Gorakhpur के सदर तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस पर एक अनोखा मामला सामने आया, जब एक वृद्ध महिला ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुंचीं। महिला को उनका पोता अपनी गोद में उठाकर लाया, जबकि एक अन्य व्यक्ति ऑक्सीजन सिलेंडर संभाले हुए था। यह वृद्ध महिला ऑक्सीजन पर निर्भर हैं। उनकी इस स्थिति को देखते हुए एसडीएम सदर मृणाल अविनाश जोशी ने तुरंत उनकी शिकायत सुनी और बिजली निगम के अधिकारी को मामले का समाधान करने का निर्देश दिया।
पेंशन की लड़ाई: चार साल बाद भी समाधान नहीं
यह मामला बिजली निगम की संवेदनहीनता और लापरवाही को दर्शाता है। सिंहोरिया गांव की निवासी और विद्युत निगम की पूर्व कर्मचारी सुमिरिती देवी की पेंशन, सेवानिवृत्ति के साढ़े चार साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। यह उनका हक है, लेकिन सरकारी विभाग की प्रक्रियाओं ने उन्हें दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया है।
सुमिरिती देवी ने 30 अप्रैल 2020 को विद्युत वितरण खंड, मोहाल्दिपुर से सेवानिवृत्ति ली थी। परंतु, जब वह अपनी पेंशन के लिए आवेदन लेकर विभाग के कार्यालय गईं, तो उन्हें विभिन्न प्रकार की कमियों का हवाला देकर वापस भेज दिया गया। यह सिलसिला तीन साल तक चलता रहा। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उनका पोता अनिल यादव उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने लगा।
मुख्य अभियंता से लेकर एमडी कार्यालय तक का चक्कर
अनिल यादव ने बताया कि जब भी वह किसी अधिकारी के पास जाते, उन्हें नई कमी बताई जाती। मुख्य अभियंता के पास जाने पर उन्हें अधीनस्थ अधिकारी के पास भेजा गया, लेकिन वहां भी वही पुरानी बहानेबाजी की गई। उन्होंने बताया कि वह अपनी दादी के काम के लिए वाराणसी के एमडी कार्यालय तक गए, लेकिन वहां भी कोई समाधान नहीं हुआ।
रिश्वत की मांग: 50 हजार से 80 हजार तक का सौदा
अनिल ने आरोप लगाया कि पेंशन प्रक्रिया में कमी बताकर रिश्वत की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने शुरुआत से ही पैसे की मांग शुरू कर दी थी। कभी 50 हजार तो कभी 80 हजार रुपये देने की बात कही गई। कर्मचारियों का कहना था कि अगर पैसे दिए जाएं तो सभी कमियों को नजरअंदाज कर दिया जाएगा।
एक बार आधार कार्ड में नाम सुधारने को कहा गया था, जिसे ठीक कर दिया गया, लेकिन समस्या अब भी बनी हुई है।
सम्पूर्ण समाधान दिवस: उम्मीद की एक किरण
अनिल ने बताया कि थक-हारकर वह सम्पूर्ण समाधान दिवस पर अपनी दादी को लेकर पहुंचे। उनकी दादी की तबीयत उस दिन थोड़ी ठीक थी, लेकिन फेफड़ों की समस्या और ऑक्सीजन पर निर्भरता के कारण उन्हें सिलेंडर के साथ लाना पड़ा।
अनिल ने अपनी दादी को गोद में उठाकर एसडीएम मृणाल अविनाश जोशी के सामने पेश किया। एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिजली निगम के अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अगर समाधान नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री जनता दर्शन की ओर रुख करेंगे
अनिल ने कहा कि अगर यहां भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वह पहले जिला अधिकारी के पास जाएंगे। अगर वहां भी न्याय नहीं मिला, तो मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में अपनी बात रखेंगे।
उन्होंने कहा कि उनकी दादी का इलाज महंगा है, और उनके परिवार के पास रिश्वत देने के लिए पैसे नहीं हैं। उनके पिता किसान हैं और परिवार की आय सीमित है। पेंशन उनकी दादी का अधिकार है, लेकिन उन्हें इसके लिए भी दौड़ाया जा रहा है।
बिजली निगम की संवेदनहीनता पर सवाल
यह मामला सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता को उजागर करता है। एक वृद्ध महिला, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है, को अपने हक के लिए इस हद तक संघर्ष करना पड़ रहा है।
सरकार और प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इस तरह की घटनाएं न केवल आम जनता के विश्वास को चोट पहुंचाती हैं, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं।
सम्पूर्ण समाधान दिवस जैसे कार्यक्रम आम जनता की समस्याओं को हल करने के लिए होते हैं, लेकिन जब तक प्रशासन और विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं लेंगे, तब तक ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य अधूरा रहेगा।
सुमिरिती देवी का मामला इस बात का प्रमाण है कि पेंशन जैसे बुनियादी अधिकार के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर नागरिक को उनके अधिकार बिना किसी बाधा के मिलें। यह घटना समाज और प्रशासन के लिए आत्मचिंतन का समय है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां न बनें।