Gorakhpur news: गोरखपुर चिड़ियाघर में बाघ की दहाड़ से कांपने वाला शेर, एक अद्भुत घटना

Gorakhpur news: गोरखपुर चिड़ियाघर में बाघ की दहाड़ से कांपने वाला शेर, एक अद्भुत घटना

Gorakhpur news: हाल ही में गोरखपुर चिड़ियाघर में एक अजीब घटना घटी, जिसमें एक बाघ की दहाड़ ने एक मनुष्य खाने वाले तेंदुए को इतना भयभीत कर दिया कि वह खाना और पानी पीना भी छोड़ दिया। यह घटना चिड़ियाघर में रहने वाले तेंदुए के व्यवहार में अचानक बदलाव का कारण बनी। अब तेंदुआ शांत होकर अपने बाड़े के एक कोने में छिपा रहता है, जबकि पहले वह चिड़ियाघर के कर्मचारियों से काफ़ी खेले-कूदे और दहाड़ते हुए बाड़े के इर्द-गिर्द घूमता था।

तेंदुए के व्यवहार में आया अचानक बदलाव

गोरखपुर चिड़ियाघर में रह रहे इस तेंदुए का जीवन बहुत ही जिज्ञासु और साहसी था। यह तेंदुआ अपनी बाड़े के चारों ओर कूदता, घूमता और अक्सर चिड़ियाघर के कर्मचारियों से उलझने की कोशिश करता था। लेकिन जब हाल ही में चिड़ियाघर में एक नया बाघ लाया गया, तो तेंदुए का यह साहसिक व्यवहार पूरी तरह बदल गया। यह बाघ, जिसे पिलभीत के बराही रेंज से लाया गया था, अपने विशाल आकार और गहरी दहाड़ के कारण तेंदुए के लिए एक डरावना अनुभव साबित हुआ।

इस बाघ की दहाड़ ने तेंदुए को इतना भयभीत किया कि वह पूरी तरह से शांत हो गया और खाना पीना भी बंद कर दिया। चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने बताया कि तेंदुआ अब बाड़े के एक कोने में दुबक कर बैठा रहता है, और उसकी दहाड़ के बाद से उसकी ग्राउंडिंग (गंभीर दहाड़) पूरी तरह से गायब हो गई। हालांकि कुछ दिनों बाद बाघ शांत हो गया और तेंदुआ फिर से खाना खाने लगा, लेकिन उसकी पुरानी दहाड़ अब तक वापस नहीं आई।

पिलभीत के बराही रेंज के बाघ: एक दहाड़ से शेर को डराना

चिड़ियाघर के निदेशक विकास यादव ने इस घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पिलभीत टाइगर रिजर्व के बराही रेंज के बाघ अपनी निडरता और ताकत के लिए प्रसिद्ध हैं। इन बाघों का आकार 2.5 से 2.8 मीटर तक होता है और इनका वजन 290 से 300 किलोग्राम के बीच होता है। इन बाघों को दुनिया के सबसे भारी बाघों में से एक माना जाता है, और यह सिबीरियाई बाघों के बाद सबसे भारी बाघ माने जाते हैं। पिलभीत के ये बाघ पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र होते हैं और लोग इन बाघों को देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं।

Gorakhpur news: गोरखपुर चिड़ियाघर में बाघ की दहाड़ से कांपने वाला शेर, एक अद्भुत घटना

गोरखपुर चिड़ियाघर में बाघ का प्रभाव और ताकत

गोरखपुर चिड़ियाघर में लाए गए इस बाघ का वजन लगभग 300 किलोग्राम है, जो राज्य के अन्य बाघों की तुलना में 80-90 किलोग्राम अधिक है। यह बाघ इतना शक्तिशाली है कि उसकी दहाड़ के कारण आसपास के बाड़े के जानवरों में डर का माहौल बन गया। तेंदुआ, जो पहले चिड़ियाघर में बहुत साहसी और जुझारू था, अब इस बाघ की शक्ति से इतना भयभीत हो गया है कि वह अपने बाड़े में छिपा रहता है। बाघ की दहाड़ की गूंज इतनी प्रबल होती है कि दूर-दूर तक सुनाई देती है और यह चिड़ियाघर में रहने वाले अन्य जानवरों को भी डर का एहसास कराती है।

यह बाघ अब गोरखपुर चिड़ियाघर का सबसे खास और शक्तिशाली जानवर बन गया है। इसके प्रभाव और ताकत के कारण इसे चिड़ियाघर के अन्य जानवरों द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके विशाल आकार और दहाड़ ने उसे इस चिड़ियाघर का शेर बना दिया है। चिड़ियाघर के कर्मचारी और पर्यटक अब इस बाघ की ताकत और दहाड़ का इंतजार करते हैं, जो जंगल के राजा की तरह गूंजती है।

बाघ की दहाड़ का प्रभाव: जानवरों के बीच का डर

इस बाघ की दहाड़ ने गोरखपुर चिड़ियाघर के अन्य जानवरों को भी एक अलग तरह से प्रभावित किया है। तेंदुआ, जो पहले चिड़ियाघर के कर्मचारियों से उलझता रहता था और आसपास के जानवरों को चुनौती देता था, अब बाघ की दहाड़ के बाद पूरी तरह से डर गया है। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि बाघ की ताकत और दहाड़ कितनी प्रभावशाली हो सकती है, जो अन्य जानवरों को शांत और निडर बना देती है।

इसके अलावा, बाघ के विशाल आकार और उसकी ताकत ने चिड़ियाघर के अन्य जानवरों में भी सम्मान और भय का माहौल बना दिया है। इस बाघ का प्रभाव इतना बड़ा है कि इसके आस-पास रहने वाले जानवर खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। ऐसे में, यह बाघ न केवल गोरखपुर चिड़ियाघर के सबसे ताकतवर जानवर के रूप में स्थापित हो चुका है, बल्कि इसके कारण चिड़ियाघर के अन्य जानवरों के बीच डर और सम्मान भी पैदा हो गया है।

पिलभीत टाइगर रिजर्व और उसके बाघों की अहमियत

पिलभीत टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण वन्यजीव अभ्यारण्य है, जहां बाघों की आबादी प्रचुर मात्रा में है। बराही रेंज के बाघ इस क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली बाघ माने जाते हैं। पिलभीत के ये बाघ अपनी ताकत, निडरता और खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध हैं। इन बाघों का संरक्षण और अध्ययन वन्यजीव प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण है, और इन बाघों को लेकर अक्सर शोध और संरक्षण कार्यक्रम चलते रहते हैं।

गोरखपुर चिड़ियाघर में लाए गए पिलभीत के बराही रेंज के बाघ ने न केवल चिड़ियाघर के जानवरों के बीच डर का माहौल बना दिया, बल्कि उसकी दहाड़ ने तेंदुए के जैसे साहसी जानवर को भी शांत और डरपोक बना दिया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि बाघ की ताकत और प्रभाव दूसरे जानवरों के लिए कितनी भयावह हो सकती है। यह बाघ गोरखपुर चिड़ियाघर का सबसे खास और शक्तिशाली जानवर बन चुका है, और इसका प्रभाव अब चिड़ियाघर के सभी जानवरों पर साफ दिखाई दे रहा है।

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