Gorakhpur में शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान में रंग-बिरंगी तितलियों का आगमन, वातावरण में बदलाव

Gorakhpur में शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान में रंग-बिरंगी तितलियों का आगमन, वातावरण में बदलाव

Gorakhpur के शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान (जू) में ठंडे मौसम के साथ ही रंग-बिरंगी तितलियाँ दिखाई देने लगी हैं। ताजे फूलों और ताजगी से भरी हवा में इन तितलियों का आना उद्यान के वातावरण में नया रंग भरने जैसा है। खास बात यह है कि इन तितलियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, और इसके पीछे एक बड़ी वजह है उद्यान के पौधों पर रासायनिक पदार्थों का न उपयोग करना।

तितलियों के लिए विशेष घर का निर्माण

जू के प्रशासन ने तितलियों के रहने के लिए विशेष रूप से एक “बटरफ्लाई हाउस” बनाने का निर्णय लिया था। पहले यह घर पूरी तरह से बंद था, जिससे तितलियाँ इसमें नहीं रुक पा रही थीं। तितलियाँ ठंडे मौसम को पसंद करती हैं, लेकिन गर्मी के कारण यह घर उनके लिए अनुकूल नहीं था। इसके बाद, एक समिति का गठन किया गया, जिसने इस घर को खोलने और ताजे पौधे लगाने की सिफारिश की। इसके परिणामस्वरूप, बड़ी खिड़कियाँ खोल दी गईं और एक एग्जॉस्ट सिस्टम भी लगाया गया, जिससे गर्मी बाहर निकल सके।

अब, तितलियाँ नए पौधों पर बैठने लगी हैं, हालांकि अभी भी पौधे छोटे हैं और उनमें फूल नहीं खिले हैं। इस कारण तितलियाँ अन्य फूलों पर बैठ रही हैं जो उद्यान में लगे हुए हैं। उद्यान प्रशासन का कहना है कि बटरफ्लाई हाउस का उद्घाटन जल्द ही किया जाएगा और इसे फिर से आगंतुकों के लिए खोला जाएगा।

Gorakhpur में शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान में रंग-बिरंगी तितलियों का आगमन, वातावरण में बदलाव

रासायनिक पदार्थों का न उपयोग

जू के मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि उद्यान के पौधों पर किसी भी प्रकार के रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है। यह ध्यान रखा जाता है कि घास की सफाई भी काटने की मशीन से की जाए, ताकि कोई रासायनिक तत्व पौधों में न पहुंचे। उनका मानना है कि तितलियाँ मिठे पौधों को पसंद करती हैं, खासकर उन पौधों को जो फूल, फल और पत्तियाँ देते हैं।

पौधों की विविधता और तितलियों की पसंद

डॉ. योगेश ने बताया कि बटरफ्लाई हाउस और उद्यान परिसर में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए हैं, जिनमें कॉसमॉस, चंपा, गुलाब, चिड़ीया का पौधा, जीनिया, सूरजमुखी, बोगनविलिया, डहलिया आदि शामिल हैं। ये पौधे तितलियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं। इन पौधों के माध्यम से उद्यान में तितलियों की एक नई प्रजाति का आगमन हुआ है, जो पहले कभी यहां नहीं देखी गई थीं।

उद्यान में पाई जाने वाली तितलियाँ

अब तक शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान में कई प्रकार की तितलियाँ देखी जा चुकी हैं। इनमें आम लाइम, कॉमन मार्मन, कॉमन इमीग्रेंट, लैट्ज सल्मन अरब, स्मॉल सल्मन अरब, चॉकलेट पैंसी, कॉमन क्रो जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं। इसके अलावा, स्वैलो-टेल्स, व्हाइट्स और येलोज, ब्रश-फुटेड बटरफ्लाइज़, ब्लूज़ और स्किपर्स जैसी तितलियाँ भी यहां देखी जाती हैं।

पक्षियों और अन्य जीवों के साथ सह-जीवित तितलियाँ

तितलियाँ न केवल सुंदरता का प्रतीक हैं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। वे पौधों की पत्तियों, फूलों, और फलों से पोषण प्राप्त करती हैं, और साथ ही साथ अन्य जीवों के लिए भोजन का स्रोत भी बनती हैं। तितलियाँ परागण (pollination) की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे आसपास के पौधों की वृद्धि में मदद मिलती है।

इस समय गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान में तितलियों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि यह स्थान जैव विविधता को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए एक आदर्श बन चुका है। यह उदाहरण सभी को यह समझने की प्रेरणा देता है कि यदि हम अपने पर्यावरण की देखभाल करें और उसे रासायनिक प्रदूषण से बचाएं, तो हम प्रकृति के अन्य जीवों, जैसे तितलियों, को सुरक्षित और खुशहाल जीवन प्रदान कर सकते हैं।

तितलियों की बढ़ती संख्या से जुड़े फायदे

तितलियों की बढ़ती संख्या ने न केवल गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान के वातावरण को संजीवनी दी है, बल्कि यह आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, तितलियों का बढ़ता प्रजनन और उनके द्वारा किए जाने वाले परागण से आसपास के पौधों में उर्वरता बढ़ी है।

यह भी माना जा रहा है कि इस पहल से शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान को पर्यावरण संरक्षण में एक नई दिशा मिल सकती है। तितलियों के आगमन से न केवल जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने और उनके बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक अच्छा माध्यम बन सकता है।

गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान में तितलियों के आगमन ने एक नई शुरुआत की है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, बल्कि यह उद्यान के आकर्षण में भी इजाफा करेगा। यह उदाहरण हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है कि अगर हम अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाएं, तो हम न केवल तितलियों जैसे अद्भुत जीवों को बचा सकते हैं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को भी संतुलित और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं।

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