भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar इस समय वाशिंगटन में हैं, जहां वे वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन और आगामी ट्रंप प्रशासन के साथ भारत-अमेरिका रिश्तों को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय बातचीत कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) जैक सुुलिवन से मुलाकात की।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा
Jaishankar और सुुलिवन के बीच यह मुलाकात भारत-अमेरिका के रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर एक विस्तृत चर्चा का हिस्सा थी। दोनों नेताओं ने इस साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया और इसके भविष्य को लेकर अपने दृष्टिकोण साझा किए। इस बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग और भागीदारी के क्षेत्र में आगामी कदमों पर भी चर्चा की गई।
भारत के विदेश मंत्री का अमेरिका दौरा
जयशंकर इस समय अमेरिका में आधिकारिक दौरे पर हैं, जो 24 दिसंबर से 29 दिसंबर तक चलने वाला है। इस दौरे के दौरान उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की है और भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की है। जयशंकर का यह दौरा खास है क्योंकि इसके दौरान वह अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और जो बाइडन प्रशासन के अन्य उच्च अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे।
ट्रंप प्रशासन से भी होने वाली मुलाकातें
Jaishankar ने अपनी यात्रा के दौरान यह भी बताया कि वह ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। यह मुलाकातें भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण हो सकती हैं, क्योंकि अगले अमेरिकी चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप के पुनः सत्ता में आने की संभावना को लेकर विभिन्न अनुमान लगाए जा रहे हैं।
जयशंकर ने अपने दौरे के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा, “भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर व्यापक चर्चा की गई। साथ ही वर्तमान क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।”
भारत के कांसुल जनरल सम्मेलन का आयोजन
जयशंकर अपने दौरे के दौरान भारत के कांसुल जनरल्स के एक सम्मेलन का आयोजन भी करेंगे। यह सम्मेलन भारतीय कांसुल जनरल्स को एक मंच पर लाकर भारत के विदेश नीति और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करेगा। यह सम्मेलन भारतीय विदेश नीति को मजबूती देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भारत के कूटनीतिक प्रयासों को और सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते रिश्ते
भारत और अमेरिका के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में बहुत मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और कूटनीतिक मामलों में सहयोग बढ़ा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ताएं और समन्वय बढ़े हैं, जिससे भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नई गहराई आई है।
अमेरिका के साथ भारत का सैन्य और व्यापारिक सहयोग भी महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है। रक्षा क्षेत्र में, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जो दोनों देशों के सुरक्षा हितों को मजबूती प्रदान करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श
जयशंकर ने कहा कि उनकी चर्चा में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार किया गया। इन मुद्दों में वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, और विभिन्न क्षेत्रीय विवाद जैसे कश्मीर, दक्षिण चीन सागर और अफगानिस्तान शामिल हैं। इन सभी मुद्दों पर भारत और अमेरिका के दृष्टिकोण का मेलजोल हुआ है, और दोनों देशों ने एक साथ काम करने के महत्व को महसूस किया है।
कूटनीतिक संबंधों में नई दिशा
जयशंकर की इस यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपने कूटनीतिक संबंधों को और भी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अमेरिका के साथ भारत का सहयोग केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध एशिया और दुनिया में शांति और सुरक्षा को बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
आगामी अमेरिकी प्रशासन के साथ संबंधों की दिशा
जयशंकर के इस दौरे का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य अमेरिका के आगामी ट्रंप प्रशासन के साथ रिश्तों को और मजबूत करना है। डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अपने पहले कार्यकाल के दौरान भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखा था। ऐसे में, जयशंकर का यह दौरा अमेरिका में होने वाले राजनीतिक बदलावों के संदर्भ में भारत के लिए अपनी कूटनीति को मजबूत करने का एक अवसर प्रदान करता है।
भारत और अमेरिका के रिश्तों को नए आयाम पर ले जाने के लिए एस. जयशंकर का यह दौरा महत्वपूर्ण है। इस दौरे के दौरान उन्होंने न केवल बाइडन प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात की, बल्कि आगामी ट्रंप प्रशासन के साथ भी मजबूत रिश्ते बनाने के लिए कदम उठाए हैं। भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में यह यात्रा महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है।
भारत का यह कदम कूटनीतिक और वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को और सशक्त बनाने में सहायक होगा, और आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों में और प्रगति हो सकती है।