लखनऊ में पुलिस हिरासत में युवक अमन गौतम की मौत के मामले ने राजनीतिक गर्माहट पैदा कर दी है। कांग्रेस राज्य अध्यक्ष Ajay Rai ने मृतक के परिवार से मुलाकात की और सरकार से पीड़ित परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ धारा 302 के तहत मामला दर्ज होना चाहिए।
पुलिस हिरासत में हुई मौत का मामला
24 वर्षीय अमन गौतम की मौत के मामले में लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। स्थानीय लोग और परिवार वाले इस घटना के विरोध में सड़कों पर उतरे हैं। शनिवार की शाम से शुरू हुआ जाम-प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। जब परिवार और स्थानीय लोग पुलिस की समझाने की कोशिशों को नहीं मान रहे थे, तब पुलिस ने लाठीचार्ज कर सभी को खदेड़ दिया।
इस घटना से नाराज परिवार ने शव को मोर्चरी से लेने से इंकार कर दिया। पुलिस ने तुरंत चार PRV पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया और आश्वासन दिया कि इस मामले में कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने परिवार को सरकार और प्रशासन को उनके मांगों के बारे में अवगत कराने का आश्वासन भी दिया। इसके बाद, परिवार ने रविवार की शाम लगभग 5 बजे शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए मान लिया।
अमन गौतम की गिरफ्तारी और मौत की कहानी
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार की रात विकासनगर सेक्टर-8 में जुआ खेलने की सूचना मिलने पर अमन गौतम और उसके दोस्त सोनू को पार्क के पास से गिरफ्तार किया गया। दोनों को पुलिस की गाड़ी में बिठाया गया, जहां अमन की हालत कुछ ही मिनटों में बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और परिवार का विरोध
पुलिस अधिकारियों ने मृतक के परिवार को समझाने की कोशिश की, लेकिन लोग सुनने को तैयार नहीं थे। रात के लगभग 2 बजे पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे लोग भाग खड़े हुए। रविवार सुबह पुलिस ने अमन के घर जाकर शव को अंतिम संस्कार करने का कहा, लेकिन परिवार अपने निर्णय पर अड़ा रहा।
इस बीच, पुलिस ने कांस्टेबल शैलेंद्र और तीन अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया और इसके बारे में जानकारी दी। कई घंटों की समझाईश के बाद, परिवार ने शव के अंतिम संस्कार के लिए सहमति व्यक्त की।
कांग्रेस अध्यक्ष का समर्थन
कांग्रेस अध्यक्ष Ajay Rai ने मृतक के परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और इस मामले में उनकी मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले की गंभीरता को समझना चाहिए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा प्रदान करना चाहिए। राय ने कहा, “हम इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाएंगे और न्याय के लिए लड़ेंगे।”
इस दौरान, एसपी सांसद आरके चौधरी और अनुराग भदौरिया ने भी परिवार से मुलाकात की और उन्हें 2 लाख रुपये की सहायता का चेक दिया। इस सहायता राशि को देखकर परिवार ने कुछ राहत महसूस की, लेकिन फिर भी न्याय की मांग में कोई कमी नहीं आई।
पुलिस हिरासत में मौत पर उठते सवाल
पुलिस हिरासत में मौत का मामला हमेशा से विवाद का विषय रहा है। यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस हिरासत में रखे गए लोगों के साथ उचित व्यवहार किया जा रहा है? क्या पुलिस द्वारा उठाए गए कदम सही हैं? अमन गौतम की मौत ने इन सभी सवालों को एक बार फिर से सामने ला दिया है।
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करें और यह सुनिश्चित करें कि ऐसा फिर से न हो। पुलिस को भी अपने कार्यों में अधिक संवेदनशीलता बरतनी चाहिए और मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए।