Farmers Protest: किसान यूनाइटेड किसान मोर्चा द्वारा अपनी मांगों को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। किसानों की मांगों पर जोर देने के लिए समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान, जो उत्तर प्रदेश के सरधना विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, नोएडा पहुंचे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें ग्रेटर नोएडा में किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करने से रोक दिया। इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
सिरसा कसना टोल प्लाजा पर रोका गया विधायक
पुलिस ने अतुल प्रधान को सिरसा कसना टोल प्लाजा पर रोक लिया, जहां समाजवादी पार्टी के विधायक और उनके समर्थक प्रदर्शन कर रहे थे। विधायक के साथ कुछ वाहन भी थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें सिरसा टोल कसना पुलिस थाने के क्षेत्र से आगे नहीं जाने दिया। पुलिस ने विधायक के समर्थन में पहुंचे उनके समर्थकों को भी प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी। यह घटना नोएडा के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की है।
किसानों की तीन प्रमुख मांगों पर जारी है विरोध
किसान लगातार अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं। यह मांगें कृषि कानूनों के खिलाफ, फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं देने से संबंधित हैं। किसानों ने अपनी इन मांगों को लेकर ग्रेटर नोएडा में प्रदर्शन तेज कर दिया है, जिसके चलते क्षेत्र में भारी यातायात जाम और सार्वजनिक जीवन में व्यवधान हो रहा है।
राहुल गांधी ने किया प्रदर्शन का समर्थन
इस बीच, कांग्रेस पार्टी के नेता और लोकसभा में विपक्षी नेता राहुल गांधी ने किसानों के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि किसानों को दिल्ली आने से रोकना निंदनीय है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह किसानों की मांगों को गंभीरता से सुने और उनके समाधान के लिए कदम उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि यह समय किसानों की समस्याओं को सुलझाने का है, न कि उनके खिलाफ दमनात्मक उपायों का।
स्थानीय लोगों को हो रही समस्याएं
किसान आंदोलन के चलते नोएडा और आसपास के इलाकों में स्थानीय लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाली लड़कियां और कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी भारी जाम और यातायात की समस्या के कारण समय पर अपने गंतव्यों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। आंदोलन के कारण सार्वजनिक यातायात पर भी असर पड़ा है।
किसानों की आपातकालीन बैठक
नोएडा के गौतम बुद्ध नगर जिले में शनिवार को किसानों के आंदोलन को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। यह बैठक अट्टा गुज्रान गांव में हुई, जिसमें 30 किसान संगठनों ने भाग लिया। इन संगठनों में भारतीय किसान यूनियन टिकैत, जय जवान जय किसान, भारतीय किसान यूनियन महात्मा टिकैत, अखिल भारतीय किसान सभा, सिस्टम रिफॉर्म संगठन, भारतीय किसान एकता, किसान एकता महासंघ, भारतीय किसान परिषद और भारतीय किसान यूनियन (भानू) शामिल थे।
पुलिस बर्बरता और भय के माहौल को समाप्त करने की मांग
बैठक में किसानों ने पुलिस बर्बरता और भय के माहौल को तुरंत समाप्त करने की मांग की। इसके साथ ही सरकार से अपील की गई कि वह जेल में बंद किसानों और किसान नेताओं को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा करे। किसानों ने यह भी कहा कि एक शांतिपूर्ण माहौल बनाया जाए, ताकि सरकार और किसानों के बीच संवाद और बातचीत का रास्ता खुल सके।
किसान आंदोलन की यह स्थिति एक बार फिर से दिखाती है कि किसानों की मांगों के प्रति सरकार की ओर से नकारात्मक दृष्टिकोण उनकी समस्याओं को और बढ़ा सकता है। आंदोलनकारियों के लिए यह सिर्फ एक संघर्ष नहीं बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा का मुद्दा बन गया है। वहीं, सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को सुलझाने के लिए गंभीर प्रयास करे और किसानों के साथ संवाद स्थापित करें ताकि एक स्थिर और समृद्ध भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकें।