Wakf Board Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक पारित, क्या दो लाख करोड़ की संपत्तियों पर सरकार की नजर?

Wakf Board Amendment Bill वक्फ संशोधन विधेयक पारित, क्या दो लाख करोड़ की संपत्तियों पर सरकार की नजर
Wakf Board Amendment Bill वक्फ संशोधन विधेयक पारित, क्या दो लाख करोड़ की संपत्तियों पर सरकार की नजर

Wakf Board Amendment Bill: वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक, ‘एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 2024’ (उम्मीद) विधेयक आखिरकार लोकसभा में पारित हो गया। बहस के दौरान विपक्षी दलों द्वारा किए गए दावों और सत्तारूढ़ दल द्वारा किए गए प्रतिदावों के कारण विधेयक पर चर्चा बुधवार देर रात तक चलती रही।

संजय राउत का बड़ा दावा – वक्फ संपत्तियों पर सरकार की नजर

यह विधेयक देर मध्य रात्रि को लोकसभा में पारित किया गया। गैर-मुस्लिम सदस्यों से संबंधित संशोधन सहित विपक्ष के सौ से अधिक संशोधनों को अस्वीकार कर दिया गया। ठाकर गुट के नेता संजय राउत ने इस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुसलमानों के उद्धार की बात करना शुद्ध पाखंड है, कल, 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति पर अपना अधिकार बनाए रखने के लिए सब कुछ किया गया। कल अमित शाह के भाषण से एक सच्चाई सामने आई, उन्होंने अपने भाषण में कहा कि 2025 तक मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को छुआ नहीं जाएगा। लेकिन हम खाली पड़ी जमीन को बेच देंगे और उससे मिलने वाले पैसे गरीब मुस्लिम महिलाओं को दान कर देंगे। इसलिए, वे अंततः खरीद-बिक्री के बिंदु पर आ गए हैं।

क्या वक्फ संपत्तियों का वही हश्र होगा जो धारावी और हवाई अड्डों का हुआ?

कानून भले ही जमीनों की रक्षा के लिए लाया गया हो, लेकिन कल अनजाने में ही उनके मुंह से यह सच निकल गया कि वे खाली पड़ी जमीनों का सौदा करेंगे। संजय राउत ने कहा है कि खाली पड़ी जमीन की कीमत दो लाख करोड़ रुपये है और उनके पेट में जो हलचल थी, वह बाहर आ गई है।

Wakf Board Amendment Bill अब ये खाली जमीनें किसे और कैसे बेची जाएंगी? जिस तरह धारावी को बेचा गया, उसी तरह मुंबई सहित देश भर के हवाई अड्डे बेच दिए गए। इस देश में दो विक्रेता और दो क्रेता हैं। ये जमीनें और किसे मिलेंगी? तो फिर मुसलमानों के अच्छे कामों के नाम पर इतना हंगामा क्यों हो रहा है? यह बात देश के गृहमंत्री के मुंह से निकली। संजय राउत ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा, “आपको उनका भाषण सुनना चाहिए।”

महाराष्ट्र और मुंबई में वक्फ बोर्ड की जमीनों का लेन-देन पहले ही पूरा हो चुका है। यह स्पष्ट है कि यह विधेयक इस लेनदेन की खरीद-बिक्री को वैध बनाने के लिए पेश किया गया था। इसलिए हम देवेंद्र फडणवीस के तर्क को समझ सकते हैं। अगर उन्होंने अमित शाह का राष्ट्रीय एकता, मुस्लिम एकता और हिंदू-मुस्लिम एकता के बारे में भाषण सुना होता, तो बैरिस्टर जिन्ना ने भी मुसलमानों के बारे में इतना हंगामा नहीं किया होता। अमित शाह का भाषण षड्यंत्र का चरम उदाहरण था। संजय राउत ने शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि इसका कारण दो लाख करोड़ रुपये की जमीन है।

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