Monkey terror in the village: खोराबार के लहसड़ी गाँव में पिछले कुछ दिनों से बंदरों के एक समूह ने आतंक मचाया हुआ है। यह बंदरों का समूह अपनी टोली की रक्षा के लिए आक्रामक हो गया है, जिससे गांव के लोग दहशत में हैं।
बंदर की मौत के बाद बढ़ा आतंक
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ दिन पहले पड़ोसी गांव बारबसपुर में एक बंदर की मौत हो गई थी। चर्चा है कि उस बंदर को एक बाइक सवार ने टक्कर मार दी थी। इसके बाद से, बंदरों का यह समूह दोपहिया वाहनों को देखते ही उन पर हमला कर रहा है। बंदरों द्वारा मचाए गए इस उत्पात से पूरे गाँव में भय का माहौल बना हुआ है।
रविवार को दोपहर 1 बजे, लहसड़ी गाँव में एक अजीब-सी खामोशी थी। गाँव के कुछ बच्चे थोड़ी दूर पर डंडे लिए हुए घूम रहे थे। जब उनसे पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि वे बंदरों के डर से डंडे लेकर घूम रहे हैं।
बंदरों के हमलों से लोग घायल
पिछले कुछ दिनों में बंदरों ने चार से पांच लोगों को काट लिया है। दो दिन पहले, गाँव के एक युवक को बंदर ने पैर में काट लिया था। तब से गाँव में बंदरों का खौफ और बढ़ गया है। महिलाओं ने बंदरों के डर से छत पर कपड़े सुखाने तक जाना बंद कर दिया है।
गाँव की महिलाएं कहती हैं कि उन्हें यह अंदाजा नहीं है कि बंदर कब और कहां से हमला करेंगे। शनिवार को लहसड़ी में एक बंदर ने 25 वर्षीय युवक निखिलेश पर हमला कर दिया। बंदर ने उसके पैर पर काट लिया और मांस का एक टुकड़ा निकाल दिया। निखिलेश भारतीय सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था, लेकिन इस घटना के कारण उसकी तैयारी पर असर पड़ा है। डॉक्टर अब उसके पैर की सर्जरी की बात कर रहे हैं।
बाइकर्स को देख कर हमला करता है बंदर
गाँव के लोगों का कहना है कि बंदरों के समूह में से सिर्फ एक बंदर ही लोगों पर हमला कर रहा है। विशेष रूप से बाइक सवारों को देखते ही वह तेजी से दौड़कर उन्हें काटने की कोशिश करता है।
गाँव की एक निवासी, सोनाली ने बताया कि हाल ही में पड़ोसी गाँव में एक बंदर की मौत हो गई थी। उसके बाद से बंदरों का यह समूह और अधिक आक्रामक हो गया है। सोनाली कहती हैं, “अब हमें घर से बाहर निकलने में डर लगता है।”
विजय, एक अन्य निवासी ने कहा, “हम बच्चों को बाहर जाने नहीं दे रहे हैं, क्योंकि हमें डर है कि बंदर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।”
वीरेंद्र नाम के एक निवासी ने चिंता जताते हुए कहा, “अगर जल्द ही इन बंदरों को पकड़ा नहीं गया, तो वे और भी लोगों को घायल कर सकते हैं।”
बंदरों के खौफ के चलते सामान्य जीवन प्रभावित
गाँव में बंदरों के हमलों के कारण लोग बेहद सतर्क हो गए हैं। यहाँ तक कि खेतों में काम करने वाले लोग भी अब डंडे लेकर जाते हैं। गांव के बच्चे खेल के मैदानों से दूर हैं और महिलाएं घर से बाहर निकलने से बच रही हैं।
अधिकारियों से मदद की गुहार
गाँव के लोगों ने प्रशासन से बंदरों को पकड़ने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही बंदरों को पकड़ा नहीं गया, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
वन विभाग की टीम का दौरा
गाँव में उत्पात मचा रहे बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम ने भी दौरा किया। टीम ने बंदरों की हरकतों को देखा और ग्रामीणों से बातचीत की। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बंदरों को पकड़ने के लिए जाल बिछाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वन अधिकारी राकेश कुमार ने कहा, “हमने गाँव में बंदरों की स्थिति का जायजा लिया है। जल्द ही इन बंदरों को पकड़ने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। बंदरों के हमलों से लोगों को बचाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।”
बंदरों के आक्रामक होने का कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि बंदरों का आक्रामक होना उनके समूह में आई किसी दुर्घटना के कारण हो सकता है। बंदरों का स्वाभाविक व्यवहार समूह की रक्षा करना होता है और किसी एक सदस्य की मौत या चोट से वे आक्रामक हो जाते हैं।
पड़ोसी गाँव में बंदर की मौत के बाद से लहसड़ी गाँव में बंदरों के हमले बढ़ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों का यह व्यवहार अतीत में कभी देखने को नहीं मिला था।
बंदरों के आतंक से कैसे बचें
ग्रामीणों को बंदरों से बचने के लिए कुछ सावधानियों का पालन करने की सलाह दी गई है:
- डंडों का उपयोग: बंदरों को देखते ही उनसे बचने के लिए डंडे लेकर चलना प्रभावी हो सकता है, क्योंकि बंदर आमतौर पर मानव हस्तक्षेप से डरते हैं।
- खुली जगहों से दूर रहें: बंदर अक्सर खुली जगहों पर हमला करते हैं, इसलिए गाँव के लोग खुले मैदानों से दूर रहें।
- बाइक सवारों को सतर्क रहना: खासतौर से बाइक सवारों को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि बंदर अक्सर उन्हें देखकर आक्रामक हो जाते हैं।
- बंदरों को उकसाने से बचें: बंदरों को मारने या उकसाने से वे और आक्रामक हो सकते हैं, इसलिए उन्हें शांत रखने की कोशिश की जाए।
गाँव में सामान्य स्थिति की वापसी की उम्मीद
गाँव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन और वन विभाग की सहायता से जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा। वन विभाग की टीम ने बंदरों को पकड़ने का आश्वासन दिया है और गाँव में शांति बहाल करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
आने वाले दिनों में अगर बंदरों का आतंक कम होता है, तो गाँव के लोग फिर से सामान्य जीवन जी सकेंगे।
गाँव के प्रधान शिवकुमार का कहना है, “हमें उम्मीद है कि वन विभाग जल्द ही इन बंदरों को पकड़कर गाँव में शांति बहाल करेगा। फिलहाल, हम सभी को सतर्क रहना होगा और बंदरों के हमलों से बचने के लिए सावधानी बरतनी होगी।”
लहसड़ी गाँव में बंदरों के आतंक ने लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। ग्रामीण अपनी सुरक्षा के लिए डंडों का सहारा ले रहे हैं, जबकि प्रशासन और वन विभाग बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया में जुटे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह समस्या हल हो जाएगी और गाँव में सामान्य स्थिति लौट आएगी।