Gorakhpur Akashvani: गोरखपुर शहर की सांस्कृतिक समृद्धि का एक प्रमुख प्रमाण यहां स्थित आकाशवाणी केंद्र है। इस केंद्र का इतिहास महज दो-चार वर्षों का नहीं, बल्कि पांच दशकों से भी अधिक पुराना है। यह केंद्र न केवल पूर्वांचल के लोगों के दिलों में बसा है, बल्कि इसकी आवाज़ दूर-दराज़ तक सुनाई देती रही है।
100 किलोवाट क्षमता, पहुंच पूरे उत्तर भारत तक
गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र की क्षमता 100 किलोवाट थी और आधिकारिक रूप से इसकी प्रसारण सीमा 100 किलोमीटर मानी जाती थी। लेकिन व्यावहारिक रूप से इसकी आवाज पूरे उत्तर भारत तक गूंजती थी। इस केंद्र की महत्ता इस बात से भी समझी जा सकती है कि यह उत्तर प्रदेश का दूसरा आकाशवाणी केंद्र था, जिसकी क्षमता 100 किलोवाट थी।
नेपाल और पाकिस्तान तक गूंजती थी आकाशवाणी गोरखपुर की आवाज़
जब मौसम साफ़ रहता था, तो “यह आकाशवाणी गोरखपुर है” की आवाज़ नेपाल और पाकिस्तान के कई हिस्सों तक सुनी जाती थी। यहां से प्रसारित कार्यक्रमों ने श्रोताओं के दिलों में ऐसी जगह बना ली, जो तीन दशकों तक कायम रही। बाद में दूरदर्शन और निजी टीवी चैनलों के आने से इसकी लोकप्रियता में कमी आई, लेकिन आज भी रेडियो प्रेमी आकाशवाणी गोरखपुर के कार्यक्रम सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं।
‘इंद्रधनुष’ और ‘झरोखा’ कार्यक्रमों की अपार लोकप्रियता
गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र ने कई यादगार कार्यक्रम प्रस्तुत किए, लेकिन ‘इंद्रधनुष’ और ‘झरोखा’ की लोकप्रियता असाधारण रही। इन कार्यक्रमों की इतनी मांग थी कि इनके लिए उत्तर भारत के कोने-कोने से प्रशंसा पत्र आते थे।
प्रसिद्ध आकाशवाणी उद्घोषक उदीता श्रीवास्तव बताती हैं कि इन कार्यक्रमों के लिए पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भी पत्र आते थे। इसके अलावा ‘शेर आपके, गीत हमारे’ नामक कार्यक्रम के श्रोता भी लाखों में थे।
रेडियो नाटक: मॉरीशस और फिजी तक थी मांग
गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र के रेडियो नाटक भी बेहद लोकप्रिय रहे। प्रसिद्ध रंगकर्मी और आकाशवाणी के पूर्व कार्यक्रम कार्यकारी हसन अब्बास रिज़वी के अनुसार, यहां प्रसारित कई नाटक इतने प्रसिद्ध हुए कि उनकी मांग मॉरीशस और फिजी जैसे देशों से भी होने लगी।
यहां से प्रसारित पहला नाटक ‘पार्क में’ था, जो बेहद लोकप्रिय हुआ। इसके अलावा ‘आखिर कब तक’, ‘हैबदान’ और ‘कर्म का फल’ जैसे नाटक भी खूब पसंद किए गए।
श्रोताओं की मांग पर बजते थे गीत
गोरखपुर आकाशवाणी के लोकप्रिय उद्घोषक सर्वेश दुबे बताते हैं कि फिल्मी गीतों के अनुरोध कार्यक्रम को लेकर श्रोताओं में जबरदस्त उत्साह रहता था। वह आज भी उन श्रोताओं के नाम याद करते हैं, जो नियमित रूप से पत्र भेजकर गीतों की फरमाइश किया करते थे।
उन्होंने बताया कि सबसे अधिक अनुरोध पत्र नरकटियागंज, मऊ के मोहम्मदाबाद और बलिया से आते थे। इनमें लव चक्रवर्ती, शैलेन्द्र किशोर सुमन, रहमत और दरोगा सिंह जैसे नाम प्रमुख थे।
किसान कृषि कार्यक्रम सुनकर बनाते थे योजनाएं
गोरखपुर आकाशवाणी के पूर्व कृषि प्रसारण अधिकारी विंध्यवासिनी राय बताते हैं कि इस केंद्र के ‘खेती-बाड़ी’, ‘खेती की बातें’ और ‘ग्राम जगत’ जैसे कार्यक्रमों की जबरदस्त लोकप्रियता थी। किसानों की खेती-बाड़ी इन्हीं कार्यक्रमों पर निर्भर करती थी।
कई किसान कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए सीधे आकाशवाणी केंद्र पहुंच जाते थे। देवरिया, मऊ, आजमगढ़ और बलिया में यह कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय था।
राहत-उषा और केवल-पद्मा की गायकी का जादू
पूर्व कार्यक्रम कार्यकारी पी.के. त्रिपाठी बताते हैं कि गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र में राहत अली और उषा टंडन की जोड़ी ने पूरे भारत में अपनी गायकी का परचम लहराया। इनके गाए गीत पूर्वांचल में बेहद लोकप्रिय थे।
इसी तरह केवल कुमार और पद्मा गिदवानी की जोड़ी भी बहुत प्रसिद्ध थी। इनके गीत आकाशवाणी गोरखपुर की पहचान बन गए थे।
‘जुगनी भाई’ बने गोरखपुर आकाशवाणी की पहचान
गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र का नाम लेते ही एक और नाम ज़रूर जुड़ जाता है— रवींद्र श्रीवास्तव ‘जुगनी’। वह इस केंद्र के प्रतिष्ठित उद्घोषक रहे हैं और आज भी लोग उन्हें देखने और जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।
‘जुगनी’ बताते हैं कि आकाशवाणी के लिए उनके नाम की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि लोग उन्हें एक बुजुर्ग व्यक्ति समझते थे, जबकि वह उस समय युवा थे। एक बार श्रोताओं की मांग पर उन्हें मंच पर एक वृद्ध व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत होना पड़ा, क्योंकि लोग उन्हें जवान स्वरूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।
कई महान हस्तियों ने दी आकाशवाणी गोरखपुर को पहचान
गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की मेजबानी की है। उद्घोषक सर्वेश दुबे बताते हैं कि कैफ़ी आज़मी और फिराक गोरखपुरी जैसे प्रसिद्ध शायरों की कविताएं इस स्टूडियो में गूंज चुकी हैं।
इसके अलावा, पं. जसराज, मन्ना डे, पं. किशन महाराज, उस्ताद अहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन, पंडवानी गायिका तीजन बाई और ऋतु वर्मा जैसी हस्तियां भी इस केंद्र का हिस्सा रही हैं।
देश का इकलौता केंद्र जहां से प्रसारित होती है भोजपुरी खबर
गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र देश का एकमात्र केंद्र है, जहां से भोजपुरी भाषा में समाचार प्रसारित होते हैं। इसकी शुरुआत 6 नवंबर 2008 को हुई थी और तब से यह सिलसिला अनवरत जारी है। शाम 6 बजे प्रसारित होने वाली यह खबर पूरे पूर्वांचल में बेहद लोकप्रिय है।
आज जब बहुत कम लोग रेडियो सेट रखते हैं, तब भी लोग इंटरनेट और अन्य माध्यमों से भोजपुरी समाचार सुनते हैं और इसे अपने क्षेत्रीय गर्व का प्रतीक मानते हैं।
उत्तर प्रदेश का दूसरा आकाशवाणी केंद्र जहां से समाचार प्रसारित होते हैं
गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र उत्तर प्रदेश का दूसरा आकाशवाणी केंद्र है, जहां से समाचार प्रसारित होते हैं। यहां से सुबह क्षेत्रीय समाचार प्रसारित किए जाते हैं, जबकि शाम को लखनऊ केंद्र से समाचार प्रसारित होते हैं।
पूर्व समाचार विभाग उप निदेशक रमेश चंद्र शुक्ला बताते हैं कि इस केंद्र से समाचार प्रसारण की शुरुआत 1980 में हुई थी। वर्तमान में समाचार विभाग से क्षेत्रीय, प्रादेशिक और भोजपुरी— तीनों भाषाओं में समाचार प्रसारित किए जाते हैं।
इन समाचारों को अब इंटरनेट मीडिया के सभी प्लेटफार्मों पर सुना जा सकता है। समाचार विभाग प्रभारी ओम अवस्थी के अनुसार, इंटरनेट मीडिया पर रेडियो समाचारों के श्रोताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
गोरखपुर आकाशवाणी न केवल इस शहर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, बल्कि यह पूर्वांचल के लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यह केंद्र आज भी अपनी अनूठी पहचान बनाए हुए है और डिजिटल युग में भी अपनी महत्ता को बरकरार रखे हुए है।