Kushinagar: कुशीनगर में स्थित मेडिकल कॉलेज की रक्त सेपरेशन यूनिट की मशीनें पिछले एक साल से खराब पड़ी हैं। इन मशीनों की लागत लाखों रुपये थी और इन्हें एक साल पहले स्थापित किया गया था। हालाँकि, रक्त सेपरेशन यूनिट की प्रक्रिया को लाइसेंस की अनुपलब्धता के कारण प्रारंभ नहीं किया जा सका। एक हफ्ते पहले इस यूनिट को लाइसेंस मिल गया और सोमवार को इसका उद्घाटन भी किया गया। लेकिन उद्घाटन के बावजूद, मशीनें अभी भी चालू नहीं हो रही हैं।
रक्त सेपरेशन यूनिट का महत्व
रक्त सेपरेशन यूनिट का उद्देश्य रक्त के चार मुख्य घटकों को अलग करना है: लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट। इस यूनिट में एक यूनिट रक्त को चार विभिन्न भागों में विभाजित किया जाता है। इससे केवल आवश्यक घटकों को जरूरतमंद मरीजों को ट्रांसफ्यूज़ किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से अस्पताल में रक्त की कमी नहीं होती और मरीजों के रिश्तेदारों को रक्त के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ती।
प्रक्रिया में बाधा
रक्त सेपरेशन यूनिट के उद्घाटन के बाद भी मशीनें काम नहीं कर रही हैं, जिससे आवश्यकतानुसार रक्त की अनुपलब्धता हो रही है। कई मरीजों को हर दिन रक्त की जरूरत होती है, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण उन्हें बिना उपचार के लौटना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के तकनीशियन दो दिनों से कंपनी के इंजीनियर से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो कॉलेज प्रशासन ने कंपनी को ईमेल करके इंजीनियर को बुलाने का अनुरोध किया है।
लाइसेंस प्राप्त करने में देरी
2022 में स्थापित की गई इन मशीनों की उम्मीद थी कि इन्हें जल्द ही लाइसेंस मिल जाएगा। लेकिन लाइसेंस मिलने में हुई देरी के कारण मशीनें बेकार पड़ी रहीं। अंततः पिछले हफ्ते लाइसेंस मिलने के बाद यूनिट का उद्घाटन हुआ, लेकिन मशीनों की तकनीकी समस्याओं के कारण यह सही तरीके से काम नहीं कर पा रही है। वर्तमान में, फ्रीज़र्स काम कर रहे हैं, लेकिन अन्य मशीनों के बंद रहने से मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
तकनीकी समाधान की दिशा में प्रयास
मेडिकल कॉलेज के तकनीशियन इंजीनियर से संपर्क करने के प्रयास कर रहे हैं ताकि समस्याओं का समाधान किया जा सके। इंजीनियर के आने के बाद ही मशीनें चालू होने की उम्मीद है। तकनीकी समाधान जल्दी से जल्दी निकालने की कोशिश की जा रही है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। प्रबंधन का मानना है कि समस्या का समाधान होते ही रक्त सेपरेशन यूनिट प्रभावी तरीके से काम कर सकेगा।
समुदाय की चिंता
स्थानीय समुदाय इस स्थिति को लेकर चिंतित है। मरीजों के रिश्तेदारों का कहना है कि उन्हें रक्त की आवश्यकता है, लेकिन यूनिट का सही तरीके से काम नहीं करने के कारण उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस यूनिट का शीघ्र प्रारंभ होना आवश्यक है ताकि उनकी जरूरतों को पूरा किया जा सके।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि तकनीकी समस्याओं का समाधान जल्द ही किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने भरोसा दिलाया है कि इस यूनिट की उचित देखभाल और रखरखाव किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं न आएं। यूनिट के संचालन से अस्पताल में रक्त की उपलब्धता में सुधार होगा और मरीजों की सेवा में वृद्धि होगी।
रक्त की महत्ता और सुरक्षा
रक्त का सही प्रबंधन स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रक्त की सही मात्रा और गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। रक्त सेपरेशन यूनिट का सही तरीके से काम करना न केवल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए बल्कि समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी आवश्यक है। इसे ध्यान में रखते हुए, यूनिट की मशीनों को शीघ्र चालू किया जाना चाहिए ताकि मरीजों को निर्बाध सेवाएं मिल सकें।
अंत में: एक नई उम्मीद
कुशीनगर मेडिकल कॉलेज की रक्त सेपरेशन यूनिट का उद्घाटन एक सकारात्मक कदम था, लेकिन मशीनों के खराब होने से यह उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। प्रशासन और तकनीशियन सभी प्रयास कर रहे हैं कि इंजीनियर जल्द ही आएं और मशीनों को चालू करें। इस प्रक्रिया के सफल होने से न केवल मरीजों को तत्काल उपचार मिलेगा, बल्कि अस्पताल में रक्त की कमी को भी दूर किया जा सकेगा।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन और तकनीशियन दोनों इस समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मशीनें चालू हो जाएंगी और कुशीनगर में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। मरीजों और उनके रिश्तेदारों की चिंता को दूर करने के लिए यह आवश्यक है कि इस यूनिट का संचालन जल्द से जल्द शुरू किया जाए।