Gorakhpur विश्वविद्यालय में 22 से 24 नवंबर तक आयोजित होने जा रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के 70वें राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले ही इस कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार को इस कार्यक्रम के लिए भूमि पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने प्रोफेसरों, कर्मचारियों और छात्रों को परिवार समेत आमंत्रित किया। सोशल मीडिया पर इस न्योता पत्र के वायरल होते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई, और विपक्षी दलों ने कुलपति के इस कदम पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसे कुलपति की गरिमा के खिलाफ बताया, जबकि सोशल मीडिया पर लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या समाजवादी पार्टी की छात्र इकाई को भी इस कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिलेगा?
राजनीतिक दलों ने उठाए सवाल
इस न्योते के वायरल होने के बाद कांग्रेस के नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष निर्मला पासवान और नेता विश्वविजय सिंह, आलोक शुक्ला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कुलपति के इस कदम को विश्वविद्यालय की निष्पक्षता के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रमुख का एक राजनीतिक दल के छात्र संगठन के कार्यक्रम में आमंत्रण देना उचित नहीं है। उनके अनुसार, एक शैक्षिक संस्थान के प्रमुख के लिए किसी विशेष संगठन से जुड़ना विश्वविद्यालय की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
डीडीयू प्रशासन ने दी सफाई
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में विवाद बढ़ने के बाद दीन दयाल उपाध्याय (DDU) विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार शाम को इस मामले में सफाई दी। विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ABVP ने कुलपति को मेहमान के रूप में आमंत्रित किया था और विश्वविद्यालय इस कार्यक्रम का आयोजक नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इस संबंध में कोई संदेश सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया है, तो वह कुलपति की अनुमति के बिना है।
ABVP कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटा डीडीयू प्रशासन
सफाई जारी करने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन विवाद को पूरी तरह से समाप्त करने में असमर्थ रहा है। सोशल मीडिया पर लोग अभी भी चर्चा कर रहे हैं कि ABVP के राष्ट्रीय अधिवेशन में कुलपति के परिवार समेत आमंत्रित होने का क्या कारण हो सकता है। विश्वविद्यालय में यह भी चर्चा हो रही है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय का पूरा प्रशासन, कुलपति सहित, इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
डीडीयू प्रशासन में दहशत का माहौल
विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्तमान कुलपति और अन्य अधिकारी इस बात से डरे हुए हैं कि पिछले कुलपति के साथ जो घटना हुई थी, वह उनके साथ भी हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुलपति को ABVP के कारण कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, और उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। इस कारण DDU के अधिकारी और कर्मचारी अब ABVP के कार्यक्रम को सफल बनाने में मजबूर हैं और इसी दबाव के चलते वे इस कार्यक्रम की पूरी तैयारी कर रहे हैं।
भूमि पूजन में कुलपति का शामिल होना
शुक्रवार को आयोजित भूमि पूजन में कुलपति शांतनु रस्तोगी के साथ प्रो. सुषमा पांडे, प्रो. अजय शुक्ला और कई अन्य वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल हुए। इस दौरान कुलपति शांतनु रस्तोगी ने हवन करते हुए ABVP अधिवेशन की सफलता के लिए प्रार्थना भी की। इस भूमि पूजन के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन तस्वीरों में कुलपति और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी हवन में भाग लेते हुए देखे जा सकते हैं, जिससे यह चर्चा और भी तेज हो गई है कि विश्वविद्यालय का पूरा प्रशासन इस कार्यक्रम के समर्थन में है।
समाजवादी पार्टी की छात्र इकाई ने उठाए सवाल
इस पूरे मामले को लेकर समाजवादी पार्टी की छात्र इकाई ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय के प्रमुख का किसी विशेष संगठन से जुड़ना अनुचित है, और यह विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या उन्हें भी इसी तरह के कार्यक्रम में भाग लेने का अधिकार मिलेगा या नहीं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
क्या कहते हैं शिक्षा विशेषज्ञ?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी विश्वविद्यालय के प्रमुख का किसी विशेष संगठन के कार्यक्रम में भाग लेना, भले ही वह आमंत्रण पर हो, विश्वविद्यालय की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, विश्वविद्यालय का प्रमुख एक सार्वजनिक पद है, और उनका किसी राजनीतिक संगठन के कार्यक्रम में जाना संस्थान की गरिमा के खिलाफ हो सकता है। एक प्रमुख शिक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि शैक्षिक संस्थान किसी भी प्रकार की राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहें ताकि विद्यार्थियों को निष्पक्ष और स्वतंत्र वातावरण में शिक्षा प्राप्त हो सके।
अधिवेशन से पहले बढ़ा विवाद
ABVP के इस राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले ही इस मामले पर मचे बवाल से विश्वविद्यालय और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। जहाँ एक ओर ABVP के समर्थक इस कार्यक्रम को एक राष्ट्रीय स्तर के छात्र संगठन के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। आगामी दिनों में देखना होगा कि इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन और ABVP की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।