Gorakhpur news: गोरखपुर विश्वविद्यालय के मैदान में आयोजित भव्य अस्थाई नगर “अहिल्याबाई होलकर नगर” में आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के 70वें राष्ट्रीय अधिवेशन की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में भारत के प्रमुख उद्योगपति और जोहो कॉरपोरेशन के सह-संस्थापक धर वेंबु ने दीप प्रज्वलित कर अधिवेशन की शुरुआत की। यह कार्यक्रम युवाओं, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना, साथ ही यह राष्ट्रीय निर्माण के नए विचारों का मंच भी साबित हुआ।
उद्घाटन सत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की बात
अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में प्रमुख उद्योगपति धर वेंबु ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को आत्मनिर्भर और नवाचार का केंद्र बनाने का समय अब आ गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए शिक्षा, तकनीकी विकास और सामाजिक समर्पण को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने हुनर और विचारों से भारत को वैश्विक मंच पर एक नई ऊंचाई पर ले जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए देश के लिए कार्य करना चाहिए।
ABVP का उद्देश्य और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा
अधिवेशन में परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने ABVP की आगामी योजनाओं और अधिवेशन की थीम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को जागरूक करना और उन्हें राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित करना था। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उसमें युवाओं की भूमिका पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस सत्र में यह चर्चा की जाएगी कि कैसे युवा शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाकर देश को प्रौद्योगिकियों और नवाचार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकते हैं।
युवा शक्ति को निखारने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन
अधिवेशन के दौरान कई कार्यशालाएं और संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जो शिक्षा और नवाचार पर केंद्रित होंगे। इन कार्यशालाओं में प्रमुख वक्ता युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे और उन्हें सकारात्मक दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे। इस दौरान युवा नेताओं को भी मंच मिलेगा, जहां वे अपने अनुभवों को साझा करेंगे और युवा शक्ति को समाज के विकास के लिए प्रेरित करेंगे।
गोरखपुर: युवाओं का प्रेरणा का केंद्र
गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित यह अधिवेशन न केवल ABVP के लिए बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक मंच बन गया है। गोरखपुर अब युवाओं के प्रेरणा का केंद्र बन चुका है, जहां से राष्ट्र निर्माण के लिए विचार उत्पन्न होंगे। इस आयोजन में आए हजारों छात्र प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताया। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि इस अधिवेशन से निकले विचार भारतीय समाज और राष्ट्र के निर्माण में सहायक होंगे।
राष्ट्रगान के साथ समापन
कार्यक्रम के समापन के दौरान राष्ट्रगान का आयोजन किया गया। समापन समारोह में उपस्थित छात्र प्रतिनिधियों और अतिथियों ने इसे एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण अवसर बताया। इसके साथ ही उन्होंने इस अधिवेशन को राष्ट्र निर्माण के लिए एक प्रेरणास्त्रोत के रूप में देखा। इस मौके पर कई नेता और बुद्धिजीवी उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी बातें साझा की और इस आयोजन के महत्व को समझाया।
ABVP का युवा नेतृत्व और भविष्य की दिशा
अधिवेशन में ABVP ने यह संदेश दिया कि भारतीय समाज में युवाओं की भूमिका को सही दिशा में निखारने के लिए शिक्षा, नवाचार और तकनीकी विकास की जरूरत है। ABVP का यह 70वां राष्ट्रीय अधिवेशन एक नया दृष्टिकोण लेकर आया है, जो न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाएगा, बल्कि युवा शक्ति को समाज के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगा। इस अधिवेशन से एक नई ऊर्जा मिलेगी, जो भारतीय समाज को प्रौद्योगिकी, विज्ञान और सामाजिक उत्थान में उन्नति की दिशा में ले जाएगी।
भारत को वैश्विक मंच पर लाने की आवश्यकता
अधिवेशन में उपस्थित कई वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि अब समय आ गया है जब भारत को एक वैश्विक मंच पर लाने के लिए युवाओं को आगे आकर काम करना होगा। इसके लिए शिक्षा, तकनीकी विकास, सामाजिक जागरूकता और नवाचार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह अधिवेशन न केवल एक चर्चा का विषय था, बल्कि एक आंदोलन की तरह था, जिससे युवा शक्ति को एक नया दृष्टिकोण मिला और उन्होंने यह संकल्प लिया कि वे अपनी भूमिका निभाकर भारत को एक आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनाएंगे।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित ABVP का 70वां राष्ट्रीय अधिवेशन युवाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरा। इस अधिवेशन ने युवा नेतृत्व को प्रोत्साहित किया और उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिए नए विचारों और दृष्टिकोणों से परिचित कराया। उद्घाटन सत्र में उद्योगपति धर वेंबु द्वारा किए गए संबोधन ने युवाओं को आत्मनिर्भर और नवाचार के केंद्र के रूप में भारत की भूमिका को समझने के लिए प्रेरित किया। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब युवाओं को सही दिशा मिलती है, तो वे किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं और राष्ट्र के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं।