Gorakhpur news: गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र के देवी लाल, जो एक ऑटो चालक हैं, को 13 दिसंबर को एक भयानक घटना का सामना करना पड़ा। उन्हें न केवल अपहरण किया गया, बल्कि उनकी जमकर पिटाई भी की गई और लूटपाट की गई। हालाँकि, इस घटना के बाद जब देवी लाल ने चौरिचौरा पुलिस से मदद की गुहार लगाई, तो आरोप है कि पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें FIR बदलने के लिए दबाव डाला। चार दिन बाद मामला दर्ज हुआ, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मामले की जांच चौरिचौरा के CO द्वारा की जा रही है।
देवी लाल की आपबीती
दरअसल, देवी लाल अपनी मां के साथ तर्कुल्हा देवी मंदिर जाने के लिए ऑटो चला रहे थे, तभी एक पिकअप वाहन ने पीछे से उनकी ऑटो को टक्कर मार दी। देवी लाल ने पिकअप ड्राइवर को सावधानी से गाड़ी चलाने की सलाह दी, लेकिन गुस्से में आए पिकअप चालक के साथ 15-20 लोग भी थे, जिन्होंने देवी लाल को बुरी तरह से पीटना शुरू कर दिया। इस बेरहमी से पिटाई के बाद, आरोपियों ने देवी लाल का अपहरण कर लिया और उन्हें बिहार के गोपालगंज जिले के मुशारा चितौनी गांव में ले गए, जहाँ उनकी और पिटाई की गई।
देवी लाल की मां ने जब शोर मचाया, तो कुछ राहगीरों ने पिकअप वाहन का नंबर नोट कर लिया और पुलिस को सूचित किया। इससे पहले कि वह अधिक चोट खाते, आरोपी देवी लाल को लूटकर छोड़ गए और फिर उसे गोरखपुर आने वाली एक बस में डाल दिया।
पुलिस की लापरवाही
जब देवी लाल पुलिस के पास मदद के लिए पहुंचे, तो उनका आरोप है कि चौरिचौरा पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और उनकी रिपोर्ट को दबाने का प्रयास किया। पुलिस ने देवी लाल पर FIR को बदलने के लिए दबाव डाला। इसके बावजूद, मामला चार दिन बाद दर्ज हुआ, लेकिन अब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। देवी लाल के मुताबिक, पुलिस ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज किया और उनकी मदद करने में कोई तत्परता नहीं दिखाई।
देवी लाल ने बाद में उच्च अधिकारियों से संपर्क किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। एसपी नॉर्थ, जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि आरोपी जल्द ही गिरफ्तार किए जाएंगे और उन्हें जेल भेजा जाएगा। साथ ही, चौरिचौरा के CO द्वारा पुलिस की लापरवाही की जांच की जा रही है।
आरोपी ने देवी लाल से लूटी 46 हजार रुपये और अंगूठी
जैसा कि देवी लाल ने अपनी शिकायत में बताया, अपहरण करने के बाद आरोपियों ने उनसे 46 हजार रुपये और एक अंगूठी लूट ली। देवी लाल का कहना था कि आरोपियों ने उनके साथ न केवल शारीरिक रूप से उत्पीड़न किया, बल्कि उनका आर्थिक नुकसान भी किया। उन्हें जब छोड़ा गया, तो वह बस में गोरखपुर वापस आ रहे थे और उन्हें इस घटना का मानसिक और शारीरिक रूप से गहरा प्रभाव पड़ा।
पुलिस द्वारा एफआईआर में देरी
चार दिन बाद जब मामला दर्ज हुआ, तो पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को समझने की कोशिश की। हालांकि, इस देरी के कारण कई सवाल उठ रहे हैं, जैसे कि पुलिस ने मामले को समय पर क्यों नहीं लिया? क्या उनकी लापरवाही के कारण अपराधियों को बचने का मौका मिला? इन सवालों का जवाब अभी तक नहीं मिला है।
देवी लाल की शिकायत के बाद, पुलिस अधिकारियों ने मामले में आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि क्या आरोपी जल्द पकड़े जाते हैं और इस मामले में न्याय मिलता है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि कभी-कभी पुलिस की लापरवाही के कारण अपराधियों को बचने का मौका मिल जाता है। देवी लाल ने आरोप लगाया कि पुलिस ने न केवल उनकी मदद करने में देर की, बल्कि मामले की जांच में भी ढिलाई दिखाई। इस तरह की घटनाओं से यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस का कर्तव्य केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित है, या फिर उन्हें पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने की जिम्मेदारी भी है?
पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा जा सकता है कि किसी भी मामले में पीड़ित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और पुलिस को हर मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। पुलिस द्वारा समय पर कार्रवाई न होने के कारण अपराधियों को बचने का मौका मिलता है, जिससे न्याय की प्रक्रिया पर प्रश्न चिह्न लग जाता है।
प्रशासन की ओर से कदम
जब देवी लाल ने उच्च अधिकारियों से संपर्क किया, तो एसपी नॉर्थ जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने मामले की गंभीरता को समझा और कहा कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। इसके साथ ही, चौरिचौरा के CO द्वारा पुलिस की लापरवाही की जांच की जा रही है। यह कदम पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न घटित हों और पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाए।
देवी लाल की घटना ने गोरखपुर के पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है। जहां एक तरफ उन्हें मदद की उम्मीद थी, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया और मामले की गंभीरता को हल्के में लिया। हालांकि, उच्च अधिकारियों द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि पुलिस को अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को समझते हुए, समय पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ऐसे अपराधियों को जल्द पकड़कर न्याय मिल सके।
देवी लाल की इस कष्टकारी यात्रा से यह भी सीखा जा सकता है कि पीड़ितों को अपनी आवाज उठानी चाहिए और प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ताकि हर नागरिक को सुरक्षा और न्याय मिल सके।