Deoria news: निहाल सिंह हत्याकांड में सक्रिय युवक की हत्या, करणी सेना के आंदोलन में भूमिका का कनेक्शन

Deoria news: निहाल सिंह हत्याकांड में सक्रिय युवक की हत्या, करणी सेना के आंदोलन में भूमिका का कनेक्शन

Deoria news: देवरिया जिले के एकौना थाना क्षेत्र के होली बलिया गांव में शनिवार रात को एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक युवक की पहचान विशाल सिंह के रूप में हुई है, जो करणी सेना के आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल था। यह घटना करणी सेना के कार्यकर्ताओं में गुस्से और इलाके में तनाव का कारण बन गई है। विशाल सिंह की हत्या के पीछे करणी सेना के आंदोलन में उसकी भूमिका को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन घटना की जांच में जुटा हुआ है और दोषियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है।

घटना का विवरण:

शनिवार रात करीब 9 बजे, विशाल सिंह को किसी ने फोन कर घर से बाहर बुलाया। परिवारवालों के मुताबिक, विशाल घर से बाहर निकलने के बाद रुद्रपुर करहकोल रोड के पास घायल अवस्था में पड़ा हुआ मिला। उसका शरीर खून से सना हुआ था और उसने अपनी अंतिम सांसें गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में लीं। डॉक्टरों ने बताया कि विशाल को गोली मारी गई थी, जो उसके सीने में लगी थी और उसकी मृत्यु का कारण बनी।

करणी सेना के आंदोलन में सक्रियता:

विशाल सिंह करणी सेना के आंदोलन में बहुत ही सक्रिय था और वह निहाल सिंह हत्याकांड के दोषियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे आंदोलन का हिस्सा था। वह लगातार निहाल सिंह के परिजनों के संपर्क में था और उनके लिए न्याय की आवाज बुलंद कर रहा था। निहाल सिंह की हत्या के बाद से देवरिया में करणी सेना का यह आंदोलन तीव्र हो गया था, जिसमें विशाल सिंह ने अग्रणी भूमिका निभाई थी।

Deoria news: निहाल सिंह हत्याकांड में सक्रिय युवक की हत्या, करणी सेना के आंदोलन में भूमिका का कनेक्शन

परिवारवालों का बयान:

विशाल सिंह के परिवार ने इस घटना को लेकर शोक व्यक्त किया और हत्या के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। परिवारवालों के अनुसार, विशाल की हत्या के पीछे शायद उसकी आंदोलन में भागीदारी हो सकती है, लेकिन वे किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत विवाद की बात से इनकार कर रहे हैं।

विशाल के छोटे भाई ने कहा, “हमारी समझ से बाहर है कि इस तरह का कदम क्यों उठाया गया। वह एक नेक लड़का था और अपने समुदाय के लिए हमेशा खड़ा रहता था।” परिवारवालों का मानना है कि किसी के द्वारा विशाल को बुलाकर उसकी हत्या करना एक साजिश हो सकती है।

पुलिस की जांच:

पुलिस ने घटना की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपेंद्र चौधरी और क्षेत्राधिकारी अंशुमान श्रीवास्तव ने मौके का निरीक्षण किया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस ने मृतक के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है और उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि विशाल को किसने बुलाया था और क्या विवाद हुआ था।

पुलिस प्रशासन ने यह भी बताया कि यह हत्या करणी सेना के आंदोलन से जुड़ी हो सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा विशाल को फोन करके उसे बाहर बुलाया गया और फिर गोली मारी गई, लेकिन इस हत्या के पीछे का असली कारण क्या है, इसकी जांच जारी है।

करणी सेना का आक्रोश:

इस घटना के बाद करणी सेना के नेताओं ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। करणी सेना के एक नेता ने कहा, “विशाल की हत्या न्याय की आवाज को दबाने के लिए की गई है। यह एक साजिश हो सकती है और पुलिस प्रशासन से हमारी अपील है कि वे दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार करें।” उन्होंने यह भी कहा कि करणी सेना अपने आंदोलन को और तेज करेगी और किसी भी हालत में विशाल के हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस का अलर्ट मोड:

घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। पुलिस ने गांव में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि वे किसी भी तरह की अराजकता को बढ़ने नहीं देंगे और मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं।

विशाल की हत्या ने उठाए सवाल:

विशाल सिंह की हत्या ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह हत्या करणी सेना के आंदोलन में उसकी सक्रियता के कारण हुई, या इसके पीछे कोई व्यक्तिगत विवाद था? क्या यह किसी प्रकार का साजिश थी, जिसमें उसे जानबूझकर बाहर बुलाकर हत्या की गई? पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है और जल्द ही कुछ ठोस जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

विशाल की हत्या ने न केवल उसके परिवार को बल्कि पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। करणी सेना के नेताओं का कहना है कि यह हत्या किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। इलाके में फिलहाल तनाव का माहौल है, लेकिन पुलिस प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। सभी की निगाहें पुलिस की जांच और दोषियों की गिरफ्तारी पर टिकी हुई हैं।

विशाल की मौत ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या आंदोलन और सामाजिक कार्यों में सक्रियता एक व्यक्ति की जान के लिए खतरा बन सकती है। समाज और पुलिस प्रशासन के लिए यह एक गंभीर चुनौती है, जहां आंदोलन और न्याय की मांग के रास्ते पर हिंसा का यह दौर न बढ़े।

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