Gorakhpur का सुमेर सागर क्षेत्र इन दिनों बंदरों के आतंक से परेशान है। जहां लोग पहले अपराधियों, तेंदुओं और भालुओं से डरते थे, वहीं अब बंदरों ने यहां के निवासियों को इस कदर घेर लिया है कि वे घरों से बाहर निकलने में भी डरते हैं। सुमेर सागर में बंदरों का उत्पात इतना बढ़ चुका है कि लोग अपने घरों की छतों पर भी नहीं जा पा रहे हैं, और डर के साये में जी रहे हैं।
बंदरों का आतंक:
सुमेर सागर क्षेत्र में बंदरों के उत्पात का सिलसिला पिछले एक साल से लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां के निवासी बताते हैं कि पहले कुछ बंदर आसपास दिखाई देते थे, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इनकी संख्या इतनी बढ़ गई है कि अब ये पूरी तरह से इस इलाके के गवाह बन चुके हैं। बंदर न केवल लोगों से सामान छीनते हैं, बल्कि बच्चों पर भी हमला करते हैं। इस कारण से लोग घरों के दरवाजे और खिड़कियां हमेशा बंद रखते हैं, ताकि बंदर घर के अंदर न घुस सकें।
स्थानीय निवासी दीपक गोयल ने बताया कि “बंदरों का उत्पात इतना बढ़ चुका है कि अब हम लोग घर की छत पर भी नहीं जा पाते। महिलाएं घर का कपड़ा भी नहीं सुखा पातीं क्योंकि बंदर अक्सर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं।” यहां तक कि मंदिर के दरवाजे भी बंद कर दिए गए हैं क्योंकि बंदर वहां भी सामान चुराने पहुंच जाते हैं।
स्कूलों में बच्चों का डर:
सुमेर सागर के कड़ोरी लाल गली में दो स्कूल हैं, जहां बच्चों की बड़ी संख्या पढ़ने आती है। पिछले कुछ महीनों में ये बंदर बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। बच्चों के बैगों को छीनकर भाग जाने और उनसे सामान छीनने के कारण बच्चों में डर फैल गया है। एक घटना में तो बंदर ने एक बच्चे पर हमला भी किया। अब स्कूल जाने वाले बच्चे डर से स्कूल जाने से कतराते हैं।
स्थानीय निवासी अशोक चंदवस्या ने कहा, “पहले यहां कुछ ही बंदर हुआ करते थे, लेकिन पिछले एक साल में इनकी संख्या काफी बढ़ गई है। ये बच्चों को स्कूल जाते समय पीछा करते हैं और उनके बैग छीनकर भाग जाते हैं। बच्चे डर के साये में जीने को मजबूर हो गए हैं।” इस डर के कारण स्कूल के बच्चे और उनके अभिभावक खासे परेशान हैं।
व्यवसायियों पर भी बढ़ा खतरा:
सुमेर सागर क्षेत्र में व्यापारियों के लिए भी बंदर एक बड़ी समस्या बन गए हैं। दुकानों में रखे सामान को बंदर अक्सर उठा लेते हैं और दुकानदारों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इसके कारण दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामने प्लास्टिक की चादरें लगा रखी हैं, लेकिन कई बार बंदर इन चादरों के अंदर भी घुस जाते हैं और सामान को छीनकर ले जाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि यह स्थिति उनकी रोजमर्रा की आजीविका के लिए भी खतरा बन गई है।
दीपक गोयल ने बताया कि “हमने दुकानों के सामने प्लास्टिक लगाने की कोशिश की थी, लेकिन बंदर इसमें भी घुस जाते हैं और नुकसान करते हैं। इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि हम भी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।”
महिलाओं और बच्चों की समस्याएं:
बंदरों के आतंक से सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और बच्चों को हो रही है। महिलाएं घर का काम भी ठीक से नहीं कर पा रही हैं, क्योंकि उन्हें घर की छत पर कपड़े सुखाने में डर लगता है कि बंदर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं, बच्चों को स्कूल जाने में भी डर लगता है क्योंकि बंदर उनका पीछा करते हैं और सामान छीनते हैं।
इस तरह से बंदरों का आतंक केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं बल्कि एक सामाजिक और मानसिक दबाव का कारण बन चुका है। लोग घरों में बंद होकर रह गए हैं और उनके दैनिक कार्यों में भी अवरोध उत्पन्न हो रहा है।
समाधान के प्रयास:
बंदरों की समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन को कई बार सूचित किया गया है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाए या फिर उन्हें नियंत्रित करने के लिए किसी और उपाय को लागू किया जाए। कुछ लोग यह भी सुझाव दे रहे हैं कि बंदरों को मारने के बजाय उनका सही तरीके से पुनर्वास किया जाए ताकि वे लोगों के लिए खतरा न बनें।
सुमेर सागर क्षेत्र में बंदरों का आतंक न केवल लोगों की मानसिक शांति को भंग कर रहा है, बल्कि बच्चों और महिलाओं के लिए यह एक गंभीर सुरक्षा खतरा भी बन चुका है। बंदरों के बढ़ते उत्पात को रोकने के लिए प्रशासन को शीघ्र कोई ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यदि इस समस्या का समाधान जल्दी नहीं किया गया, तो यह और भी जटिल हो सकता है, जिससे क्षेत्रवासियों को और भी अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।