Gorakhpur जिले के बड़हलगंज के महुआ पार गांव में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। 95 वर्षीय एकादसी देवी, जिन्होंने अपने जीवन के 50 से अधिक वर्ष अपने भाई के परिवार की देखभाल में बिताए, आज महिला का खाना-पानी किया बंद कर दिया हैं और घर से निकल जाने का फरमान सुना दिया गया हैं, इस घटना ने पूरे गांव में आक्रोश पैदा कर दिया है और परिवारिक संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एकादसी देवी को दोनों कान से सुनाई नहीं देता हैं, एकादसी देवी की केवल 4 बेटियां ही है जो अपने अपने शादी हो कर घर है, उनका कोई लड़का नहीं है.
भइया और भाभी ने दिया था वचन ,लेकिन मिला धोखा
एकादसी देवी अपने भाई के घर पिछले 50 साल से रह रही थीं। उनके भाई और भाभी ने मरने के पहले एकादसी देवी से वचन लिया था की ये इनके घर भाल करेंगी, भाई और भाभी के गुजर जाने के बाद, उन्होंने पांचों बच्चों की देखभाल की और उन्हें पाला पोसा और बड़ा किया। एकादसी देवी ने भी अपने भाई को कहा था कि वह उनके घर की देखभाल करेंगी और परिवार को संभालेंगी। परिवार में सभी बच्चों में सबसे प्रिय मुराली था, जिसे एकादसी देवी अपने बेटे के समान मानती थीं क्यों की एकादसी देवी जी का कोई खुद का बेटा नहीं है।
शादी के बाद बदला मुराली का व्यवहार
समय के साथ, एकादसी देवी ने मुराली की शादी गोरखपुर के क़स्बा संग्रामपुर उनवल वार्ड नंबर एक में गोपाल की लड़की से करवा दी थी । हालांकि, शादी के तीन साल बाद ही मुराली और उसकी पत्नी का व्यवहार एकादसी देवी के प्रति बदल गया। बिधवा बुजुर्ग महिला के साथ बुरा व्यवहार किया जाने लगा, उन्हें समय पर खाना नहीं दिया जाता था, और बीमार होने पर इलाज नहीं कराया जाता था। इसके अलावा, उन्हें मुराली की पत्नी ने घर के सीधी से धक्का दे कर गिरा दिया था जिसके कारन एकादसी देवी जी का हाथ फैक्टच हो गया था, और घर से निकालने की धमकियां दी जाती थीं और गंदी-गंदी गालियां दी जाती थीं। आस पड़ोस के लोग जो कोई बिधवा बुजुर्ग महिला का मदत करने आता था तो मुराली और उसकी पत्नी उनको गाली देकर धमकी दे कर भगा देते थे
महिला का खाना-पानी किया बंद, गांव वालों में फैला आक्रोश
एकादसी देवी अपने भाई को दिए गए वचन के कारण घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं । लेकिन आखिरकार, मुराली ने अपनी मां समान बुआ को घर से बाहर निकाने का फैसला लिया है । उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर रहें हैं । इस अमानवीय घटना से गांव वालों में गहरा आक्रोश फैल गया है।
आस-पड़ोस के लोगों ने जताई नाराजगी
महुआ पार गांव के लोग इस घटना से बेहद नाराज हैं। गांव के लोगों का कहना है कि एकादसी देवी ने अपनी पूरी जिंदगी इस परिवार की सेवा में लगा दी, लेकिन बदले में उन्हें ये दिन देखना पड़ रहा है । आस-पड़ोस के लोग मुराली और उसकी पत्नी के इस व्यवहार की कड़ी निंदा कर रहे हैं और इसे अमानवीय बताते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन से न्याय की उम्मीद
गांव के लोगों ने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने और बिधवा बुजुर्ग महिला को न्याय दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि इतने वर्षों की सेवा के बाद एक बिधवा बुजुर्ग महिला को इस तरह खाना-पानी बंद कर के सड़क पर छोड़ देना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानूनी रूप से भी गलत है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या एकादसी देवी को उनके अधिकार मिल पाते हैं।
इस घटना ने यह संदेश दिया है कि हमे और समाज को पारिवारिक रिश्तों और बुजुर्गों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने की जरूरत है।