Gorakhpur: गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने देवरिया बाइपास के चौड़ीकरण के दौरान हटाए गए श्री हनुमान मंदिर को फिर से स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब इस मंदिर में श्रद्धालु पहले की तरह नियमित रूप से पूजा अर्चना कर सकेंगे। GDA ने मंदिर को अपने परिसर में फिर से स्थापित किया और साथ ही मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य भी किया। इस मंदिर में भगवान हनुमान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा भी धूमधाम से की गई।
मंदिर का पुनर्निर्माण: एक लंबी प्रतीक्षा के बाद
देवरिया बाइपास सड़क के चौड़ीकरण के दौरान मंदिर को वहां से हटा दिया गया था, जिसके बाद आसपास के क्षेत्रों में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, सड़क चौड़ीकरण के बाद आमतौर पर मंदिर का निर्माण कार्य संबंधित एजेंसी द्वारा कराया जाता है, लेकिन इस मामले में गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने इसे अपने जिम्मे लिया। अब मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद लोगों की धार्मिक भावनाओं को सम्मान मिला है और यहां आने वाले लोग अपनी श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना कर सकेंगे।
श्रद्धालुओं का मनोबल बढ़ाने वाला कदम
गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने इस मंदिर को अपने परिसर में स्थापित किया है, जो कि लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बन गया है। पहले जो श्रद्धालु श्री हनुमान की पूजा Authority के मुख्य द्वार पर स्थित मंदिर में करते थे, अब वे यहां एक बेहतर और सुसज्जित स्थान पर अपनी पूजा कर सकेंगे। खासतौर पर आस-पास के इलाके की महिलाएं जो रोजाना यहां आती थीं, उनके लिए यह मंदिर एक नई आशा का प्रतीक बनकर उभरा है।
मंदिर के पुनर्निर्माण के साथ ही GDA ने यहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का भी ध्यान रखा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मंदिर में पूजा अर्चना कर सकें।
प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन
शनिवार को GDA परिसर में श्री हनुमान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा बड़े धूमधाम से की गई। इस धार्मिक आयोजन में GDA के सभी अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। इस मौके पर एक उत्सव का माहौल था और पूरे परिसर में धार्मिक ध्वनियों के बीच श्रद्धालुओं का जोश देखने लायक था।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह में गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आनंद वर्धन, सचिव उदय प्रताप सिंह, प्रमुख अभियंता किशन सिंह, कार्यकारी अभियंता नरेंद्र कुमार, सहायक अभियंता ए.के. त्यागी, राजा बहादुर सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया, जिन्होंने इस पूजा को साकार होते देखा और भगवान हनुमान से आशीर्वाद लिया।
मंदिर का स्थान और इसकी सजावट
मंदिर को GDA परिसर के गेट के अंदर स्थापित किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग यहां आकर भगवान हनुमान की पूजा कर सकें। मंदिर का नया स्थान श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक है, और यह स्थान ऐसे बनाया गया है कि यहां आने वाले लोगों को कोई परेशानी न हो। मंदिर का सजावट भी अत्यंत आकर्षक किया गया है, जिससे यह धार्मिक स्थल और भी सुंदर दिखाई देता है।
स्थानीय महिलाओं का मंदिर से जुड़ा प्रेम
गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा इस मंदिर का पुनर्निर्माण स्थानीय समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के रूप में देखा जा रहा है। खासतौर से महिलाएं जो इस मंदिर में पूजा करने के लिए नियमित रूप से आती थीं, उनका मनोबल बढ़ाने वाला कदम उठाया गया है। पहले जो मंदिर सड़क चौड़ीकरण के कारण हटाया गया था, उसकी जगह अब एक नया मंदिर बन गया है, जहां श्रद्धालु न केवल पूजा कर सकते हैं, बल्कि अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन भी कर सकते हैं।
गोरखपुर के विभिन्न हिस्सों से महिलाएं इस मंदिर में पूजा करने के लिए आती थीं, और अब उनकी यह भावना पूरी हुई है। मंदिर के पुनर्निर्माण ने क्षेत्रीय समाज में एक नई उम्मीद और विश्वास का संचार किया है। महिलाएं इस मंदिर के पुनर्निर्माण से काफी खुश हैं और उनका मानना है कि यह स्थान अब उनके लिए और भी पवित्र और सम्मानजनक हो गया है।
GDA का योगदान और प्रशासन की सक्रियता
गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने इस पुनर्निर्माण में अपनी सक्रियता दिखाई है, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास और संतोष की भावना पैदा हुई है। यह कदम न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता का भी उदाहरण है। GDA ने यह सुनिश्चित किया कि इस मंदिर का निर्माण अच्छे तरीके से हो और श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद GDA परिसर में अन्य सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा ताकि यहां आने वाले लोग न केवल पूजा कर सकें, बल्कि मंदिर के आस-पास की व्यवस्थाओं का भी लाभ उठा सकें।
इस पुनर्निर्माण कार्य से यह स्पष्ट हो गया है कि धार्मिक स्थल केवल पूजा के स्थान नहीं होते, बल्कि ये सामाजिक एकता और सामूहिक विश्वास के प्रतीक होते हैं। गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने इस कदम से न केवल धार्मिक मान्यताओं को सम्मान दिया है, बल्कि समुदाय के बीच सहयोग और विश्वास को भी बढ़ावा दिया है। इस मंदिर के पुनर्निर्माण से स्थानीय लोग न केवल खुशी महसूस कर रहे हैं, बल्कि उनके विश्वास को भी एक नई दिशा मिली है।
इस मंदिर का पुनर्निर्माण केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि एक सामूहिक धार्मिक भावना का पुनर्निर्माण है, जो स्थानीय समुदाय के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। अब यहां लोग अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा कर सकेंगे और यह स्थान उन्हें सशक्त करेगा।