Kushinagar News: जलभराव से राहत नहीं, गन्ने की फसल सूख रही है

Kushinagar News: जलभराव से राहत नहीं, गन्ने की फसल सूख रही है

Kushinagar News: कुशीनगर जिले के नेबुआ नौरंंगिया क्षेत्र के चानवार में जलभराव  और जल निकासी की कमी के कारण लगभग 1500 हेक्टेयर में लगे गन्ने की फसल सूखने लगी है। किसान परेशान हैं और उनकी मेहनत के साथ-साथ पूंजी भी बर्बाद हो रही है। प्रभावित किसानों ने फसल के नुकसान की भरपाई के लिए सर्वेक्षण कराने की मांग की है।

जलभराव  का संकट

सौराहा चानवार के किसानों ने सौराहा खुर्द, पाकडियार, डुबरहा, खैरातिया में करीब 380 हेक्टेयर में गन्ने की फसल लगाई थी, जबकि काउसर चानवार में खजुरी, पिपरपाती, नंदन छापरा, मथिया आलम, और बगला के किसानों ने भी 290 हेक्टेयर में गन्ना बोया है।

गांधीया चानवार के समीप, झजवा, महेशरा, खजुरी और रंगपुर के किसानों ने 330 हेक्टेयर में गन्ना बोया है। वहीं, सिधरिया झील में कोटवा, ढोलहा, बंधु छापरा, कोहार गड्डी, हरपुर, बनवारी छापरा, परशुरामपुर और विष्णुपुरा के किसानों ने 320 हेक्टेयर में गन्ना उगाया है।

खैरातिया और हरपुर चानवार में 280 हेक्टेयर में गन्ना लगाया गया था। किसानों का कहना है कि पिछले वर्षों में उन्होंने बड़े पैमाने पर गन्ने की फसल की कटाई की है। इस वर्ष भी गन्ने की फसल अच्छी थी, लेकिन बारिश और उचित जल निकासी प्रणाली की कमी के कारण सभी चार झीलों में लगाए गए गन्ने की फसल 90 प्रतिशत सूख चुकी है।

Kushinagar News: जलभराव से राहत नहीं, गन्ने की फसल सूख रही है

किसानों की परेशानियाँ

किसान नन्हे खान, मुखलाल कुशवाहा, राम बहल पटेल और अन्य ने बताया कि धान की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है। उन्होंने गन्ने की फसल पर अपनी आशाएं लगाई थीं। अब जब गन्ना भी सूखने लगा है, तो उनकी स्थिति बहुत खराब हो गई है।

किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने प्रभावित किसानों के खेतों का सर्वेक्षण किया होता और फसल के नुकसान के साथ-साथ लागत मूल्य की भरपाई की होती, तो अगली फसल बोने में उन्हें आसानी होती।

सरकारी मदद की आवश्यकता

किसानों ने मांग की है कि सरकार जल निकासी की उचित व्यवस्था करे, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके। इसके साथ ही, उन्हें क्षति की भरपाई के लिए सहायता राशि प्रदान की जाए, ताकि वे फिर से अपनी कृषि गतिविधियों को शुरू कर सकें।

स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया

स्थानीय नेताओं ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। कुछ नेताओं ने यह भी सुझाव दिया है कि क्षेत्र में जल निकासी प्रणाली को विकसित करने की दिशा में योजनाएँ बनानी चाहिए।

किसान संगठनों की भूमिका

किसान संगठनों ने भी इस स्थिति का संज्ञान लिया है और सरकार से मांग की है कि वह किसानों के हित में ठोस कदम उठाए। संगठनों ने बताया कि वे प्रभावित किसानों के साथ खड़े हैं और उनकी मांगों के लिए संघर्ष करेंगे।

भविष्य की चुनौतियाँ

इस संकट के चलते किसान अब अपनी अगली फसल को लेकर चिंतित हैं। यदि जल निकासी प्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में उनकी फसलें और भी प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा, आर्थिक संकट के चलते किसानों को आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है, जो उनकी स्थिति को और भी कठिन बना रहा है।

कुशीनगर जिले में जलभराव  और गन्ने की फसल का सूखना एक गंभीर स्थिति है, जिसने किसानों की मेहनत और आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर ध्यान दें और तुरंत आवश्यक कदम उठाएं ताकि किसानों को राहत मिल सके और उनकी कृषि गतिविधियों को पुनर्जीवित किया जा सके। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह न केवल किसानों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी समस्या बन सकती है।

किसान अपनी मेहनत और संसाधनों के बल पर अपनी फसल उगाते हैं, लेकिन जब प्राकृतिक आपदाएँ आती हैं और सरकारी सहायता का अभाव होता है, तो उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाती है। ऐसे में, समय पर सहायता और उचित योजनाएं बनाना अत्यंत आवश्यक है ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके और उन्हें अपने अधिकार मिल सकें।

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