Basti News: दीपावली के दौरान पटाखों से उड़ी धुंआन का असर अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ था कि छठ पूजा के दौरान पटाखों के शोर और धुंआ ने एक बार फिर से प्रदूषण के स्तर को खतरनाक बना दिया है। इसके अलावा, फसलों की पराली जलाने की समस्या ने प्रदूषण को और बढ़ा दिया है, जिससे आम जनता की सांसें रुक सी गई हैं। बस्ती में हालात यह हैं कि प्रदूषण का स्तर अब हानिकारक स्तर तक पहुंच चुका है और अगर पराली जलाने के मामले पर तत्काल काबू नहीं पाया गया, तो यह स्थिति और खराब हो सकती है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 128 पर पहुंचा: स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
गुरुवार को बस्ती में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 128 दर्ज किया गया, जो सामान्य स्तर से 28 अंक अधिक है। यह स्थिति यह संकेत देती है कि प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है और यह नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पराली जलाने के मामले पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो हवा की गुणवत्ता और खराब होती जाएगी।
विशेषज्ञों की चेतावनी: प्रदूषण कम करने के लिए आवश्यक कदम
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक AQI लगभग 100 के आसपास नहीं आ जाता, तब तक शुद्ध हवा में सांस लेना मुश्किल होगा। सामान्य लोग खुले स्थानों पर सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं, जबकि अस्थमा के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। इस स्थिति में, प्रदूषण को कम करने के लिए सभी को जागरूक होना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक और टायर जलाने जैसी गतिविधियों से बचना भी आवश्यक है, क्योंकि इनसे प्रदूषण और बढ़ता है।
पर्यावरणविद् अरविंद सिंह ने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम प्लास्टिक और टायर जैसी चीजों को जलाकर हवा को और प्रदूषित न करें। जब तक हम अपने कदम नहीं उठाएंगे, तब तक प्रदूषण कम नहीं होगा।”
मौसम विशेषज्ञों का कहना है: वातावरण में नमी बढ़ने से प्रदूषण का असर अधिक
नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि वातावरण में नमी के कारण, वायु प्रदूषक कणों का आकार बड़ा हो गया है। इससे हवा में एक परत बन रही है, जो प्रदूषण की घनता को और बढ़ा रही है। इस बढ़ी हुई घनता के कारण वायुमंडल में दृष्टि की समस्या पैदा हो रही है और यह सांस लेने में भी कठिनाई का कारण बन रहा है।
डॉ. मिश्रा ने कहा, “इस समय, प्रदूषण को नियंत्रित करना और भी कठिन हो गया है क्योंकि वायु में नमी के कारण प्रदूषक कणों का आकार बड़ा हो गया है और उनकी घनता बढ़ गई है। यह एक और चुनौती बनकर सामने आ रही है।”
किसानों की समस्या: पराली जलाने की मजबूरी
वहीं, किसानों का कहना है कि फसल कटाई के बाद खेतों में बचे हुए अवशेषों को जलाना एक मजबूरी बन चुका है। प्रगतिशील किसान इंद्रजीत सिंह ने बताया, “अगर फसल कटाई के समय पराली खेतों में छोड़ दी जाती है, तो अगली फसल के लिए खेतों की जुताई नहीं हो सकती। जिन किसानों के खेतों में अधिक नमी होती है, उन्हें मिट्टी सुखाने के लिए मजबूरन पराली जलानी पड़ती है।”
किसानों के लिए यह समस्या इसलिए भी जटिल है क्योंकि उन्हें अगली फसल के लिए खेत की तैयारी करनी होती है, और पराली जलाने के बिना यह काम पूरा नहीं हो सकता। हालांकि, किसानों की यह समस्या पर्यावरणीय दृष्टिकोण से घातक साबित हो रही है, क्योंकि इससे होने वाले प्रदूषण का असर दूरगामी हो सकता है।
क्या हैं समाधान?
किसान और विशेषज्ञ दोनों इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पराली जलाने के बजाय अन्य तरीकों से इसे निपटाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पराली को जलाने की बजाय उसे खाद बनाने में बदला जा सकता है। इसके अलावा, सरकार को इस दिशा में जागरूकता अभियान चलाना होगा और किसानों को प्रोत्साहित करना होगा कि वे पराली जलाने के बजाय पर्यावरण-friendly उपायों का पालन करें।
सरकार की जिम्मेदारी: पराली जलाने पर रोक और जागरूकता अभियान
सरकार को भी इस गंभीर समस्या को हल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए, पर्यावरण विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों को पराली जलाने के बजाय अन्य विकल्पों के बारे में बताया जाए। इसके लिए सरकार को फसलों के अवशेषों से निपटने के लिए और अधिक सुलभ तकनीकें और उपकरण उपलब्ध कराने होंगे।
अंत में, प्रदूषण से बचने के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा। पर्यावरणीय संकट का सामना करने के लिए केवल सरकारी उपाय ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी जरूरी है। जब तक लोग अपने कृत्यों में बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक प्रदूषण की स्थिति और खराब होती जाएगी।
बस्ती में बढ़ते प्रदूषण के कारण अब तक के हालात बहुत गंभीर हो चुके हैं। दीपावली और छठ पूजा के दौरान पटाखों से उत्पन्न प्रदूषण और किसानों द्वारा पराली जलाने से वायु गुणवत्ता और भी खराब हो गई है। विशेषज्ञों की चेतावनी यह है कि यदि जल्द ही इन समस्याओं पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ सकती है। सरकार, किसानों और आम जनता को मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठाने होंगे, ताकि आने वाले दिनों में साफ और स्वस्थ वायु में सांस लिया जा सके।