Gorakhpur नगर निगम में भर्ती पर सियासी घमासान, महापौर का पलटवार

Gorakhpur नगर निगम में भर्ती पर सियासी घमासान, महापौर का पलटवार

Gorakhpur नगर निगम में रिटायर्ड तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती पर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के ट्वीट के बाद महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। महापौर ने अखिलेश यादव को तथ्यों की पुष्टि करने की सलाह दी है और कहा कि यह मामला पहले भी हो चुका है।

आउटसोर्सिंग भर्ती की प्रक्रिया में ताजगी नहीं

महापौर ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, यह पहले भी हुआ था। 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान भी रिटायर्ड नायब तहसीलदार सत्येश श्रीवास्तव को आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्त किया गया था, जो आज भी कार्यरत हैं। यह नियुक्ति जुलाई 2013 में हुई थी। महापौर ने इस संदर्भ में बताया कि यह प्रक्रिया पहले भी समाजवादी पार्टी की सरकार में चली थी, और वर्तमान में इसे फिर से लागू किया जा रहा है।


Gorakhpur नगर निगम में भर्ती पर सियासी घमासान, महापौर का पलटवार

अखिलेश यादव की पोस्ट को महापौर ने बताया गलतफहमी

अखिलेश यादव ने गोरखपुर नगर निगम के विज्ञापन को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाला था। पोस्ट में उन्होंने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि बीजेपी को पूरा ‘सरकार’ ही आउटसोर्स कर देना चाहिए, ताकि सभी कमीशन एक जगह सेट हो जाए। इसके बाद महापौर ने इस पोस्ट को पूरी तरह से भ्रामक बताया और कहा कि बिना तथ्यों की जांच किए समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बीजेपी सरकार को बदनाम करने और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

महापौर ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव की टिप्पणियां पूरी तरह से गलत हैं, क्योंकि यह प्रक्रिया विकास कार्यों को देखते हुए की जा रही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम में विकास के कार्य बढ़े हैं, साथ ही शहर की जनसंख्या और प्रोजेक्ट्स का दायरा भी बढ़ा है। ऐसे में राजस्व से संबंधित मामलों को सुलझाने के लिए रिटायर्ड राजस्व अधिकारी और कर्मचारी की नियुक्ति की आवश्यकता महसूस हुई है।

विज्ञापन में स्पष्ट रूप से लिखा है ‘आउटसोर्सिंग’

महापौर ने स्पष्ट किया कि 19 नवंबर को जो भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है, उसमें यह साफ-साफ उल्लेख किया गया है कि ये पद आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरे जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया नगर निगम के लिए तीसरी बार की जा रही है, और हर बार इसका उद्देश्य राजस्व संबंधित मामलों को प्राथमिकता देना है।

राज्य सरकार और निजी कंपनियों में भी आउटसोर्सिंग

महापौर ने यह भी बताया कि केवल नगर निगम ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के अन्य विकास प्राधिकरण, औद्योगिक विकास प्राधिकरण और कई बड़ी निजी कंपनियां भी रिटायर्ड राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं लेती हैं। यह प्रक्रिया सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में आम है, और इसका उद्देश्य कार्यों को प्रभावी ढंग से करना है।

अखिलेश यादव का आरोप: बेरोजगारी और आरक्षण पर हमला

अखिलेश यादव ने आउटसोर्सिंग के खिलाफ तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी को पूरी सरकार को आउटसोर्स कर देना चाहिए, ताकि सभी कमीशन एक जगह पर सेट हो सकें। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि यह बेरोजगारी को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है और आरक्षण के संवैधानिक अधिकार को छीना जा रहा है। उन्होंने बीजेपी सरकार से यह प्रस्ताव वापस लेने की मांग की और इसे PDA के खिलाफ एक आर्थिक साजिश करार दिया।

राजनीतिक बयानबाजी और विवाद की जड़ें

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर जहां बीजेपी समर्थक इसे विकास कार्यों की आवश्यकता मान रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे रोजगार और आरक्षण पर हमला मानता है। अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के नेता इसे बेरोजगारी और आरक्षण का मुद्दा बना रहे हैं, जबकि महापौर इसे विकास और प्रशासनिक जरूरतों के रूप में देख रहे हैं। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच सियासी दांवपेंच बढ़ते जा रहे हैं।

आउटसोर्सिंग पर बढ़ती चर्चा और विवाद

यह विवाद सिर्फ गोरखपुर नगर निगम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार और आरक्षण के मुद्दे पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। इससे यह साफ होता है कि इस मामले में आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानों की लहर और तेज हो सकती है। यह मुद्दा न केवल गोरखपुर नगर निगम, बल्कि पूरे प्रदेश और देश में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय बन चुका है।

समाजवादी पार्टी का विरोध और बीजेपी का बचाव

समाजवादी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि यह भर्ती प्रक्रिया सरकारी कर्मचारियों के स्थान पर आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दे रही है, जिससे बेरोजगारी और आरक्षण की राजनीति को नुकसान हो सकता है। वहीं, बीजेपी और महापौर इस प्रक्रिया को शहर की बढ़ती जरूरतों और विकास कार्यों के तहत उचित ठहरा रहे हैं।

गोरखपुर नगर निगम में रिटायर्ड कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्तियों का मुद्दा अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। यह मुद्दा रोजगार और आरक्षण से जुड़ी संवेदनशील समस्याओं को उजागर कर रहा है। इसके साथ ही यह उन सवालों को भी जन्म दे रहा है, जिनका जवाब आने वाले समय में सरकार और विपक्ष को देना पड़ेगा। अब यह देखना होगा कि जनता इस पूरे विवाद को किस नजरिए से देखती है और आगामी चुनावों में इस मुद्दे का कितना असर होता है।

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