Basti News: छठ महापर्व के अवसर पर, बस्ती जिले के लालगंज बाजार स्थित मनवर-कुआनो संगम तट और विष्णु घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान उपवास रखी महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपने पति, पुत्र और परिवार की सुख-समृद्धि, समृद्धि, और स्वास्थ्य की कामना की। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं द्वारा बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है, और इसका धार्मिक, सांस्कृतिक महत्व भी अत्यधिक है।
सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा
गौरतलब है कि छठ महापर्व के दूसरे दिन, उपवास रखने वाली महिलाओं ने सूर्य को अस्ताचल के समय अर्घ्य अर्पित किया। यह मान्यता है कि इस व्रत को रखने वाली महिलाओं का जीवन सुखमय होता है, उन्हें समृद्धि, संतान सुख और पति के अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं कड़ी मेहनत के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य देती हैं, और यह पूजा का अंतिम भाग होता है।
मनवर-कुआनो संगम और विष्णु घाट पर श्रद्धालुओं का तांता
इस दिन मनवर-कुआनो संगम तट और लालगंज बाजार स्थित विष्णु घाट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। यहां दूर-दूर से लोग पहुंचे थे, और विशेषकर महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पारंपरिक गीतों और सोहार गाने के साथ संगम तट की ओर रुख किया। इस दिन की विशेषता यह थी कि श्रद्धालु बेहद श्रद्धा भाव से घाट पर पहुंचे और पूरे माहौल में धार्मिक उल्लास और भक्ति का रंग था।
मूल स्थानों से श्रद्धालुओं की आई भीड़
लालगंज बाजार के अलावा आसपास के गांवों जैसे बारीघाट, बर्तानिया, गौरा, चौबहा अमैपार, लोहिा भारी खुर्द, लोहिा भारी काला आदि से बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष इस पूजा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। इन सभी ने एकजुट होकर मनवर-कुआनो संगम तट पर पूजा अर्चना की और सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित किया। श्रद्धालुओं ने दिनभर एक-दूसरे से मिलकर सोहार गीत गाए और अपने इष्ट देवता से आशीर्वाद प्राप्त करने की कोशिश की।
महिलाओं की श्रद्धा और समर्पण
कहा जाता है कि छठ पूजा में शामिल होने वाली महिलाएं अपनी कड़ी तपस्या और संघर्ष से इस पर्व को पूरी श्रद्धा से मनाती हैं। दिनभर उपवास रखकर वे सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित करती हैं, जो उनके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं इस अवसर पर न केवल अपने परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की खुशहाली के लिए भी कामना करती हैं।
स्थानीय नेताओं और गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस धार्मिक अवसर पर स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उपस्थिति दर्ज की। मनवर-कुआनो संगम तट पर विंरेंद्र कुमार बाबलू, गोस्वामी कुमकुम भारती, ज्ञानचंद अग्रहरी, अनुराग पाल राजन, फूलचंद पटेल, ओमप्रकाश अग्रहरी, किशनलाल अग्रहरी आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इन लोगों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और छठ पूजा की धार्मिक महत्ता को सराहा।
गांवों में छठ पूजा का महत्व
इस पर्व का सबसे विशेष पहलू यह है कि यह न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक भी है। गांवों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिलता है। महिलाएं एकजुट होकर एक साथ पूजा करती हैं, और इस दौरान सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक बनता है। पूरे गांव का वातावरण धार्मिक भक्ति में रंग जाता है, और परिवारों के सदस्य एक-दूसरे के साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं।
सांस्कृतिक महत्व और धार्मिक आस्था
छठ महापर्व के अवसर पर लोगों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिलता है। यह पर्व सूर्य देवता की उपासना का पर्व है, जो भारत की प्राचीन संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व न केवल महिलाओं द्वारा मनाया जाता है, बल्कि पुरुषों द्वारा भी इसमें भाग लिया जाता है, जो पूरे परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
समाप्ति पर श्रद्धालुओं की दुआओं का असर
इस दिन का अंत बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ होता है। सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित करने के बाद, महिलाएं और पुरुष एक-दूसरे से मिलते हैं और एक-दूसरे को आशीर्वाद देते हैं। उनके द्वारा की गई प्रार्थनाओं का असर अगले साल तक रहता है, और यह माना जाता है कि जिन परिवारों में छठ पूजा पूरी श्रद्धा से की जाती है, उनके जीवन में समृद्धि और सुख की बरसात होती है।
लालगंज और आसपास के क्षेत्रों में छठ महापर्व का आयोजन एक बहुत ही भव्य और श्रद्धा से भरा होता है। मनवर-कुआनो संगम तट और विष्णु घाट पर आयोजित इस पूजा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और विश्वास के साथ सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित किया। यह पर्व न केवल धार्मिक है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगले वर्ष इस पर्व को और भव्य रूप से मनाने के लिए श्रद्धालु अपनी पूरी तैयारी करेंगे और एकजुट होकर इसे मनाने की परंपरा को जारी रखेंगे।