Gorakhpur में भूमि अधिग्रहण पर विवाद, 10 साल से नहीं बढ़ी सर्कल रेट, किसानों में गहरा असंतोष

Gorakhpur में भूमि अधिग्रहण पर विवाद, 10 साल से नहीं बढ़ी सर्कल रेट, किसानों में गहरा असंतोष

Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में किसानों और नागरिकों से भूमि का अधिग्रहण तेज गति से हो रहा है, खासकर सड़क, उद्योग और आवासीय योजनाओं के लिए। अब तक, गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) और गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA) ने भूमि अधिग्रहण का कार्य समझौते के आधार पर किया था। लेकिन अब मुख्यमंत्री के सपने को साकार करने के लिए इन प्राधिकरणों ने अनिवार्य भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे किसानों में गहरा असंतोष पैदा हो गया है। किसानों का कहना है कि प्रशासन ने पिछले 10 से 15 वर्षों में सर्कल रेट में कोई वृद्धि नहीं की है, और उनकी भूमि का मूल्य बहुत कम (20-25 लाख रुपये) पर लिया जा रहा है, जबकि उसकी वास्तविक बाजार कीमत करोड़ों में है।

मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत भूमि अधिग्रहण

मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना (Mukhyamantri Shahri Vistarika Yojana) के तहत गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। विशेष रूप से, वैदिविक सिटी नये गोरखपुर के लिए भूमि अधिग्रहण के तहत अब न केवल समझौते के आधार पर भूमि ली जा रही है, बल्कि अनिवार्य अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इस संदर्भ में, गोरखपुर के विभिन्न गांवों, जैसे कि मड़पार, तकीया मेदिनिपुर और चौरिचौरा, में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई। इस सुनवाई में किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध किया और मांग की कि सर्कल रेट को बाजार दर के अनुसार नया निर्धारित किया जाए।

किसानों का विरोध और सर्कल रेट में वृद्धि की मांग

किसानों ने इस सुनवाई में जोरदार विरोध जताया और कहा कि प्रशासन द्वारा पिछले एक दशक से सर्कल रेट में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि भूमि की कीमतें बाजार में बढ़ी हैं। किसानों का कहना है कि जो भूमि बाजार में करोड़ों रुपये में बिक सकती है, उसे केवल 20 से 25 लाख रुपये में लिया जा रहा है, जो उनके लिए अत्यंत असंतोषजनक है। किसानों ने यह भी कहा कि यदि उचित मुआवजा नहीं मिलता है, तो उन्हें अपनी जमीन छोड़ने के लिए मजबूर किया जाएगा, जिससे उनकी जीवन यापन की स्थिति और खराब हो जाएगी।

Gorakhpur में भूमि अधिग्रहण पर विवाद, 10 साल से नहीं बढ़ी सर्कल रेट, किसानों में गहरा असंतोष

सदर तहसील और चौरिचौरा तहसील के सभागार में आयोजित सार्वजनिक सुनवाई के दौरान किसान नेताओं ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इस सुनवाई में संजय जायसवाल, सत्येंद्रयेन निषाद, हीरालाल और रामगति यादव ने कहा कि छोटे किसान गरीब हो रहे हैं और यदि उन्हें उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तो वे आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

प्रशासन की स्थिति और आगामी निर्णय

तहसीलदार रामभेज ने बैठक में बताया कि किसानों ने नई सर्कल रेट के हिसाब से मुआवजा देने की मांग की है। इस मामले में कोई भी अंतिम निर्णय उच्च अधिकारियों से चर्चा करने के बाद लिया जाएगा। वहीं, उप-तहसीलदार सदार देवेंद्र यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का निर्णय authority द्वारा लिया जाएगा और किसानों की मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

अधिग्रहित भूमि और योजना की विस्तार

वैदिविक सिटी के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत चौरिचौरा तहसील के मड़पार में 151.261 हेक्टेयर भूमि, सदार तहसील के तकीया मेदिनिपुर में 44.706 हेक्टेयर भूमि और कोनी में 56.482 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इन क्षेत्रों में एक एजेंसी द्वारा प्रस्तुत सामाजिक प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई। इस सुनवाई में पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुंवर प्रताप सिंह ने मांग की कि भूमि की कीमत बाजार दर के अनुसार निर्धारित की जाए और इसके बाद मुआवजा तय किया जाए।

किसानों का आंदोलन और धरना

GIDA कार्यालय में सोमवार को काकना और चकफत्ता के किसानों ने धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA) से अपनी कृषि और आवासीय भूमि को अधिग्रहण से बाहर रखने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे सुनील कुमार यादव और भोला नाथ मौर्य ने आरोप लगाया कि उनका कृषि भूमि पहले ही बहुत कम कीमत पर GIDA द्वारा अधिग्रहित किया जा चुका है। अब GIDA प्रस्ताव पारित कर रहा है कि बाकी की भूमि को मनमाने तरीके से अधिग्रहित किया जाएगा।

किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले से ही कम कीमत पर भूमि दी जा रही है, और अब यह जमीन बिना उनकी सहमति के ली जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कमिश्नर को शपथ पत्र दिया है कि वे अपनी भूमि GIDA को नहीं देंगे। GIDA का कहना है कि भूमि अधिग्रहण किसानों की सहमति के बिना नहीं किया जाएगा, क्योंकि अधिग्रहण के लिए 80 प्रतिशत किसानों की सहमति जरूरी होती है।

भविष्य की दिशा

यह स्पष्ट है कि गोरखपुर में भूमि अधिग्रहण पर किसानों और प्रशासन के बीच मतभेद गहरे होते जा रहे हैं। जहां प्रशासन भूमि के अधिग्रहण को विकास की दिशा में जरूरी कदम मान रहा है, वहीं किसानों का कहना है कि उन्हें उचित मुआवजा और सम्मानजनक मूल्य नहीं मिल रहा है। इस स्थिति में, यह देखना होगा कि गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) और गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA) आगे बढ़कर किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और क्या भूमि अधिग्रहण के लिए नया सर्कल रेट तय किया जाता है।

यदि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेता है, तो यह विवाद और बढ़ सकता है, जिससे किसानों के बीच और प्रशासन के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

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