Monkey terror: लहसड़ी गांव में शरारती बंदर की दस्तक खत्म, 15 हजार रुपये में पकड़ा गया

Monkey terror: लहसड़ी गांव में शरारती बंदर की दस्तक खत्म, 15 हजार रुपये में पकड़ा गया

Monkey terror:  खोराबार क्षेत्र, लहसड़ी गांव में पिछले कुछ दिनों से उत्पात मचा रहे एक शरारती बंदर को आखिरकार गांव वालों ने पकड़ ही लिया। गांव वालों ने मिलकर 15 हजार रुपये इकट्ठा किए और एक ‘बंदर पकड़ने वाले’ को बुलाया। यह घटना सोमवार को हुई, जिसके बाद गांव में शांति लौट आई।

गांव वालों का कहना है कि इस बंदर ने गांव में कई लोगों को काटा, जिसमें 25 वर्षीय निखलेश का पैर भी घायल हुआ। बंदर के आतंक के चलते गांव में काफी गुस्सा फैल गया था। गांव के मुखिया ने सोमवार की सुबह बंदर पकड़ने वालों को बुलाने का फैसला किया, और सुबह छह बजे से ही टीम ने बंदर को पकड़ने की कोशिशें शुरू कीं।

तीन घंटे की मेहनत के बाद, अंततः टीम को सफलतापूर्वक बंदर पकड़ने में सफलता मिली। जैसे ही बंदर जाल में फंसा, वहां मौजूद भीड़ ने शोर मचाना शुरू कर दिया। लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। बंदर को पकड़ने के बाद, उसे एक बोरे में डालकर कुश्मी जंगल में छोड़ दिया गया।

Monkey terror: लहसड़ी  गांव में शरारती बंदर की दस्तक खत्म, 15 हजार रुपये में पकड़ा गया

गांव के निवासी नंदलाल यादव ने बताया कि गांव में काफी समय से बंदरों का एक समूह है, लेकिन केवल यही बंदर यहां उत्पात मचा रहा था। अब जब इसे पकड़ लिया गया है, तो हमें गांव में आराम से घूमने की सुविधा मिलेगी। रामवृक्ष ने कहा कि बंदर के आतंक के कारण घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था, खासकर बाइक सवारों के लिए।

कुछ दिन पहले, पड़ोसी गांव बरबासपुर में एक बंदर की मौत हुई थी, जिसमें यह चर्चा थी कि उसे एक बाइक सवार ने टक्कर मार दी थी। इस घटना के बाद से गांव के बंदर दोपहिया वाहनों पर हमले कर रहे थे। बंदर के डर से महिलाएं छत पर जाने से कतराने लगी थीं और बच्चे भी घर के बाहर नहीं निकल रहे थे।

गांव के लोग अब बंदर के पकड़े जाने पर राहत की सांस ले रहे हैं। इस घटना से पहले, गांव वाले काफी चिंतित थे क्योंकि बंदर ने उनके लिए जीना मुश्किल कर दिया था। बंदर के शोर और हमलों के कारण गांव का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था।

गांव की स्थिति अब सामान्य हो चुकी है और लोग फिर से अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त हो गए हैं। बंदर को जंगल में छोड़ने के बाद, गांव वालों ने एकजुटता दिखाई और सभी ने मिलकर इस शरारती बंदर को पकड़ने में मदद की। यह घटना गांव में एकता और सहयोग की मिसाल बनी।

गांव के लोग अब आश्वस्त हैं कि बंदर की समस्या समाप्त हो चुकी है और वे अपने जीवन को सामान्य रूप से जी सकेंगे। इसके साथ ही, गांव के लोगों ने इस अनुभव से सीख ली है कि किसी भी समस्या का सामना एकजुटता और सहयोग से किया जा सकता है।

गांव की स्थिति में सुधार के साथ-साथ, सभी लोग इस बात को लेकर खुश हैं कि उन्होंने अपने गांव की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर कदम उठाया। अब लहसड़ी  गांव फिर से सुरक्षित और शांतिपूर्ण स्थान बन गया है।

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