Campierganj: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट अब उन महिलाओं को धमका रहे हैं जिन्होंने ऋण लिया है। ये एजेंट महिलाओं को चेतावनी दे रहे हैं कि यदि उन्होंने ऋण का भुगतान नहीं किया, तो उनकी सरकारी सुविधाएँ रद्द कर दी जाएंगी। महिलाएं कह रही हैं कि एजेंट उन्हें धमका रहे हैं कि उनके आधार कार्ड और राशन कार्ड रद्द कर दिए जाएंगे, और वे सब कुछ खो देंगे।
सोमवार को रिगौली गांव में ऋण लेने वाली महिलाओं की एक सभा हुई। इनमें से एक महिला कुशमावती ने कहा, “मेरी और मेरी बहु की जेवर भी बिक चुके हैं। मैं ऋण कैसे चुकाऊं? वे इतनी ब्याज वसूल रहे हैं कि यह खत्म नहीं हो रहा। अब वित्त कंपनी के लोग धमका रहे हैं कि यदि ऋण नहीं चुकाया तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।”
महिलाओं का संघर्ष
जमीरा नाम की एक अन्य महिला ने बताया, “जेवर बिक चुके हैं और अब घर बेचना पड़ सकता है। हर दिन वित्त कंपनी के लोग धमकी दे रहे हैं कि ऋण और ब्याज चुकाना पड़ेगा, वरना घर को जब्त कर लिया जाएगा।” अवसरी खातून ने कहा कि पहले उन्होंने दो माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से ऋण लिया था। ब्याज इतना ज्यादा है कि वह चुकता नहीं कर पा रही हैं।
वह बताती हैं, “ऋण चुकाने के लिए मैंने और भी वित्त कंपनियों से ऋण लिया। दो लाख रुपये का ऋण अब सात लाख रुपये हो गया है। मुझे कुछ ज़मीन और जेवर भी बेचने पड़े। इसके बाद मैंने बकरियां भी बेच दीं, लेकिन अब वे कह रहे हैं कि दो लाख रुपये अभी भी बकाया हैं।”
खुद को बचाने की कोशिश
मनु, नजीबुल, आरती, पूनम, सिंगिता, दुर्गावती, कुसुम और नीलम जैसे कई महिलाएं इसी गांव से हैं, जिन्होंने 24 प्रतिशत ब्याज पर ऋण लिया है। एक ब्याज चुकाने के लिए उन्होंने दूसरी और फिर तीसरी वित्त कंपनी से ऋण लिया। ऋण लेना आसान था, बिना किसी दस्तावेज के। अब वे घरेलू सामान बेचकर ऋण चुका रही हैं।
इंद्रावती, जो देवकली गांव की रहने वाली हैं, ने भी स्वयं सहायता समूह के माध्यम से माइक्रो फाइनेंस कंपनी से ऋण लिया था। अब वह अपने पति राजमंगल के साथ कुछ दिनों के लिए गांव छोड़ चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने लगभग 1.5 लाख रुपये का ऋण लिया था, लेकिन ब्याज बढ़ता गया और वे चुकता नहीं कर पा रहे थे। जब माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी घर आए और उन्हें परेशान किया, तो वे घर छोड़कर कहीं और चले गए।
सरकारी नीतियों की कमी
इन महिलाओं के संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी नीतियों और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली में बड़ी खामियां हैं। जहां एक ओर सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर ये माइक्रो फाइनेंस कंपनियां उनके लिए मुसीबत बन गई हैं।
ब्याज की इतनी उच्च दरें और दवाब डालने वाली नीतियाँ महिलाओं को और भी कमजोर कर रही हैं। इन कंपनियों द्वारा की जाने वाली अव्यवस्थाएँ सरकार के विकास के लक्ष्यों के खिलाफ जाती हैं।
कानून की अवहेलना
इन घटनाओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट कैसे कानून की अवहेलना कर रहे हैं। महिलाओं को डराने-धमकाने और उन्हें अपने अधिकारों से वंचित करने के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है।
स्थानीय अधिकारियों को इस स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
समुदाय की आवाज़
ग्रामीणों ने इस विषय पर चिंता जताई है और प्रशासन से मांग की है कि इस तरह की गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “हम इन महिलाओं के लिए न्याय की मांग करते हैं। इन वित्त कंपनियों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों की जांच होनी चाहिए। हमें एक सुरक्षित और समर्थ समाज की आवश्यकता है।”
इन महिलाओं के साहस और संघर्ष की कहानियाँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि कैसे समाज में अधिक जागरूकता और सुरक्षा की आवश्यकता है। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों को उनके प्रथाओं में सुधार करना चाहिए और महिलाओं को डराने-धमकाने की बजाय उन्हें समर्थन प्रदान करना चाहिए।
महिलाओं को एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने की आवश्यकता है ताकि वे अपनी समस्याओं को सामने ला सकें। यदि इस प्रकार की गतिविधियों पर कड़ी नजर नहीं रखी गई, तो यह न केवल महिलाओं के लिए बल्कि समग्र समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
इस मामले में यदि प्रशासन और स्थानीय संगठनों ने जल्दी से कदम नहीं उठाए, तो न केवल ये महिलाएं, बल्कि पूरा समुदाय प्रभावित होगा। समय आ गया है कि हम सब मिलकर इस समस्या का समाधान करें और उन महिलाओं को सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान करें जिनका हक और सम्मान भंग हो रहा है।