Gorakhpur में एक बड़ा धोखाधड़ी मामला सामने आया है, जिसमें 13 फार्मासिस्टों को फर्जी नियुक्ति पत्रों के माध्यम से सरकारी सेवा में नियुक्त किया गया था। इन नियुक्ति पत्रों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय से जारी किया गया था। यह नियुक्ति पत्र तीन अलग-अलग तारीखों पर जारी किए गए थे, लेकिन ये सब फर्जी निकले।
सभी फार्मासिस्टों को 18 नवंबर से पहले जॉइनिंग करने के लिए कहा गया था, लेकिन इस मामले की सच्चाई उस समय सामने आई जब CMO ने नियुक्ति पत्रों की जांच करवाई। जांच के दौरान पता चला कि नियुक्ति पत्रों पर लिखे गए सभी नंबर फर्जी थे और इनका कोई सत्यापन नहीं था। इस धोखाधड़ी के मामले में गोरखपुर के अतिरिक्त CMO ने कोतवाली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।
फर्जी नियुक्ति पत्रों का खेल
फर्जी नियुक्ति पत्रों में यह दर्शाया गया था कि इन फार्मासिस्टों की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत की गई थी और उनकी नियुक्ति की अवधि मार्च 31, 2025 तक थी। इन नियुक्ति पत्रों पर यह भी लिखा गया था कि इनकी कार्यकुशलता का मूल्यांकन मार्च 2025 में किया जाएगा और उस आधार पर अगले वर्ष के लिए सत्र की नवीनीकरण की प्रक्रिया की जाएगी।
फार्मासिस्टों को उनके स्थानों पर 18 नवंबर तक जॉइनिंग करने का निर्देश दिया गया था। नियुक्ति पत्रों के मुताबिक, सभी फार्मासिस्टों का कार्यस्थल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर था। यह नियुक्ति पत्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय से 11 नवंबर, 9 नवंबर और 26 अक्टूबर को जारी किए गए थे।
कहाँ से थे ये फर्जी नियुक्ति पत्र
फर्जी नियुक्ति पत्रों के द्वारा नियुक्त किए गए फार्मासिस्टों में से 5 को 11 नवंबर, 4 को 9 नवंबर और 4 को 26 अक्टूबर को नियुक्त किया गया था। इन फार्मासिस्टों का चयन गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, प्रयागराज और देवरिया से किया गया था। इस फर्जी नियुक्ति पत्र के जरिए यह धोखाधड़ी की गई थी, जिसमें यह बताया गया था कि इन सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात किया जाएगा।
फर्जी नियुक्ति पत्रों के माध्यम से इन सभी को 31 मार्च 2025 तक नियुक्त किया गया था। यही नहीं, इनके कामकाजी समय का मूल्यांकन मार्च 2025 में करने का भी जिक्र किया गया था, ताकि अगले वर्ष सत्र का नवीनीकरण किया जा सके। इन सभी को 18 नवंबर से पहले जॉइनिंग करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन समय रहते इस धोखाधड़ी का खुलासा हो गया।
फार्मासिस्टों की पहचान और स्थिति
धोखाधड़ी में शामिल फार्मासिस्टों की पहचान और उनका स्थान भी सामने आया है। जिन 13 फार्मासिस्टों को फर्जी नियुक्ति पत्र दिए गए थे, उनमें से तीन फार्मासिस्ट सिद्धार्थनगर से थे, दो फार्मासिस्ट कुशीनगर, दो महाराजगंज, दो गोरखपुर, दो बस्ती और एक-एक फार्मासिस्ट प्रयागराज और देवरिया से थे। यह लोग नियुक्ति पत्र लेकर जॉइनिंग करने पहुंचे थे, लेकिन फर्जी दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें धोखाधड़ी के आरोप में पकड़ा गया।
कलेक्शन की संभावना और धोखाधड़ी का साजिश
इस धोखाधड़ी का मुख्य उद्देश्य सरकारी नौकरी पाने के लिए लोगों से पैसे जुटाना था। यह संभव है कि इन फर्जी नियुक्तियों के माध्यम से संबंधित लोग सरकारी नौकरी के नाम पर पैसे वसूल रहे थे। यह धोखाधड़ी एक बड़े साजिश का हिस्सा हो सकती है, जिसमें सरकारी तंत्र को गुमराह किया गया था। पुलिस की जांच में यह पता चल सकता है कि इस मामले में कितने लोग शामिल हैं और उनकी भूमिका क्या थी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी का बयान
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इस मामले में कहा कि यह एक गंभीर मामला है और इसे लेकर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि इन फर्जी नियुक्ति पत्रों को जारी करने के मामले में दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। CMO ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में पुलिस ने कोतवाली में FIR दर्ज कर दी है और जल्द ही मामले की जांच शुरू की जाएगी। पुलिस का कहना है कि इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।
नियुक्ति पत्रों की सत्यता की जांच में लापरवाही
यह मामला यह भी दर्शाता है कि सरकारी तंत्र में नियुक्ति पत्रों की सत्यता की जांच के दौरान कुछ लापरवाही भी हुई थी। अगर समय रहते इन नियुक्ति पत्रों की जांच करवाई जाती, तो यह धोखाधड़ी जल्दी पकड़ी जा सकती थी। अब प्रशासन इस बात पर ध्यान दे रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
इस मामले में प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि सभी नियुक्ति पत्रों की सत्यता की जांच और मजबूत की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी की घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटना गोरखपुर में सरकारी नियुक्ति प्रक्रियाओं की कड़ी जांच की आवश्यकता को उजागर करती है। इसके माध्यम से प्रशासन को यह सीखने का अवसर मिलता है कि किस तरह से फर्जी दस्तावेजों के द्वारा लोगों को ठगा जा सकता है। अब इस मामले की जांच पूरी होने के बाद, प्रशासन धोखाधड़ी में शामिल लोगों को कड़ी सजा दिलवाने का प्रयास करेगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।