Basti News: बस्ती जिले में एक दुष्कर्म पीड़िता को 2019 में जन सेवा केंद्र में फोटो कॉपी कराने गई थी, वहां की गई बुरी घटना के बाद मेडिकल जांच करवाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को वह जिला महिला अस्पताल से लौट गई, जिसके बाद मामला DM रविश गुप्ता तक पहुंच गया।
घटना का विवरण
पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब वह महिला अस्पताल में मेडिकल के लिए गई थी, तो वहां उसे ठीक से नहीं देखा गया। अस्पताल के स्टाफ ने उसे ऐसे सवाल पूछे, जिससे वह असहज महसूस कर रही थी। अब उसे सोमवार को फिर से बुलाया गया है।
पीड़िता, जो लालगंज थाने के क्षेत्र से है, ने 2019 में एक दुकान पर जाकर फोटो कॉपी कराने की कोशिश की थी। वहां, दुकान के अंदर हीटर जल रहा था। दुकानदार ने उसे अंदर बुलाया और कहा कि “बहुत ठंड है, अपने हाथ गर्म करो।” इसके बाद उसने चाय लाकर पीने को दी, जिसमें उसने नशे की चीज मिलाई थी।
घटना की गंभीरता
जब पीड़िता ने चाय पी, तो वह बेहोश हो गई। इसके बाद, आरोप है कि दुकानदार और उसके दो दोस्तों ने उसका दुष्कर्म किया। उन्होंने इस घटना का वीडियो बनाया और उसे ब्लैकमेल करने लगे। इस मामले में एक सप्ताह पहले लालगंज थाने में केस दर्ज किया गया था।
अब जब उसकी मेडिकल जांच होनी है, तो उसे अस्पताल में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। CO संजय सिंह ने पुष्टि की है कि उसकी मेडिकल जांच सोमवार को की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में कमी
यह घटना स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में कमियों को उजागर करती है। जब एक पीड़िता को मेडिकल जांच के दौरान असहज महसूस कराना एक गंभीर मुद्दा है। इस तरह के सवाल न केवल पीड़ित को मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं, बल्कि न्याय की प्रक्रिया को भी बाधित करते हैं।
DM को दी गई शिकायत
DM रविश गुप्ता ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से बात करने का आश्वासन दिया है और कहा है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।
पीड़िता के लिए सहारा
पीड़िता को मानसिक और भावनात्मक सहारे की जरूरत है। दुष्कर्म जैसे मामलों में पीड़िता को सुरक्षा और समर्थन प्रदान करना बहुत आवश्यक है। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसी पीड़िताओं की आवाज सुने और उनके साथ सहानुभूति पूर्वक व्यवहार करे।
न्याय की आवश्यकता
यह घटना यह दर्शाती है कि हमारे समाज में दुष्कर्म पीड़िताओं को न्याय दिलाना कितना महत्वपूर्ण है। उन्हें न केवल कानूनी सहायता की आवश्यकता होती है, बल्कि उनके साथ मानवीय तरीके से व्यवहार किया जाना चाहिए।