Gorakhpur News: गोरखपुर के बक्शीपुर बिजली निगम में एक ठगी का मामला उजागर हुआ है। एक उपभोक्ता के नाम पर, जिसके ऊपर 1.5 लाख रुपये का बकाया था और जो दो महीने पहले मृतक हो चुके थे, उनके घर पर एक नया बिजली कनेक्शन जारी किया गया। यह कनेक्शन 19 सितंबर 2024 को आवेदन करने के बाद 10 अक्टूबर 2024 को जारी किया गया।
घोटाले का आरोप
उपभोक्ता के छोटे बेटे ने आरोप लगाया कि बड़े भाई ने पिताजी के नाम पर एक फर्जी एनओसी बनवाकर, जेई और लाइनमैन के साथ मिलकर यह खेल खेला। इस मामले की शिकायत पत्र को देखते हुए, मुख्य अभियंता ने मामले की जांच के लिए एक्सईएन को निर्देशित किया है। उपभोक्ता सोमनाथ गुप्ता ने मुख्य अभियंता के कार्यालय में शिकायत की है। सोमनाथ, जो जटेपुर उत्तर, काली मंदिर के निवासी हैं, ने बताया कि उनके घर में बिजली का कनेक्शन काफी समय से चल रहा है, जिसका खाता संख्या 2518312000 है।
लंबित बिल की कहानी
यह कनेक्शन उनके मृतक पिता काशीनाथ गुप्ता के नाम पर है। पहले इस कनेक्शन पर 1.5 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया था। सोमनाथ ने बताया कि गलत बिजली बिल मिलने के बाद, वह इसे सही कराने के लिए निगम में चक्कर लगा रहे थे। जब विधानसभा चुनावों से पहले शिकायत की गई, तो सेक्शन के एक्सईएन ने परिसर का मीटर बदलकर नया मीटर लगवाया और बिल को संशोधित किया।
नए कनेक्शन की कहानी
बाद में, बकाया राशि 52 हजार रुपये हो गई, लेकिन यह बकाया राशि एक लाख रुपये से अधिक बढ़ गई। इसके बावजूद, जेई दुर्गाबारी, एसडीओ और लाइनमैन ने मिलकर फर्जी एनओसी के आधार पर नए बिजली कनेक्शन को जारी कर दिया, जबकि पहले बकाया राशि को हल नहीं किया गया था।
शिकायत और प्रशासन की कार्रवाई
सोमनाथ ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया कि उन्होंने कई बार एसडीओ से इस संबंध में शिकायत की, लेकिन उन्होंने न तो इसे गंभीरता से लिया और न ही मामले की जांच के लिए निर्देश दिया। मुख्य अभियंता को भेजे गए पत्र में उन्होंने मांग की कि फर्जी फॉर्म के आधार पर डिफॉल्टर के परिसर में लगाया गया नया कनेक्शन तुरंत रोका जाए। इसके साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि दोषी जेई, लाइनमैन और एसडीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई उपभोक्ता ठगी का शिकार न हो।
मौत का प्रमाण पत्र न होना
मुख्य अभियंता ने शिकायत पत्र को संज्ञान में लेते हुए मामले की जांच शुरू की। अगर शिकायत पत्र की जानकारी सही मानी जाए, तो यह कनेक्शन पूरी तरह से गलत है। सूत्रों के अनुसार, जांच में यह पाया गया कि बिना मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए, दोनों भाइयों के बीच के विभाजन फॉर्म की जाँच नहीं की गई थी।
बकाया राशि की जानकारी
पहले दिए गए बिजली कनेक्शन को स्थायी रूप से डिस्कनेक्ट नहीं किया गया था और बकाया राशि का निपटारा नहीं किया गया था। परिसर में 1,01,76,000 रुपये का बिजली बिल बकाया था। इसके बावजूद, केवल एक हलफनामा बनाकर पिता की फोटो और हस्ताक्षर के साथ निगम को दिया गया, जिससे जेई और एसडीओ ने बकाया राशि के बावजूद नया बिजली कनेक्शन जारी कर दिया।
बिजली निगम के नियम
बिजली निगम के सूत्रों ने बताया कि बिजली आपूर्ति कोड 2005 के तहत, यदि एक किरायेदार अपने कनेक्शन के अलावा एक नया कनेक्शन लेना चाहता है, तो ऐसी स्थिति में हलफनामा का उपयोग किया जाता है। यह हलफनामा मूल मालिक द्वारा अपने किरायेदार के पक्ष में लिखा जाता है। इसके अलावा, एक परिसर में दूसरी कनेक्शन को किरायेदारी हलफनामा और फॉर्मों के माध्यम से जारी किया जाता है। इसके अलावा, विरासत में परिवर्तन के लिए पहले सभी बकाया राशि का पूर्ण निपटारा करना आवश्यक है।
मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि मामला उनके ध्यान में आया है। इस मामले की जांच के लिए बक्शीपुर के कार्यकारी अभियंता ने पत्र लिखा है और पूरी जांच के बाद रिपोर्ट दो कार्यदिवसों में मांगी है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि बिजली निगम में धांधली का कितना बड़ा मामला सामने आया है। जब ऐसे मामलों की सच्चाई उजागर होती है, तो यह उपभोक्ताओं के लिए एक चेतावनी है कि वे अपनी बिजली कनेक्शन से संबंधित सभी दस्तावेजों और बकाया राशि की जानकारी को ध्यान में रखें।
इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए, उपभोक्ता और निगम के बीच विश्वास को बहाल करने के लिए तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। सोमनाथ गुप्ता की शिकायत और मामले की जांच से यह आशा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।