Kushinagar News: कुशीनगर के मैनहा गांव में लक्ष्मी मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई पत्थरबाजी की घटना ने स्थानीय लोगों में भारी उथल-पुथल मचा दी। घटना सोमवार रात की है, जब लक्ष्मी मूर्ति के विसर्जन के दौरान कुछ लोगों ने कथित रूप से मूर्ति पर पत्थर फेंके, जिससे न केवल मूर्ति को नुकसान पहुंचा, बल्कि गांव में सामुदायिक तनाव भी उत्पन्न हुआ।
घटना का विवरण
मूर्ति विसर्जन के लिए निकली लक्ष्मी मूर्ति, जो कि मैनहा गांव के निवासी जोखू यादव के घर से लाई गई थी, जैसे ही गांव के पूर्व स्थित एक मस्जिद के पास पहुंची, वहां उपस्थित कुछ लोगों ने मूर्ति पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इस पत्थरबाजी के कारण मूर्ति को क्षति पहुंची और इसे लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया। मूर्ति के साथ चल रहे लोगों ने आरोप लगाया कि पत्थर फेंकने वाले विशेष समुदाय के लोग थे, जिसके कारण उन्होंने मूर्ति को रोक दिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुलिस की भूमिका
घटना की सूचना मिलते ही डुमरियागंज थाने के निरीक्षक और क्षेत्र के उपजिला मजिस्ट्रेट (SDM) मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय लोगों से बातचीत की। प्रारंभ में, लोगों ने मूर्ति के विसर्जन के लिए आगे बढ़ने से इनकार कर दिया और पत्थरबाजी करने वालों की गिरफ्तारी की मांग की।
लगभग एक घंटे तक इस स्थिति के कारण इटावा से बस्ती जाने वाली सड़क बंद रही। इसके बाद, एसडीएम डॉ. संजीव दीक्षित और डुमरियागंज निरीक्षक रमेश यादव की मध्यस्थता के बाद और पत्थरबाजों की गिरफ्तारी का आश्वासन मिलने पर लोगों ने मूर्ति को सड़क से हटा दिया और जाम को खत्म किया।
सामुदायिक सौहार्द
यह घटना न केवल मूर्ति विसर्जन के दौरान की है, बल्कि यह स्थानीय समुदाय के बीच सामुदायिक सौहार्द को भी प्रभावित करने वाली है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि ऐसे तनावपूर्ण परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए सभी समुदायों के बीच संवाद और समझौते की आवश्यकता है।
पंडित राकेश शास्त्री ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं एकता और भाईचारे को कमजोर करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक उत्सवों के दौरान सभी को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं फिर से न हों।
प्रशासनिक कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस ने पत्थरबाजों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी विवाद को निपटाने के लिए अधिकारियों से संपर्क करें।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समुदायों के बीच संवाद और समझ बहुत महत्वपूर्ण हैं। सभी धर्मों और समुदायों को एक साथ आकर अपने उत्सवों का आनंद लेना चाहिए और एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। प्रशासन को भी इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सक्रिय रहना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के तनाव उत्पन्न न हों।
इस तरह की घटनाओं से केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को नुकसान होता है। हमें मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जहां सभी समुदाय मिलकर शांति और भाईचारे के साथ रह सकें। यह घटना इस बात का सबूत है कि हमें आपसी समझदारी और सम्मान के साथ अपने धार्मिक त्योहारों का आनंद लेना चाहिए।