Gorakhpur news: मदन मोहन मालवीय यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (MMMUT) में एक जूनियर छात्र की पिटाई के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने आठ छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। यह कार्रवाई एक गंभीर घटना के रूप में देखी गई है, जिससे विश्वविद्यालय ने छात्र अनुशासन को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। आरोपित छात्रों में से पांच छात्रों को सेमेस्टर परीक्षा से बाहर कर दिया गया है, जबकि तीन अन्य छात्रों को प्रमुख परीक्षा के दो विषयों में सम्मिलित होने से वंचित कर दिया गया है। यह कार्रवाई प्रॉक्टोरियल बोर्ड द्वारा किए गए जांच के बाद की गई है, जिसमें छात्रों को दोषी पाया गया।
उद्घाटन समारोह के दौरान हुई घटना
यह घटना 23 नवंबर की शाम को विश्वविद्यालय के मल्टीपरपस हॉल में आयोजित एक परिचय समारोह के दौरान हुई। समारोह के दौरान, जूनियर छात्र अतुल सिसोदिया (बी.टेक पहले वर्ष) को कुछ विवाद के कारण सीनियर छात्रों ने मारपीट कर दी। अतुल सहारनपुर का निवासी है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय के उपकुलपति ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड को मामले की जांच करने और दोषी छात्रों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
गड़बड़ी के समय कोई शिक्षक मौजूद नहीं था
घटना के दौरान, विवाद स्थल पर कोई शिक्षक मौजूद नहीं था। इस घटना के बाद वहां तैनात सुरक्षा गार्डों ने हस्तक्षेप किया और बहुत प्रयास के बाद अतुल को बचाया। इस घटना के बारे में शिक्षकों को सूचित किया गया, जिसके बाद घायल छात्र को इलाज के लिए AIIMS भेजा गया।
संदिग्ध छात्रों की पहचान फोटो और वीडियो से की गई
इस घटना के बाद, प्रॉक्टोरियल बोर्ड की जांच टीम ने फोटो और वीडियो फुटेज के माध्यम से दोषी छात्रों की पहचान की। इस मामले में करीब 35 छात्रों से पूछताछ की गई। जांच टीम ने छात्रों से प्राप्त जानकारी और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान की और उन्हें दोषी ठहराया।
लड़ाई के कारण हुआ नुकसान
परिचय समारोह के दौरान वरिष्ठ छात्रों द्वारा की गई इस अव्यवस्था का उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। इन छात्रों ने अपनी अनुशासनहीनता के कारण न केवल अपनी परीक्षा में हिस्सेदारी खो दी, बल्कि उन्हें सख्त चेतावनी भी दी गई। पांच छात्रों को सेमेस्टर परीक्षा से बाहर कर दिया गया है, जबकि तीन छात्रों को प्रमुख परीक्षा के दो विषयों में बैठने से वंचित कर दिया गया है।
किस छात्र पर क्या कार्रवाई की गई
बी.टेक दूसरे वर्ष के आईटी इंजीनियरिंग विभाग के छात्र, प्रखर राय को सत्र 2024-25 के दोनों सेमेस्टर से बाहर कर दिया गया है। उन्हें भविष्य में ऐसी घटना करने पर गंभीर परिणामों की चेतावनी भी दी गई है। इसी तरह, सत्र 2024-25 के दूसरे वर्ष के कंप्यूटर विज्ञान के छात्र, सार्थक गुप्ता को विषम सेमेस्टर से बाहर कर दिया गया है और भविष्य में किसी ऐसी गलती के लिए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
रेया मारूफ, बी.टेक दूसरे वर्ष के आईटी इंजीनियरिंग विभाग के छात्र को भी विषम सेमेस्टर से बाहर कर दिया गया है, साथ ही उन्हें हॉस्टल से भी निष्कासित कर दिया गया है। बी.टेक दूसरे वर्ष के विद्युत विभाग के छात्रों, हर्षित शुक्ला, प्रियंशु माथुर, सत्यम सिंह, संस्कार सिंह और हर्षित नायक को प्रमुख परीक्षा के पहले दो विषयों में बैठने से वंचित कर दिया गया है।
परिजनों को दी गई सूचना
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आरोपित छात्रों के परिजनों को उनके बच्चों द्वारा की गई कार्रवाई और सजा के बारे में पत्र भेजकर सूचित किया है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि छात्रों और उनके परिवारों को इस घटना के बारे में पूरी जानकारी मिले।
विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया
मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय के उपकुलपति, प्रोफेसर जे.पी. सैनी ने कहा कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड द्वारा की गई जांच के आधार पर आठ छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है और उन्हें भविष्य में अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं करेगा और इस तरह की घटनाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
अवांछित घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता
यह घटना एक गंभीर संकेत है कि विश्वविद्यालयों में छात्र जीवन में अनुशासन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। इस प्रकार की अव्यवस्थाएं न केवल छात्रों के लिए नुकसानदेह होती हैं, बल्कि इससे शैक्षिक संस्थानों की छवि भी प्रभावित होती है। विश्वविद्यालयों को इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे विवादों और झगड़ों से बचा जा सके।
समाज में जागरूकता और अनुशासन की जरूरत
जहां एक ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में त्वरित और सख्त कदम उठाए हैं, वहीं यह भी आवश्यक है कि छात्रों में अनुशासन और समझदारी की भावना को बढ़ावा दिया जाए। छात्र-छात्राओं को यह समझना होगा कि उनकी एक गलती केवल उनके भविष्य को प्रभावित नहीं करती, बल्कि पूरे संस्थान की प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगा देती है।
इस घटना ने यह साबित किया है कि अनुशासनहीनता के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह कदम यह दिखाता है कि वह छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किसी भी प्रकार की हिंसा या असहमति को सहन नहीं करेगा। उम्मीद है कि इस घटना से छात्र समुदाय में एक सख्त संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी