Gorakhpur : इन दिनों डिजिटल गिरफ्तारी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। धोखेबाजों द्वारा वीडियो कॉल के माध्यम से पुलिस का रूप धारण कर लोगों को डराकर पैसे की उगाही की जा रही है। इस तरह के धोखाधड़ी के मामलों में लोग डर के कारण आसानी से फंस जा रहे हैं। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के अधिकारी कहते हैं कि लोग वीडियो कॉल्स प्राप्त करते वक्त विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि धोखेबाज अब पाकिस्तान के नंबरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो काफी खतरनाक हो सकता है।
क्या है ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का तरीका?
डिजिटल गिरफ्तारी के इन मामलों में धोखेबाज वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिसकर्मी के रूप में प्रस्तुत करते हैं और फिर लोगों को डराकर पैसे की मांग करते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने इनकी बात नहीं मानी तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हाल ही में, गोरखपुर में एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ है, जहां एक छात्र को डराकर 38,132 रुपये की रकम उगाही की गई।
एक छात्र की दहशत:
गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय (MMMUT) की एक छात्रा को 10 अक्टूबर को एक कॉल आई, जिसमें फोन करने वाला व्यक्ति पुलिसकर्मी के रूप में सामने आया। छात्रा ने बताया कि कॉलर ने कई ऐसी बातें बताई, जो केवल वह ही जानती थी। छात्रा का कहना था कि उसे यह समझ नहीं आया कि धोखेबाजों को ये सारी जानकारी कैसे मिली। कॉल करने वाले ने पुलिस की यूनिफॉर्म पहनी हुई थी और वह लगातार उसकी डराने-धमकाने वाली बातों से उसे परेशान करता रहा। उसे बताया गया कि उसके खिलाफ हैदराबाद में मामला दर्ज किया गया है। इस डर के कारण छात्रा घबराकर धोखेबाज के जाल में फंस गई और उसने पैसे दे दिए।
इसी तरह की और घटनाएं:
इसी प्रकार, गोरखपुर के तिवारीपुर क्षेत्र में सितंबर महीने में एक महिला को भी डिजिटल गिरफ्तारी का शिकार होना पड़ा। महिला के पति कमलनाथ तिवारी ने बताया कि उनकी पत्नी अक्सर कुरियर से सामान मंगवाती थी और इसी दौरान धोखेबाजों ने उसे ड्रग्स के मामले में फंसाने का डर दिखाया। महिला ने अपने पति से इलाज के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की। कमलनाथ को उस समय शक हुआ और उसने समय रहते अपनी पत्नी को धोखाधड़ी से बचा लिया।
कैसे बचें धोखेबाजों से?
गोरखपुर में बढ़ती इस तरह की धोखाधड़ी की घटनाओं के बाद पुलिस ने लोगों को जागरूक करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं, जिससे वे इन धोखेबाजों से बच सकते हैं।
1. +92 से शुरू होने वाले नंबरों से रहें दूर:
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बताया है कि अगर किसी नंबर से कॉल आती है जो पाकिस्तान (+92) के नंबर से शुरू होती है, तो उसे कतई रिसीव न करें। पाकिस्तान के नंबरों से आने वाली कॉल्स अब डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों में इस्तेमाल की जा रही हैं। अगर ऐसा कोई नंबर आपके पास आता है तो उसे तुरंत अनदेखा करें।
2. स्काइप कॉल से रहें सावधान:
इसके अलावा, पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि पुलिस कभी भी डिजिटल गिरफ्तारी नहीं करती है। साइबर क्राइम के मामलों में धोखेबाज स्काइप का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह ऐप मुफ्त वीडियो और वॉयस कॉल की सुविधा देता है। धोखेबाज इस सुविधा का फायदा उठाकर लोगों को फंसाते हैं। इसलिए अगर आपको किसी अज्ञात नंबर से स्काइप कॉल आए, तो उसे न रिसीव करें।
3. कैमरा को बंद रखें:
जब भी आपको किसी अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आए, तो तुरंत अपने फोन के कैमरे को बंद कर लें। वीडियो कॉल लेने से पहले अच्छे से सुनें और पूरी बात समझने के बाद अगर आपको शक हो, तो नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
4. पुलिस स्टेशन में शिकायत करें:
अगर आपको लगता है कि आप धोखेबाजों का शिकार हो सकते हैं, तो तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा, चक्षु ऐप (Chakshu App) के जरिए उस नंबर को ब्लॉक करवाने की शिकायत भी कर सकते हैं, ताकि वह नंबर फिर से किसी और को धोखा न दे सके।
5. सतर्कता बरतें:
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों को सतर्क रहना चाहिए। धोखेबाज इस समय काफी चालाकी से काम कर रहे हैं और समाज के विभिन्न वर्गों को शिकार बना रहे हैं। इसलिए हर किसी को जागरूक रहकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। पुलिस भी लगातार इस तरह के मामलों पर नजर रख रही है और जो लोग धोखाधड़ी में शामिल होते हैं, उन्हें पकड़ने के लिए कार्रवाई कर रही है।
डिजिटल गिरफ्तारी के मामले इस समय तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके पीछे पाकिस्तान के नंबरों का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि लोग इन धोखेबाजों से बचने के लिए सावधानी बरतें। अपने परिवार और दोस्तों को भी इन धोखाधड़ी के मामलों के बारे में अवगत कराएं और उनसे कहें कि वे कभी भी अज्ञात नंबरों से कॉल न लें और वीडियो कॉल्स से सावधान रहें। पुलिस ने इस मामले में लोगों को जागरूक करने के लिए जो दिशा-निर्देश दिए हैं, उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
इसके अलावा, धोखेबाजों को पकड़ने के लिए पुलिस की सतर्कता और कार्रवाई भी बेहद अहम है, ताकि इस तरह के मामलों में कमी लाई जा सके और आम जनता को सुरक्षित किया जा सके।