Deoria News: सरयू नदी एक बार फिर बाढ़ की चपेट में आ गई है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 66.50 मीटर से एक मीटर ऊपर 67.50 मीटर तक पहुंच गया है, जिससे तटीय गांवों में हड़कंप मच गया है। यह जलस्तर इस वर्ष का सबसे उच्चतम स्तर है। जलस्तर में इस अप्रत्याशित वृद्धि ने तटीय इलाकों के लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। सरयू नदी के जलप्रवाह के बढ़ने से न केवल नदी किनारे के गांवों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है, बल्कि अन्य नदी क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव महसूस किया जा रहा है।
सरयू नदी में बढ़ा जलस्तर
शनिवार शाम लगभग छह बजे सरयू नदी का जलस्तर 67.50 मीटर तक पहुंच गया, जो कि खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर था। यह जलस्तर इस साल का सबसे उच्चतम स्तर था। सरयू नदी के इस बढ़ते जलस्तर के कारण, राप्ती नदी भी बाढ़ की चपेट में आ गई है। इसका असर कई गांवों पर पड़ा है, और लोग पिछले साल के बाढ़ की घटनाओं को याद कर रहे हैं, जब ऐसी ही स्थिति ने बड़ी तबाही मचाई थी।
तटीय गांवों में बाढ़ का असर
सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण पारसियन-विषुनपुर देवर के जारलहवा, स्कूलहिया, बरमहवां आदि गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। राप्ती नदी के पानी के बढ़ने से भदिला प्रथम गांव एक द्वीप बन गया है, जो वहां के निवासियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। इस आपदा के कारण गोपालगंज जिले के कोलखास गांव के लोग भी बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं। उग्रसेन पुल के पास कोलखास गांव के लोग अब अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।
सरयू नदी का बढ़ा जलस्तर तटीय गांवों में बाढ़ के पानी की ओर बढ़ रहा है। पानी के कारण पईना, महियावां, नवापार, कटैलवा, बेलडोर, राजपुर-नौकटोला, रामैपुरा, मरवटिया जैसे गांवों में भी बाढ़ की स्थिति बन गई है, जो लोगों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है।
कोलखास और कुर्ह पारसियन गांवों की स्थिति
बारहज के समीप स्थित सरयू नदी के किनारे पर कापरवार संगम घाट के आसपास की स्थिति और भी चिंताजनक बन गई है। यहां नदी के तेज बहाव और कटाव के कारण स्थानीय गांवों को खतरा उत्पन्न हो गया है। कुछ गांवों के लोग इसे लेकर चिंतित हैं और उनका कहना है कि नदी का रुख बदलने में खनन गतिविधियों का भी बड़ा हाथ है। विशेष रूप से 2007 से 2012 के बीच जब नदी ने अपना रुख आक्रामक रूप से बदला, तब कुर्ह पारसियन और कोलखास गांव पूरी तरह से समाप्त हो गए थे। नदी के कटाव की वजह से यहां के लोग पलायन करने को मजबूर हो गए थे।
इस क्षेत्र में नदी के बदलते रुख के कारण पर्यावरणीय और भूगर्भीय बदलाव भी आ रहे हैं। नदी का बढ़ता जलस्तर और उसका रुख बदलने की वजह से आसपास के गांवों में जलभराव की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। प्रशासन ने संगम तट से लेकर भागलपुर तक इस इलाके को खतरे का क्षेत्र घोषित कर दिया है।
सरयू नदी के जलस्तर पर प्रशासन की नजर
सरयू नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद, बाढ़ सुरक्षा चौकियों को अलर्ट पर रखा गया है और स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों को किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया है कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य समय पर शुरू किया जाएगा और कोई भी असुविधा न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
क्षेत्रीय अधिकारियों की तैयारी
प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ के बढ़ते पानी के बावजूद हर स्थिति से निपटने के लिए सभी इंतजाम पूरे किए गए हैं। राहत कार्यों के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं, जो प्रभावित गांवों तक जल्दी पहुंचकर वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम करेंगी। इसके साथ ही, प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य जरूरी चीजों की आपूर्ति के लिए भी इंतजाम किए हैं।
इसके अलावा, नदी के बढ़ते जलस्तर से निपटने के लिए बांधों की स्थिति की भी निगरानी की जा रही है। जहां भी नदी के पानी के खतरे का अंदेशा है, वहां तटीय सुरक्षा बढ़ाई गई है, ताकि नुकसान को कम किया जा सके।
स्थानीय लोगों का बयान
स्थानीय लोग भी इस संकट को लेकर चिंतित हैं और उनका कहना है कि हर साल इस तरह की बाढ़ से उन्हें परेशानी होती है। कई लोग नदी के किनारे खनन कार्यों को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि खनन के कारण नदी का रुख बदलता जा रहा है, जिससे गांवों में और बाढ़ की संभावना बढ़ रही है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम पिछले कुछ वर्षों से बाढ़ से जूझ रहे हैं, और इस बार भी वही स्थिति दिख रही है। प्रशासन की ओर से राहत कार्य की तैयारी तो दिख रही है, लेकिन हमें सच्ची मदद की जरूरत है।”
सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर इलाके में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं, लेकिन स्थानीय लोग और प्रभावित गांवों के निवासी राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि बाढ़ की संभावनाओं को लेकर हमें और भी अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा से समय रहते निपटा जा सके।