Gorakhpur News: गोरखपुर जिले के खजनी क्षेत्र के Rampur Pandey गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया। गुरुवार की शाम, एक नशे में धुत युवक ने दरवाजे पर खेल रहे छह साल के बच्चे को कुएं में फेंक दिया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, लेकिन गांव के एक साहसी श्रमिक ने अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चे की जान बचाई। इस घटना ने न केवल गांव में बल्कि आस-पास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बना दिया है।
घटना का विवरण
गुरुवार की शाम को, विनोद चौहान का छह साल का बेटा, अरुण, दरवाजे पर खेल रहा था। इसी दौरान, गांव के निवासी अतुल पांडेय, जो नशे में थे, वहां पहुंचे। उन्होंने बच्चे को पास बुलाया और अचानक उसे 30 फीट गहरे कुएं में फेंक दिया। यह देखकर दरवाजे पर बैठी महिलाएं चिल्लाने लगीं और फिर अतुल वहां से भाग निकला।
साहसी श्रमिक की बहादुरी
अरुण के चिल्लाने की आवाज सुनकर, गांव का श्रमिक प्रमोद, जो काम से लौट रहा था, तुरंत कुएं में कूद गया। प्रमोद ने कड़ी मेहनत के बाद बच्चे को कुएं से बाहर निकाला। गांववालों की मदद से उन्होंने बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलने पर खजनी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने नशे में धुत युवक अतुल पांडेय को हिरासत में लिया और बच्चे के परिवार को जिला अस्पताल ले जाकर उनकी चिकित्सा सहायता की। बच्चे का इलाज हुआ और शुक्रवार की शाम उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
खजनी थाना प्रभारी सदानंद सिन्हा ने प्रमोद को पुलिस कार्यालय बुलाकर उसकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया। SSP डॉ. गौरव ग्रोवर ने उसे प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर उसकी वीरता की सराहना की।
आरोपी के खिलाफ कार्रवाई
पुलिस ने बच्चे के पिता की शिकायत पर अतुल के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया। अदालत में पेश किए जाने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया।
अतुल पांडेय का पूर्व इतिहास
अतुल पांडेय की क्रियाकलापों का इतिहास भी काफी चिंताजनक है। वह पहले भी जेल जा चुका है और उसके खिलाफ चोरी और हत्या के प्रयास के तीन मामले दर्ज हैं। उसके परिवार के सदस्यों ने बताया कि अतुल पहले सड़क परिवहन में ठेके पर कंडक्टर का काम करता था, लेकिन नशे के कारण उसे नौकरी से निकाल दिया गया। उसकी पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे के साथ अपनी मां के घर रह रही है, क्योंकि वह उसके आचरण से परेशान हो चुकी थी।
सामुदायिक साहस
इस घटना ने केवल एक बच्चे की जान नहीं बचाई, बल्कि यह गांव के लोगों के बीच साहस और एकता की भावना को भी प्रकट करती है। प्रमोद की बहादुरी ने न केवल अरुण की जान बचाई, बल्कि उसने गांव के लोगों को भी यह सिखाया कि संकट के समय में किस प्रकार एकजुट होकर काम करना चाहिए।