Gorakhpur और आसपास के जिलों में मौसम में बड़ा बदलाव होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से 27 और 28 दिसंबर को हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके बाद तापमान में गिरावट आने से ठंड का प्रकोप और तेज होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इस बारे में चेतावनी जारी की है और लोगों को मौसम के अनुसार तैयारी करने की सलाह दी है।
पश्चिमी विक्षोभ का असर
मौसम वैज्ञानिक कैलाश पांडेय के अनुसार, 26 दिसंबर के आसपास एक अत्यधिक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के कई हिस्सों में असर दिखाएगा। इस विक्षोभ के चलते गोरखपुर और आसपास के इलाकों में बादल छाने और बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही, तापमान में तेज गिरावट हो सकती है। इस तरह के मौसम परिवर्तन के कारण ठंड बढ़ने का अनुमान है, जिससे लोगों को ठंड से बचाव के उपायों की आवश्यकता होगी।
तापमान में गिरावट का सिलसिला जारी
गोरखपुर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से तापमान में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। 25 और 26 दिसंबर को अधिकतम तापमान 23°C के आसपास दर्ज किया गया था, जबकि न्यूनतम तापमान 7.4°C तक गिर गया था। पिछले कुछ दिनों से बंगाल की खाड़ी से आ रही गर्म और नम हवाएं थम चुकी हैं, जिससे ठंडी उत्तरी हवाओं का असर देखने को मिला है। ठंडी हवाओं के प्रभाव से दिन और रात के तापमान में गिरावट आ रही है, और आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है।
बारिश के बाद बढ़ेगी ठंड
मौसम विभाग का कहना है कि 27 और 28 दिसंबर को हल्की से मध्यम बारिश के बाद ठंड और बढ़ सकती है। इस दौरान दिन और रात के तापमान में तेज गिरावट होने की संभावना जताई गई है। बारिश के बाद तेज ठंडी हवाओं का प्रभाव रहेगा, जिससे न्यूनतम तापमान और गिर सकता है। इस प्रकार के मौसम से ठंड में और वृद्धि हो सकती है, जिससे लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए मौसम विभाग और विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को इस समय अधिक ध्यान रखने की जरूरत है। ठंड के कारण शरीर में कमजोरी और अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे सर्दी-खांसी, बुखार जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन ने भी ठंड से बचाव के लिए सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने और जरूरतमंदों को कंबल बांटने की व्यवस्था तेज करने के निर्देश दिए हैं।
किसानों पर प्रभाव
मौसम में हो रहे बदलाव का असर किसानों पर भी पड़ने वाला है। गेहूं और सरसों जैसी फसलों के लिए हल्की बारिश फायदेमंद हो सकती है, लेकिन अगर बारिश ज्यादा होती है, तो फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। अधिक बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो सकता है, जो फसलों के लिए हानिकारक हो सकता है। इस समय किसान भाइयों को मौसम की स्थिति पर विशेष नजर रखनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।
मौसम विभाग ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि वे मौसम की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपनी फसलों की देखभाल करें। गेहूं और सरसों जैसी फसलों के लिए ठंडी और हल्की बारिश फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि यह फसलों के विकास के लिए अनुकूल होती है। वहीं, अधिक बारिश से बचाव के लिए किसान सही जल निकासी की व्यवस्था करें ताकि फसलें सुरक्षित रहें।
ठंड से बचाव के उपाय
ठंड बढ़ने के साथ-साथ ठंडी हवाओं और बारिश से बचाव के लिए लोगों को कुछ महत्वपूर्ण उपायों की आवश्यकता है। मौसम में बदलाव के कारण होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सबसे पहले, लोगों को गर्म कपड़े पहनने, घरों में हीटर या अलाव का उपयोग करने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों को गर्म रखना खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिकारक क्षमता कमजोर होती है।
इसके अलावा, ठंडे पेय पदार्थों से बचने और गर्म सूप, दूध जैसी चीजें पीने की सलाह दी गई है, जिससे शरीर में गर्मी बनी रहे। ठंड के कारण होने वाली खांसी, बुखार और जुकाम जैसी समस्याओं से बचने के लिए सेहतमंद आहार का सेवन करना जरूरी है। लोगों को बाहर जाने से पहले खुद को गर्म कपड़ों में ढककर बाहर जाना चाहिए और अधिक देर तक बाहर न रहकर घर में ही रहना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी सुझाव दिया है कि लोग ठंडी के दौरान पानी का सेवन कम न करें, क्योंकि ठंड के मौसम में शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
गोरखपुर और आसपास के इलाकों में 27 और 28 दिसंबर को मौसम में बदलाव की संभावना है, और इसके बाद ठंड का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। इस समय के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को। मौसम विभाग और प्रशासन की सलाह का पालन करते हुए ठंड से बचाव के उपायों को अपनाना जरूरी है। किसानों को भी मौसम की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और अपनी फसलों की देखभाल करनी चाहिए। इस तरह के मौसम बदलाव से न केवल स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है।