UP News: मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (एसपी) के प्रत्याशी हाजी रिजवान पर पुलिस के खिलाफ अपशब्द और हंगामा करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला उस वक्त सामने आया जब तीन दिन पहले हाजी रिजवान की पुलिस अधिकारियों से मुँढापांडे थाने के बाहर गरमागरमी हुई थी। इस दौरान एक वीडियो भी सामने आया जिसमें हाजी रिजवान को पुलिस के खिलाफ अभद्र भाषा का उपयोग करते हुए देखा गया। पुलिस ने इसी वीडियो के आधार पर हाजी रिजवान और उनके 10-15 समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
मामले की शुरुआत
बीते बुधवार को हाजी रिजवान मुँढापांडे थाने पहुँचे थे, जहाँ उनकी पुलिस के साथ बहस हुई। हाजी रिजवान का कहना था कि उनके समर्थकों को परेशान किया जा रहा है और यदि ऐसा होता रहा तो वह थाने के बाहर धरने पर बैठ जाएंगे। इस विवाद के दौरान एक वीडियो बनाया गया जिसमें हाजी रिजवान पुलिस को धमकी देते हुए नजर आए। इसके बाद पुलिस अधिकारी नरेंद्र कुमार ने मुँढापांडे थाने में एफआईआर दर्ज की जिसमें उन्होंने बताया कि हाजी रिजवान ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर पुलिस पर आरोप लगाए और सरकारी कार्य में बाधा डाली।
एफआईआर में क्या है आरोप?
इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार ने अपनी एफआईआर में कहा कि हाजी रिजवान और उनके समर्थकों ने पुलिस के साथ गाली-गलौज की, पुलिस प्रशासन की छवि को धूमिल करने के लिए एकतरफा वीडियो बनाया और उसे वायरल किया। इंस्पेक्टर के मुताबिक, इस हंगामे के दौरान सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ, जिससे जनता को परेशानी हुई।
एफआईआर में हाजी रिजवान पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें धारा 223 (सरकारी कार्य में बाधा डालना), धारा 191 (2) (हिंसा का प्रयास) और धारा 121 (1) (सरकारी कर्मचारी को कर्तव्य से रोकना) जैसी धाराएं शामिल हैं। इनमें से धारा 121 (1) के तहत दोषी पाए जाने पर पाँच साल तक की सजा हो सकती है।
हाजी रिजवान का पक्ष
इस मामले पर हाजी रिजवान ने एक प्रमुख समाचार पत्र को दिए बयान में कहा कि उन्होंने किसी को गाली नहीं दी और थाने केवल अपने कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए गए थे। उनका कहना था कि यदि उनके कार्यकर्ताओं को परेशान किया जाता है तो वह धरना देने के लिए तैयार हैं। वहीं, एसपी के जिला अध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने भी कहा कि हाजी रिजवान केवल अपने एक कार्यकर्ता को छुड़ाने थाने गए थे और उस दौरान पुलिस के साथ गरमागरमी हो गई थी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: एसपी और भाजपा का आरोप-प्रत्यारोप
इस पूरे मामले पर भाजपा ने सख्त रुख अपनाया है। भाजपा के जिला अध्यक्ष आकाश कुमार पाल ने कहा कि “हूलिगनिज़्म और अराजकता एसपी का संस्कृति का हिस्सा है। यह उनकी डीएनए में है। अब भाजपा की सरकार है, इसलिए इस तरह की अराजकता नहीं चलेगी।” उन्होंने एसपी पर आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ता हमेशा से सरकारी अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, और उनके आचरण से आम जनता के प्रति उनकी सोच का अंदाजा लगाया जा सकता है। भाजपा का कहना है कि एसपी की सरकार होने पर पुलिस को दबाने की आदतें एक बार फिर सामने आ रही हैं।
वहीं, एसपी की ओर से कहा गया कि भाजपा के अधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस का दुरुपयोग कर हाजी रिजवान जैसे नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। एसपी का मानना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक उद्देश्य से किया गया है।
कौन हैं हाजी रिजवान?
हाजी रिजवान कुंदरकी के एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। चार दशकों से राजनीति में सक्रिय हाजी रिजवान ने अपना पहला चुनाव 2002 में समाजवादी पार्टी से लड़ा और कुंदरकी सीट से विधायक बने। इसके बाद 2007 में बहुजन समाज पार्टी के हाजी अकबर से चुनाव हार गए। हालांकि, 2012 और 2017 में उन्होंने फिर से कुंदरकी सीट से चुनाव जीता। 2022 में समाजवादी पार्टी ने उनका टिकट काटकर उनके स्थान पर जियाउर रहमान बरक को उम्मीदवार बनाया, जिससे नाराज होकर हाजी रिजवान बहुजन समाज पार्टी में चले गए और वहां से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।
कुंदरकी सीट पर जातीय समीकरण
कुंदरकी विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 58 प्रतिशत है। इसके अलावा ओबीसी और दलित मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में जियाउर रहमान बरक ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर संभल सीट से चुनाव जीता, जिससे कुंदरकी सीट पर उपचुनाव होना तय हो गया। ऐसे में हाजी रिजवान के पुनः एसपी में शामिल होने से यह उम्मीद जताई जा रही है कि एसपी द्वारा उन्हें टिकट दिया जा सकता है।
कुंदरकी सीट पर चुनावी माहौल गरम हो चुका है। एसपी और भाजपा के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना है। हाजी रिजवान और भाजपा के उम्मीदवार रामवीर ठाकुर के बीच मुकाबला तय है। हाजी रिजवान की राजनीतिक स्थिति इस चुनाव के परिणाम पर निर्भर करती है।