Deoria News: जिला मुख्यालय स्थित महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज में मरीजों की बढ़ती भीड़ से व्यवस्था में खलल पड़ रहा है। बुधवार को यहां पर मरीजों को हर जगह लंबा इंतजार करना पड़ा। रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर हर जगह मरीजों की लंबी कतारें लगीं और कई जगह ओपीडी में मरीजों के बीच भिड़ंत और हंगामा हुआ। सुरक्षा कर्मियों को लोगों को समझाकर शांत कराना पड़ा। गर्मी और उमस के बीच मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मरीजों की बढ़ी संख्या
मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि हो गई है। देवरिया जिले और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी लोग इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। बुधवार को कुल 2058 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि 1300 मरीजों ने फॉलो-अप के लिए पंजीकरण करवाया। सुबह 8 बजे से ही स्लिप काउंटर पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जो लगभग 1 बजे तक लगी रही। इसके बाद मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे, जहां कतारें लंबी होती गईं। सुबह 11:20 बजे तक मेडिसिन विभाग के दोनों कमरों में मरीजों की लंबी कतारें लग गई थीं। यहां मरीज एक-दूसरे को धक्का देते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी। सुरक्षा कर्मियों को इस भीड़ को संभालने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।
डॉक्टरों ने किया इलाज
मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों में डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज किया। डॉ. सराजुद्दीन, डॉ. विशालजीत, और डॉ. सरफराज़ सिद्धीकी ने 365 से अधिक मरीजों का इलाज किया। इन मरीजों में बुखार, पेट दर्द और पीठ दर्द से परेशान लोग अधिक थे। इसके अलावा अन्य बीमारियों के मरीज भी आए थे।
ऑर्थोपेडिक्स विभाग में भी काफी भीड़ रही, जहां लोगों ने बिना नंबर के जाने की कोशिश की और हंगामा किया। लेकिन, सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें समझाया और स्थिति को नियंत्रित किया। डॉ. गौरव सिंह, डॉ. प्रदीप और डॉ. शुभम ने 409 मरीजों का इलाज किया। ईएनटी विभाग में भी मरीजों की लंबी कतार लगी रही। डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने 200 से अधिक मरीजों का इलाज किया। इनमें अधिकांश मरीज कान संबंधित समस्याओं से परेशान थे।
आई डिपार्टमेंट में डॉ. अदिति, डॉ. अकांक्षा और डॉ. दयानंद ने 280 मरीजों का इलाज किया। त्वचा रोग विभाग में भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे थे। डॉ. अजीत पाल और डॉ. सुधा ने 187 मरीजों का इलाज किया। इसके अलावा सांस की समस्या, खांसी, सीने में दर्द और तपेदिक (टीबी) से परेशान मरीज भी मेडिकल कॉलेज आए थे। डॉ. अनुराग शुक्ला और डॉ. ज्योति सिंह ने 100 से अधिक मरीजों का इलाज किया। मानसिक बीमारी के लिए डॉ. रितिका द्विवेदी ने 76 मरीजों का इलाज किया। सामुदायिक चिकित्सा विभाग में डॉ. कोमल मोरे ने 65 से अधिक मरीजों का इलाज किया। वहीं, दंत चिकित्सा विभाग में डॉ. रेनु सिंह, डॉ. निहारिका और डॉ. प्रियंका ने 80 मरीजों का इलाज किया।
पैथोलॉजी और एक्स-रे विभाग में भी लंबी कतारें
पैथोलॉजी टेस्ट रजिस्ट्रेशन और एक्स-रे सेंटर में भी लोगों को काफी इंतजार करना पड़ा। उमस और गर्मी में लंबी कतारों में खड़े रहकर मरीजों और उनके तीमारदारों को बहुत परेशानी हुई। इसका असर पूरी व्यवस्था पर पड़ा, क्योंकि लोग गर्मी और असुविधा के बावजूद अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर थे। ओपीडी में बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण लोग काउंटर के बाहर और छांव में जमीन पर बैठ गए थे।
सर्पदंश की घटना
देवरिया जिले के पथरदेवा विकास खंड के सकतुआ बुजुर्ग गांव में बुधवार को एक सात वर्षीय बच्ची को सांप ने डंस लिया। बच्ची को अस्पताल में भर्ती किया गया और इलाज शुरू किया गया। अनशिका (7) पुत्री विनोद कुमार, अपने अन्य दोस्तों के साथ घर के पास बगीचे में खेल रही थी, तभी उसे सांप ने डंस लिया। घर पहुंचने पर परिवार ने तुरंत उसे मेडिकल कॉलेज, देवरिया में इलाज के लिए ले जाया, जहां डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया।
मौसम साफ होने के बाद बढ़ी भीड़
मौसम साफ होने के बाद मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि हो गई। हालांकि, उपचार, टेस्ट, दवाइयां और अन्य सुविधाएं सभी को उपलब्ध कराई गईं, लेकिन इस भारी भीड़ ने सिस्टम पर असर डाला। लोग परेशान थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने हर संभव प्रयास किया है कि सभी को उचित चिकित्सा सुविधा मिल सके।
व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता
सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए लोगों से सहयोग की आवश्यकता है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने पूरी कोशिश की है कि मरीजों को उचित इलाज मिल सके, लेकिन इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नागरिकों को भी संयमित और व्यवस्थित रहने की आवश्यकता है। सुरक्षा कर्मियों और डॉक्टरों को भीड़ को नियंत्रित करने में मदद करनी चाहिए, ताकि सभी को राहत मिल सके और मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
कुल मिलाकर, देवरिया के महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज में इलाज की व्यवस्था जारी है, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने से यहां की व्यवस्था पर दबाव पड़ रहा है। उम्मीद की जाती है कि अस्पताल प्रशासन इस भीड़ को सही तरीके से संभाले और लोगों को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।