे।
यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती थी, बल्कि यह समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी देती थी। रथ के आगे कार्यकर्ताओं की मौजूदगी इस बात का प्रतीक थी कि विभिन्न समुदाय एक साथ मिलकर धर्म और संस्कृति के लिए खड़े हैं।
विजयादशमी का पर्व
विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और इसे हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। रामलीला का आयोजन इस पर्व का अभिन्न हिस्सा है, जो लोगों को एकत्रित करता है और उन्हें अपने धार्मिक मूल्यों की याद दिलाता है।
गोरखपुर में आयोजित इस रामलीला ने न केवल धार्मिक भावनाओं को जगाया, बल्कि लोगों को अपने संस्कृति के प्रति जागरूक भी किया। इस आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान राम के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त की और इस दिन को एक यादगार अनुभव बनाया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समावेश
रामलीला के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में नृत्य, संगीत और नाटक शामिल थे, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। युवाओं ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया, जिससे उत्सव का माहौल और भी जीवंत हो गया।
दर्शकों ने इस अवसर का पूरा लाभ उठाया और परिवार सहित आए लोगों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर उत्सव का आनंद लिया। सभी ने मिलकर रावण दहन का अनुभव किया और भगवान राम के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।