Gorakhpur क्षेत्र के एक भाजपा विधायक एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार उन्हें मजदूरों से वेतन न देने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला गोरखपुर के साहजनवा क्षेत्र के पाली गांव के कुछ मजदूरों से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल और गोरखनाथ मंदिर स्थित मुख्यमंत्री के कैम्प कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई है। इन मजदूरों का आरोप है कि विधायक ने उनके द्वारा किए गए काम का भुगतान रोक दिया और उनसे धमकी भी दी।
तीन महीने तक काम किया, फिर भी नहीं मिली मजदूरी
पाली गांव के निवासी इंद्रजीत गिरी ने अपनी शिकायत में बताया कि वे और उनके साथी मजदूर 3 अप्रैल से 17 जून तक विधायक के घर में पेंटिंग और पॉलिश का काम कर रहे थे। विधायक ने काम पूरा होने पर उन्हें मजदूरी देने का वादा किया था, लेकिन जब काम पूरा होने के बावजूद मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ, तो उन्होंने विधायक से संपर्क किया। इसके बाद मजदूरों का कहना है कि विधायक ने उन्हें बिना किसी कारण के भुगतान रोक दिया।
इंद्रजीत गिरी ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उनकी खुद की 10,000 रुपये की मजदूरी, दो अन्य मजदूरों की 7,000 रुपये, चार मजदूरों की 5,000 रुपये, दो मजदूरों की 2,500 रुपये और एक मजदूर की 1,500 रुपये की मजदूरी अभी भी बाकी है।
मजदूरी मांगने पर धमकी मिलने का आरोप
मजदूरों का कहना है कि जब उन्होंने विधायक के घर जाकर अपनी मजदूरी की मांग की, तो विधायक के परिवार के सदस्यों ने उन्हें धमकी दी। आरोप है कि परिवार ने उन्हें धोखाधड़ी के मामले में फंसा देने और जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद मजदूरों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई और न्याय की मांग की।
विधायक ने आरोपों को नकारा, कहा काम अधूरा छोड़ा गया
वहीं, भाजपा विधायक ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों ने काम अधूरा छोड़ दिया था, इसलिए मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाएगा। विधायक का कहना है कि वे खुद इंद्रजीत गिरी की तलाश कर रहे हैं और जैसे ही काम पूरा होगा, मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। विधायक ने यह भी दावा किया कि मजदूरों ने जो काम किया था, वह उनके हिसाब से अधूरा था, और इसलिए भुगतान में देरी हुई।
प्रशासन पर दबाव, जांच जारी
मजदूरों की शिकायत के बाद गोरखपुर के जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों पर यह दबाव है कि वे मजदूरों को न्याय दिलाएं, लेकिन साथ ही विधायक के साथ संतुलन बनाने की भी कोशिश की जा रही है। अधिकारियों ने विधायक से आग्रह किया है कि वे मजदूरों को उनकी बाकी की मजदूरी का भुगतान करें ताकि इस विवाद का समाधान हो सके।
गोरखपुर प्रशासन ने इस मामले में एक जांच शुरू कर दी है, और यह देखा जा रहा है कि क्या विधायक के द्वारा उठाए गए कदम और आरोप सही हैं या फिर यह मजदूरों के खिलाफ एक अन्यायपूर्ण कार्रवाई है।
समाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण
यह घटना गोरखपुर के राजनीतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। विधायक का नाम पहले भी विभिन्न विवादों में रहा है, लेकिन इस बार आरोप मजदूरी से संबंधित हैं, जो सीधे तौर पर गरीब और मेहनतकश वर्ग के अधिकारों से जुड़ा हुआ मामला है।
यह मामला इस समय राजनीति और प्रशासनिक स्तर पर गहरे विचार विमर्श का विषय बन गया है। एक ओर जहां मजदूरों का कहना है कि उन्हें उनकी मेहनत का उचित भुगतान नहीं मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर विधायक का दावा है कि काम अधूरा होने के कारण भुगतान रोक दिया गया है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह मामला विधायक और उनकी पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकता है। भाजपा विधायक का इस तरह से विवादों में घिरना पार्टी के लिए एक और चुनौती बन सकता है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी बयानबाजी शुरू कर दी है, और उनके नेता इस मुद्दे को उठाकर भाजपा सरकार पर निशाना साध सकते हैं।
प्रशासन की भूमिका और भविष्य की दिशा
गोरखपुर प्रशासन अब इस मामले में जल्द से जल्द निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का यह प्रयास है कि इस मामले को जल्द से जल्द हल किया जाए और मजदूरों को उनका बकाया भुगतान मिल सके। प्रशासन को यह भी ध्यान रखना होगा कि इस मामले में किसी प्रकार का अन्याय न हो और काम के दौरान किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं किया जाए।
इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है, और देखना यह है कि इस जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं। क्या विधायक और मजदूरों के बीच का विवाद जल्द सुलझेगा या फिर यह मामला और बढ़ेगा? फिलहाल यह कहना मुश्किल है, लेकिन इस मामले का समाधान मजदूरों के लिए एक बड़ा सवाल बन चुका है।
गोरखपुर के विधायक पर मजदूरों से वेतन न देने का आरोप, एक बड़ा विवाद बन चुका है। इस मामले में दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं और प्रशासन की जांच जारी है। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि ऐसे मामलों में प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व को संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और सभी को न्याय मिल सके।