Basti News: प्रशासन की लापरवाही के चलते इस बार दीवाली पर पटाखों को लेकर सुरक्षा के कोई विशेष उपाय नहीं किए गए हैं। जबकि पटाखा विक्रेताओं ने आवासीय इलाकों और घरों में बारूद के टनों भंडारण कर रखा है। इसका ताजा उदाहरण शुक्रवार रात लालगंज बाजार के एक आवासीय क्षेत्र में छापेमारी के दौरान मिले पटाखों का बड़ा भंडार है।
यह बताया जा रहा है कि विक्रेताओं ने इसी तरह कई स्थानों पर विस्फोटक सामग्री का भंडारण किया हुआ है। लोग चिंतित हैं कि कहीं 22 साल पहले रुधौली के चुड़ीहार मोहल्ले में हुए हादसे जैसी कोई दुर्घटना फिर से न हो जाए। रुधौली के गांधीनगर वार्ड के चुड़ीहार मोहल्ले के लोग हर साल दीवाली के आते ही उस भयानक हादसे को याद कर डर जाते हैं, जो करीब 22 साल पहले हुआ था।
22 साल पहले का दर्दनाक हादसा
साल 2003 की उस भयावह घटना का जिक्र करते हुए स्थानीय लोग बताते हैं कि उस वक्त दीवाली के दौरान कुछ लोग रुधौली के चुड़ीहार मोहल्ले में पटाखे बनाते थे। हादसे वाले दिन हलौर बाजार के कुछ लोग अपने घर में पटाखे बना रहे थे, जब एक बड़े विस्फोट ने पूरे इलाके को हिला दिया। इस दुर्घटना में शब्बीर अहमद, रामदीन, सुभाध पाशी और उनकी आठ साल की बेटी की जान चली गई थी।
इस हादसे के बाद इलाके के लोग हर साल दीवाली के समय पटाखों से जुड़ी संभावित दुर्घटनाओं को लेकर भयभीत रहते हैं। चुड़ीहार मोहल्ले के निवासियों का कहना है कि उस समय भी प्रशासन की तरफ से कोई सख्त निगरानी नहीं थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
प्रशासनिक स्तर पर निरीक्षण की कमी
रुधौली थाना क्षेत्र में प्रशासन ने अब तक सिर्फ दो लोगों को बारूद रखने का लाइसेंस जारी किया है। इनमें नगर पंचायत के दो लोगों को 15 किलो बारूद रखने की अनुमति दी गई है, जिनकी समय-समय पर जांच भी की जाती है। लेकिन इन चंद लाइसेंसधारकों के अलावा अन्य कई लोग अवैध रूप से भारी मात्रा में बारूद और पटाखों का भंडारण कर रहे हैं।
थाना प्रभारी चंदन कुमार ने बताया कि 10 अक्टूबर को लाइसेंसधारक फारिदा खातून, पत्नी फैजुलरहमान, और अफरीन, पत्नी फिरोज, निवासी गांधीनगर, रुधौली का भंडारण स्थल और स्टॉक का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान भंडारण और गोदाम संतोषजनक पाए गए थे।
हालांकि, पटाखों के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया अभी प्रशासनिक स्तर पर शुरू नहीं हुई है, फिर भी व्यापारी अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। दुर्गा पूजा और दशहरे के दौरान व्यापारी पिछले साल बचे हुए रॉकेट, बम, गोले आदि को गोदामों से निकालकर बेच चुके हैं, और नए पटाखों के भंडारण के लिए ऑर्डर और बुकिंग की जा चुकी है।
बड़े शहरों से पटाखों की हो रही आपूर्ति
सूत्रों के अनुसार, पटाखों की आधी से ज्यादा खेप पहले ही आ चुकी है। बड़े शहरों जैसे लखनऊ, दिल्ली, कानपुर से फुलझड़ी, चमकदार ग्रेनेड, 10, 12, 15 स्टार, अनार, जलेबी, रॉकेट, बम, मट्टी आदि के नाम पर पटाखों की आपूर्ति हो रही है। ये सभी पटाखे और विस्फोटक सामग्री आवासीय इलाकों और गोदामों में बिना किसी जांच के जमा किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोग चिंतित हैं कि कहीं यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण न बन जाए। पटाखों के साथ-साथ इन विस्फोटक सामग्रियों का भंडारण दुर्घटनाओं की संभावना को और भी बढ़ा देता है।
अग्निशमन विभाग की तैयारी
मुख्य अग्निशमन अधिकारी यतींद्र नाथ ने बताया कि जिले के सभी पटाखा लाइसेंसधारियों के गोदामों और शो रूम का 21 से 31 अगस्त तक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि हर जगह अग्नि सुरक्षा के उपाय किए गए हैं और आग बुझाने के उपकरण सक्रिय स्थिति में हैं।
हालांकि, जिन विक्रेताओं के पास पटाखों का लाइसेंस नहीं है, उनके गोदामों और दुकानों पर कोई ठोस निरीक्षण नहीं किया गया। यह लापरवाही कहीं न कहीं प्रशासन की विफलता को दर्शाती है।
अवैध भंडारण पर उठ रहे सवाल
बस्ती जिले के लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर प्रशासन अवैध भंडारण को क्यों नजरअंदाज कर रहा है? पटाखों और विस्फोटकों के भंडारण के लिए तय किए गए नियमों का पालन न होना एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
पटाखों का भंडारण नियमों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों से दूर, सुरक्षित स्थानों पर होना चाहिए, लेकिन वर्तमान हालात इसके ठीक उलट हैं। लालगंज में हुए छापे के दौरान जो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई, उसने प्रशासन की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
पुराने हादसों की याद ताजा
रुधौली के चुड़ीहार मोहल्ले के निवासी बताते हैं कि हर साल दीवाली के आते ही 22 साल पहले हुए हादसे की याद ताजा हो जाती है। उस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था।
गांधीनगर वार्ड के निवासी राधेश्याम यादव ने बताया, “हमें अब भी उस दिन की याद आते ही डर लगता है। जब हम सुनते हैं कि घरों में पटाखों और बारूद का भंडारण किया जा रहा है, तो हमें हमेशा एक अनहोनी की चिंता सताती रहती है।”
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोग अब प्रशासन से इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पटाखों का भंडारण करने वालों पर नजर रखी जाए और आवासीय क्षेत्रों में विस्फोटक सामग्री जमा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।