Basti: कप्तानगंज सरकारी कृषि बीज भंडार पर शनिवार को बड़ी संख्या में किसानों ने मुफ्त बीज किट वितरण की सूचना मिलने पर एकत्रित होकर हंगामा किया। सुबह 10 बजे जब कार्यालय खुला, तो किसान बीज प्राप्त करने के लिए कतार में लग गए। जैसे-जैसे समय बीतता गया, किसानों की संख्या बढ़ती गई। कुछ किसानों को बीज वितरित किए गए, लेकिन इसके बाद कार्यालय बंद कर दिया गया और बताया गया कि बीज खत्म हो गए हैं।
किसानों का हंगामा
जब किसानों को यह बताया गया कि उनके लिए कोई बीज शेष नहीं है, तो उन्होंने विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। किसानों ने आरोप लगाया कि सहायक विकास अधिकारी अरुण कुमार पटेल ने उन्हें गलत जानकारी दी थी। किसानों को बताया गया था कि उन्हें सरसों, मटर, चना, दाल आदि के बीज मुफ्त में दिए जाएंगे, लेकिन जब उन्होंने बीज प्राप्त करने का प्रयास किया, तो उन्हें लौटाया गया।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सरसों के बीज ₹80 प्रति किलोग्राम की दर से दिए जा रहे थे, जबकि सरकार का आदेश है कि बीज ₹55 प्रति किलोग्राम में दिए जाने चाहिए। इस मामले ने किसानों में गहरी निराशा और आक्रोश उत्पन्न किया।
किसानों की मांगें
किसानों ने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें उनके अधिकार के अनुसार बीज दिए जाने चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी किसान वंचित न रहे। इसके अलावा, उन्होंने सहायक विकास अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की भी मांग की। किसानों का कहना था कि जब सरकार मुफ्त बीज देने का वादा करती है, तो इसे सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद, जब स्थानीय अधिकारियों से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने आश्वासन दिया कि समस्या का समाधान किया जाएगा। एक अधिकारी ने कहा, “हम इस मामले की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसानों को सही जानकारी दी जाए।”
स्थानीय प्रशासन ने यह भी कहा कि उन्हें किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, किसानों ने आरोप लगाया कि यह सिर्फ एक बयान है और वास्तविकता में सुधार की आवश्यकता है।
किसान संगठनों की भूमिका
किसानों के हंगामे के बाद, स्थानीय किसान संगठनों ने भी इस मुद्दे पर ध्यान दिया। उन्होंने किसानों को एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने का आह्वान किया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन जारी रखेंगे। किसान संगठनों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की कि उन्हें बिना किसी बाधा के बीज मिलना चाहिए और जो भी समस्या है, उसका समाधान किया जाना चाहिए।
कप्तानगंज बीज भंडार पर हुआ यह हंगामा न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह किसानों के प्रति सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता को भी चुनौती देता है। ऐसे समय में जब किसान फसल की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें उचित संसाधनों का न मिलना चिंता का विषय है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों को उनकी जरूरतों के प्रति जागरूक और उत्तरदायी प्रशासन की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इससे किसानों में और भी अधिक असंतोष उत्पन्न हो सकता है।
किसानों की आवाज
अंत में, यह कहना उचित होगा कि किसानों की आवाज़ को सुनना और उनके अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे और उन्हें उनकी मेहनत का उचित फल मिलेगा। किसानों का यह संघर्ष न केवल उनके अधिकारों के लिए है, बल्कि यह दर्शाता है कि उन्हें अपने हक के लिए लड़ना कितना जरूरी है।
किसान संगठन और स्थानीय लोग एकजुट होकर इस मुद्दे को उठाने के लिए तैयार हैं। उम्मीद है कि इस घटना के बाद प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेगा और किसानों की समस्याओं का समाधान करेगा।