बसपा कार्यकर्ता की पिटाई का मामला: पुलिस की बर्बरता पर उठे सवाल
गोरखपुर में पुलिस प्रशासन पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। बेलीपार थाना क्षेत्र में एक बसपा कार्यकर्ता कुंदन कुमार को पुलिसकर्मियों द्वारा बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है और बसपा कार्यकर्ताओं ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कैसे हुई घटना?
गोरखपुर जिले के बेलीपार थाना क्षेत्र में फर्नीचर व्यवसायी और बसपा कार्यकर्ता कुंदन कुमार की दुकान है। आरोप है कि 9 जनवरी को बेलीपार थाने के सिपाही राम पुकार गिरी उसकी दुकान पर पहुंचे और एक तख्त (चौकी) की मांग की। जब कुंदन कुमार ने पैसे मांगे, तो सिपाही ने कहा कि पुलिस वाले पैसा नहीं देते हैं। जब कुंदन ने चौकी मुफ्त देने से मना कर दिया, तो पुलिसकर्मी ने उसे जातिसूचक गालियां दीं और जबरदस्ती थाने ले जाकर लॉकअप में बंद कर दिया।
थाने में बर्बरता से पीटा गया
आरोपों के अनुसार, उसी रात करीब 1 से 2 बजे के बीच सिपाही राम पुकार गिरी, राजू गौड़, दारोगा सुधांशु यादव और अन्य दो पुलिसकर्मी कुंदन को लॉकअप से निकालकर थानेदार के कमरे में ले गए। वहां उसे बेल्ट, लात और घूंसों से बेरहमी से पीटा गया। अगले दिन पुलिसकर्मी कुंदन को पिपरौली स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां बिना डॉक्टर के सामने पेश किए, जबरदस्ती डॉक्टरी रिपोर्ट तैयार करवाई गई और शांतिभंग का केस लगाकर चालान कर दिया गया। जमानत मिलने के बाद कुंदन ने जिला अस्पताल में अपनी चोटों का इलाज करवाया।
मामले पर बढ़ता विरोध
घटना के बाद बसपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। बसपा जिलाध्यक्ष ऋषि कपूर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एसएसपी से मिलकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस मामले की शिकायत राज्य अनुसूचित जाति आयोग और एडीजी जोन को भी की गई है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजी गौतम ने भी एसपी साउथ से टेलीफोन पर बात कर निष्पक्ष जांच की मांग की।
क्या थी घटना के पीछे की असली वजह?
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुंदन कुमार और सिपाही राम पुकार गिरी के बीच पहले भी विवाद हुआ था। कुछ लोगों का कहना है कि कुंदन एक वाहन पर लकड़ी लादकर अपनी दुकान जा रहा था, तभी संकरी सड़क पर उसकी गाड़ी सिपाही की बाइक से हल्की टकरा गई। इसको लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि चौकी मुफ्त में न देने के कारण पुलिसकर्मी कुंदन से नाराज थे और इसी वजह से उसे बेवजह पीटा गया।
क्या मिलेगा न्याय?
पुलिस पर पहले भी इस तरह के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में दोषियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। इस मामले में भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या कुंदन कुमार को न्याय मिलेगा? क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
बसपा कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि अगर जल्द ही उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।