Jhansi Accident: झांसी में शुक्रवार को हुई एक भीषण आग की घटना ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया। शुक्रवार रात लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के चिल्ड्रन वार्ड में लगी आग में 10 मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि कई बच्चे अब भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। गंभीर रूप से जल चुके बच्चों का इलाज अस्पताल में जारी है। इस आग में जान गंवाने वाले 10 बच्चों में से तीन बच्चों की पहचान नहीं हो पा रही है, क्योंकि वे इस कदर जल चुके थे कि उनके माता-पिता भी उन्हें पहचानने में असमर्थ हैं। अब बच्चों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की मांग उठने लगी है।
आग में मारे गए बच्चों की पहचान के लिए बढ़ रही है मांग
झांसी मेडिकल कॉलेज में हुए इस हादसे ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचाया है। तीन बच्चों के शव इतने बुरी तरह से जल चुके हैं कि उनके माता-पिता भी उन्हें पहचान नहीं पा रहे हैं। इसके चलते परिवार वालों ने मांग की है कि इन बच्चों की पहचान के लिए DNA टेस्ट कराया जाए। यह मांग तेज हो रही है ताकि मृतक बच्चों के परिवारों को सही-सही जानकारी मिल सके और वे अपने बच्चों को अंतिम विदाई दे सकें।
परिवार वालों का गुस्सा और प्रदर्शन
घटना को लेकर लोगों में गुस्सा व्याप्त है। मृतक बच्चों के परिवार के सदस्य और अन्य लोग मेडिकल कॉलेज के गेट के सामने धरने पर बैठ गए हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने इस हादसे के बारे में उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं दी है और अस्पताल में हुई लापरवाही के कारण इस तरह का भयावह हादसा हुआ है। परिवार के लोग सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए 24 घंटे में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने इस दुखद घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार की घटना को दोहराया नहीं जाने दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने झांसी में सुबह से ही डेरा डाल लिया और अस्पताल प्रशासन व स्थानीय अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मृतक बच्चों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है।
आग में 37 बच्चे घायल, 50 से अधिक थे भर्ती
झांसी मेडिकल कॉलेज में इस घटना के वक्त अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में 50 से अधिक बच्चे भर्ती थे। आग की घटना में 37 बच्चे जल गए और उनकी हालत गंभीर है। राहत और बचाव कार्यों में लगे अधिकारियों ने सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, अस्पताल में भर्ती बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, और परिवार वालों ने अस्पताल की सुरक्षा में खामियां उजागर की हैं।
उम्मीद और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
इस घटना ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। अब यह जरूरी हो गया है कि चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा के मानकों को और कड़ा किया जाए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। इस दुर्घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और लापरवाही से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। लोग अब प्रशासन से यह भी मांग कर रहे हैं कि ऐसी घटनाओं के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।