PROBA-3 Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष में अपनी सफलता का झंडा गाड़ते हुए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के Proba-3 सोलर मिशन को आज शाम लॉन्च करने का निर्णय लिया है। यह सोलर मिशन बुधवार शाम को PSLV-C 59 रॉकेट से लॉन्च होने वाला था, लेकिन Proba-3 अंतरिक्ष यान में कुछ तकनीकी खामी के कारण इसे कल के लिए स्थगित कर दिया गया। अब यह मिशन आज, यानी गुरुवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से शाम 4:15 बजे लॉन्च होगा।
Proba-3 मिशन क्या है?
Proba-3 मिशन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की Proba श्रृंखला का तीसरा सौर मिशन है। इस मिशन का उद्देश्य सूर्य के बाहरी वातावरण (कोरोना) का अध्ययन करना है। Proba-3 में दो उपग्रह शामिल हैं जो एक साथ उड़ेंगे और सूर्य के बाहरी वातावरण के बारे में सबसे सूक्ष्म जानकारी पृथ्वी पर भेजेंगे।
Proba-3 मिशन की विशेषताएं और उद्देश्य
Proba-3 मिशन में दो उपग्रह एक साथ लॉन्च होंगे और 150 मीटर की दूरी पर स्थित रहेंगे। इन दोनों उपग्रहों को एक साथ लॉन्च किया जाएगा, लेकिन इसके बाद ये एक दूसरे से अलग हो जाएंगे और फिर एक सटीक सौर कोरोनाग्राफ बनाने के लिए फिर से एक साथ आकर सूर्य के कोरोना का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इन उपग्रहों में से पहला कोरोनाग्राफ स्पेसक्राफ्ट है और दूसरा ऑक्लटर स्पेसक्राफ्ट है। दोनों उपग्रहों का वजन 550 किलोग्राम है।
Proba-3 मिशन की वैश्विक विशेषताएं
Proba-3 मिशन को दुनिया का पहला प्रिसीजन फॉर्मेशन फ्लाइंग सैटेलाइट मिशन कहा जा सकता है। इसका मतलब है कि दो उपग्रह एक साथ उड़ान भरेंगे और पृथ्वी पर सूचना भेजेंगे। इन उपग्रहों के उद्देश्य और कार्य विशेष रूप से सूर्य के कोरोना को समझने में मदद करेंगे। यह मिशन सूर्य के आंतरिक कोरोना और बाहरी कोरोना के बीच के अंतराल का अध्ययन करेगा।
Proba-3 मिशन का महत्व और लागत
Proba-3 मिशन में कई देशों के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम किया है। इस मिशन में स्पेन, बेल्जियम, पोलैंड, इटली और स्विट्जरलैंड की टीमें शामिल हैं। इस मिशन की लागत लगभग 200 मिलियन यूरो यानी करीब 1,778 करोड़ रुपये है। यह मिशन सूर्य के कोरोना के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा और इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के अध्ययन में नई जानकारी प्राप्त करना है।
Proba-3 मिशन के पीछे ISRO का योगदान
ISRO ने Proba मिशन के पहले चरण की भी मदद की थी। Proba-3 मिशन के पहले चरण की शुरुआत 2001 में ISRO द्वारा की गई थी, जब पहला Proba मिशन लॉन्च हुआ था। इसके बाद ISRO ने लगातार अंतरराष्ट्रीय मिशनों में सहयोग किया है, और अब Proba-3 के लॉन्च के साथ ISRO की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
क्या था लॉन्च का कारण स्थगित होने का?
कल (बुधवार) को Proba-3 मिशन के लॉन्च को तकनीकी कारणों से स्थगित किया गया था। उपग्रह में कुछ खामी का पता चला था, जिसे दूर किया गया और फिर लॉन्च के लिए एक नई तारीख तय की गई। हालांकि, अब यह मिशन आज निर्धारित समय पर लॉन्च होगा।
Proba-3 मिशन एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सहयोग है और इसका उद्देश्य सूर्य के बाहरी वातावरण (कोरोना) के अध्ययन में नई जानकारी प्रदान करना है। इस मिशन का विशेष आकर्षण यह है कि यह दुनिया का पहला प्रिसीजन फॉर्मेशन फ्लाइंग सैटेलाइट मिशन है। ISRO के सहयोग से यह मिशन अंतरिक्ष विज्ञान में एक नया अध्याय जोड़ेगा और सूर्य के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान देगा।