Basti News: रिटायर्ड कर्मचारी और पेंशनर्स एसोसिएशन के आह्वान पर, मंगलवार को बस्ती में एक बड़ा धरना आयोजित किया गया। इस धरने का नेतृत्व एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र बहादुर उपाध्याय ने किया। रिटायर्ड कर्मचारियों और पेंशनर्स ने कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना दिया और महंगाई भत्ते की मांग की।
महंगाई भत्ते की पृष्ठभूमि
धरने के दौरान, रिटायर्ड कर्मचारियों ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से पेंशनर्स को मिलने वाले 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते की किस्त अभी तक जारी नहीं की गई है। इस मुद्दे को लेकर कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। धरना समाप्त होने के बाद, एसोसिएशन के सदस्यों ने उप जिलाधिकारी सदर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
धरने का उद्देश्य
धरने का मुख्य उद्देश्य रिटायर्ड कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करना था। धरने में शामिल रिटायर्ड कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को उजागर करते हुए कहा कि अगर महंगाई भत्ते की किस्त जारी नहीं होती है, तो वे और भी अधिक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
सरकारी आदेश का अभाव
धरने के बाद, अध्यक्ष नरेंद्र बहादुर उपाध्याय और मंत्री उदय प्रताप पाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पेंशनर्स को मिलने वाले महंगाई भत्ते की किस्त का न जारी होना साफ तौर पर रिटायर्ड कर्मचारियों के प्रति भेदभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस कारण से रिटायर्ड कर्मचारियों की दीवाली मनाने में भी कमी आई है।
मंत्री का बयान
मंत्री उदय प्रताप पाल ने कहा, “महंगाई भत्ते की इस किस्त का न दिया जाना रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ भेदभाव को दिखाता है। इसने उनकी दीवाली को सुस्त बना दिया है। हम मांग करते हैं कि महंगाई भत्ते के लिए तुरंत सरकार का आदेश जारी किया जाए, अन्यथा रिटायर्ड कर्मचारियों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
धरने में शामिल नेता
इस धरने में कई प्रमुख नेता और रिटायर्ड कर्मचारी शामिल हुए। उनमें शामिल थे: प्रेमशंकर लाल श्रीवास्तव, चंद्र प्रकाश पांडे, सुरेशधर डब्बे, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, एसके नंदन, जयनाथ सिंह, दिनेश चंद्र पांडे, राधेश्याम तिवारी, रामचंद्र शुक्ल, उमेश चंद्र श्रीवास्तव और मंगल देव शुक्ल आदि।
भविष्य की योजना
रिटायर्ड कर्मचारियों ने यह तय किया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे और भी बड़े आंदोलन की योजना बनाएंगे। उनके अनुसार, सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान तुरंत करना चाहिए, ताकि रिटायर्ड कर्मचारी भी सम्मान के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकें।
रिटायर्ड कर्मचारियों की स्थिति
रिटायर्ड कर्मचारियों की स्थिति पर विचार करें तो यह स्पष्ट होता है कि वे भी अपनी सेवा के दौरान देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर चुके हैं। उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता, और अब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वे उन्हें उचित सम्मान और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करें।
धरने का परिणाम
धरने के आयोजन ने बस्ती में रिटायर्ड कर्मचारियों की आवाज को उठाने का काम किया है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि वे अपनी मांगों के लिए एकजुट हैं और किसी भी स्थिति में अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं।
बस्ती में रिटायर्ड कर्मचारियों का यह धरना एक महत्वपूर्ण घटना है, जो यह दिखाता है कि समाज में हर वर्ग की आवाज महत्वपूर्ण होती है। सरकार को चाहिए कि वे इस धरने से सीख लेकर रिटायर्ड कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करें। महंगाई भत्ते की किस्त का भुगतान न होना एक गंभीर मुद्दा है, और इसे तुरंत सुलझाने की आवश्यकता है।
आशा है कि सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी और रिटायर्ड कर्मचारियों को उनके अधिकार और सम्मान प्रदान करेगी।