पूर्व प्रधानमंत्री Dr. Manmohan Singh का निधन देश भर में शोक की लहर पैदा कर गया है। उनका जीवन भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। गोरखपुर जैसे शहर में भी डॉ. मनमोहन सिंह की यादें ताजातरीन हैं, जो उनके प्रधानमंत्री बनने के तीन साल बाद एक जनसभा के रूप में यहां आई थीं। यह जनसभा न केवल उनके लिए एक ऐतिहासिक घटना थी, बल्कि गोरखपुर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए भी यह एक यादगार पल बन गया था।
गोरखपुर में डॉ. मनमोहन सिंह की पहली जनसभा
2007 के विधानसभा चुनाव के दौरान, डॉ. मनमोहन सिंह गोरखपुर आए थे। वह इस शहर में कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगने के उद्देश्य से आयोजित एक जनसभा में शामिल हुए थे। यह जनसभा गोरखपुर नगर विधानसभा के प्रत्याशी सिद्धार्थ प्रिय श्रीवास्तव सहित गोरखपुर मंडल के सभी कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में थी। प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह गोरखपुर आगमन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा अवसर था।
जनसभा का आयोजन सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम में किया गया था, जो एक बड़ा मैदान था। हालांकि, इस विशाल स्थान पर जनसभा के दौरान बहुत कम लोग उपस्थित हुए, और यह कांग्रेस के लिए निराशाजनक था। डॉ. मनमोहन सिंह ने भी कम भीड़ को देखकर नाराजगी व्यक्त की थी। जनसभा के आयोजन में हुई विफलता ने कांग्रेस में कई सवाल खड़े कर दिए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में यह चर्चा का विषय बन गया कि इस कार्यक्रम की असफलता के कारण कुछ ही दिनों बाद एआईसीसी के सचिव चंदन बागची को पद से हटा दिया गया था। बागची को गोरखपुर जनसभा का प्रबंधन सौंपा गया था, लेकिन वह इस जनसभा के लिए अपेक्षित भीड़ जुटाने में असफल रहे थे।
जनसभा के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह का मूड
सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम में आयोजित इस जनसभा का आयोजन 1 मई 2007 को किया गया था। उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सलमान खुर्शीद किसी कारणवश इस जनसभा में शामिल नहीं हो पाए थे। उनकी अनुपस्थिति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. सैयद जमाल ने इस जनसभा की जिम्मेदारी संभाली थी। डॉ. जमाल बताते हैं कि जब डॉ. मनमोहन सिंह से उनकी मुलाकात हुई थी, तो वह बहुत ही सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। मंच से उन्हें संबोधित करने का अवसर मिला और उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह को उनके योगदान के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की।
हालांकि, जनसभा के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह का मूड काफी खराब हो गया था, क्योंकि जिस विशाल मैदान में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था, वहां महज 2 हजार लोग ही उपस्थित थे। प्रधानमंत्री के रूप में उनकी यह जनसभा अपेक्षाकृत रूप से कम भीड़ के साथ संपन्न हुई, जिससे डॉ. मनमोहन सिंह नाराज हो गए थे और उनका संबोधन भी बहुत छोटा था। उनके इस गुस्से का कारण गोरखपुर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा जनसभा के आयोजन में की गई असफलता थी।
कार्यक्रम की असफलता और उसका परिणाम
गोरखपुर में आयोजित डॉ. मनमोहन सिंह की जनसभा की विफलता कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण सबक बन गई। इस जनसभा में अपेक्षित भीड़ न जुटने के कारण कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हलचल मच गई थी। कहा जाता है कि इसी जनसभा की असफलता के बाद एआईसीसी सचिव चंदन बागची को पद से हटा दिया गया था। चंदन बागची पर गोरखपुर जनसभा का प्रबंधन करने की जिम्मेदारी थी, लेकिन वह इस जिम्मेदारी को सही ढंग से नहीं निभा सके थे।
इसके बाद, गोरखपुर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने यह महसूस किया कि पार्टी की जनसभाओं की सफलता के लिए बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है। यह घटना कांग्रेस पार्टी के लिए एक चेतावनी थी कि हर चुनावी कार्यक्रम और प्रचार में बेहतर रणनीति और प्रबंधन की जरूरत होती है। गोरखपुर के जनसभा की असफलता से कांग्रेस को एक सीख मिली कि किसी भी चुनावी अभियान में भीड़ जुटाना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
डॉ. मनमोहन सिंह की सादगी और उनकी योगदान
डॉ. मनमोहन सिंह का निधन भारत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन न केवल राजनीति, बल्कि देश के आर्थिक उत्थान के लिए भी प्रेरणादायक रहा है। वह भारतीय आर्थिक सुधारों के प्रणेता थे, और उनकी नीतियों ने भारत को वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाया। उनकी सादगी और ईमानदारी से उनकी छवि एक आदर्श नेता की बनी रही।
कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता उनकी नीति, नेतृत्व क्षमता और समर्पण को हमेशा याद करेंगे। उनकी नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी और आर्थिक उदारीकरण को बढ़ावा दिया। वह प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में रहते हुए भी अपनी विनम्रता और सरलता के लिए प्रसिद्ध रहे। उनकी प्रधानमंत्री की भूमिका और उनके योगदान को इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
गोरखपुर की यादें और उनका प्रभाव
गोरखपुर में डॉ. मनमोहन सिंह का यह एकमात्र कार्यक्रम था, लेकिन यह कार्यक्रम कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस कार्यक्रम की विफलता के बाद, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रचार और कार्यक्रमों के आयोजन में एक नई दिशा अपनाई। डॉ. मनमोहन सिंह का यह दौरा न केवल गोरखपुर के लिए, बल्कि कांग्रेस के लिए भी एक सीख देने वाला था।
आज, जबकि डॉ. मनमोहन सिंह हमारे बीच नहीं रहे, गोरखपुर के कार्यकर्ता और उनके पुराने साथी उनकी सादगी और उनके योगदान को हमेशा याद करेंगे। उनकी यादें और उनके कार्य देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। उनके निधन से जो शोक की लहर फैली है, वह केवल कांग्रेस पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।