Gorakhpur : गोरखपुर में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां तीन साल की एक मासूम बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। आरोप है कि निजी अस्पताल की नर्स ने लापरवाही से बच्ची को अधिक डोज का इंजेक्शन दिया, जिससे उसकी जान चली गई। यह घटना न केवल परिवार के लिए एक गहरी चोट बनी, बल्कि पूरे शहर में अस्पतालों में लापरवाही और प्रशासनिक खामियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बच्ची की मौत पर आरोप: अधिक डोज का इंजेक्शन
सुरज चौधरी, जो गोरखपुर के शिवपुर इलाके के रहने वाले हैं, अपनी बेटी लाड़ो को 27 नवंबर को एक निजी अस्पताल में लेकर गए थे। बच्ची की तबियत खराब होने पर डॉक्टर के कहने पर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया था। रविवार सुबह अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स ने लाड़ो को इंजेक्शन दिया, जिसके बाद बच्ची की हालत अचानक बिगड़ने लगी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।
माँ धर्मवती और आंटी माया देवी ने आरोप लगाया है कि नर्स ने लापरवाही से बच्ची को अधिक डोज का इंजेक्शन दिया, जिसके परिणामस्वरूप उसकी जान चली गई। इसके बाद अस्पताल में हंगामा मच गया और परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
डॉक्टर पर आरोप: मामले को दबाने की कोशिश
घटना के बाद लड़की की आंटी ने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर ने मृतक बच्ची के परिवार को पैसे देने का प्रस्ताव दिया, ताकि वे इस मामले को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई न करें। इससे परिवार का गुस्सा और भी बढ़ गया और उन्होंने डॉक्टर की इस कोशिश की कड़ी निंदा की। इस घटनाक्रम ने अस्पताल के ऊपर गंभीर सवाल उठाए हैं, जहां इलाज की बजाय परिवार के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया।
नर्स फरार, पुलिस ने किया मामला दर्ज
घटना के बाद, अस्पताल की स्टाफ नर्स मौके से फरार हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिवार को शांत किया और इस मामले की पूरी जांच का आश्वासन दिया। पुलिस ने कहा है कि इस मामले में कोई भी दोषी नहीं बचेगा और उसे कड़ी सजा दिलवाने के लिए पूरी जांच की जाएगी। फिलहाल नर्स को ढूंढने के प्रयास जारी हैं और पुलिस जल्द ही उसे गिरफ्तार कर सकती है।
बीस साल बाद आई थी लाड़ो, परिवार की खुशियों का हुआ अंत
लाड़ो, जो अपने माता-पिता के लिए बीस साल बाद एक संतान के रूप में घर आई थी, अब इस दुनिया में नहीं रही। परिवार के लिए लाड़ो का जन्म एक बड़े आशीर्वाद से कम नहीं था, लेकिन उसकी अचानक हुई मौत ने परिवार के सारे सपनों को चूर-चूर कर दिया। उसके पिता सुरज और माँ धर्मवती का कहना है कि उनकी जिंदगी में जो एक उम्मीद और खुशी थी, वह अब चली गई है।
लाड़ो की माँ धर्मवती और पिता सुरज इस दर्दनाक घटना के बाद न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जो कुछ हुआ, वह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
निजी अस्पतालों में लापरवाही पर उठे सवाल
यह घटना निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान हो रही लापरवाही को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। लोगों का कहना है कि अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर इतनी लापरवाही क्यों की जाती है? क्या अस्पतालों की प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत नहीं है? निजी अस्पतालों में मरीजों को ज्यादा मुनाफा कमाने की होड़ में इलाज से संबंधित बुनियादी नियमों और प्रक्रिया की अनदेखी की जाती है।
लाड़ो के परिवार का कहना है कि अगर अस्पतालों में बुनियादी नियमों का पालन किया गया होता, तो आज उनकी बेटी जिंदा होती। इससे न केवल इस परिवार का जीवन बर्बाद हुआ है, बल्कि समाज में यह भी संदेश जा रहा है कि इलाज के नाम पर लापरवाही को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल प्रशासन और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते अस्पतालों में सख्त नियम और निगरानी नहीं रखी गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है। समाज के हर वर्ग ने इस मामले में न्याय की उम्मीद जताई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की है।
समाज में विश्वास की कमी
यह घटना गोरखपुर में चिकित्सा व्यवस्था पर उठाए गए सवालों का हिस्सा बन गई है। आम जनता का कहना है कि अस्पतालों में इलाज के लिए जाने के बाद अब वे अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। इलाज के नाम पर सच्चाई से ज्यादा लापरवाही और भ्रष्टाचार का मुद्दा गर्म हो गया है।
अस्पताल प्रशासन का इस मामले पर ध्यान देना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। साथ ही डॉक्टरों और नर्सों के प्रशिक्षण और जिम्मेदारी में भी सुधार की आवश्यकता है।
गोरखपुर में तीन साल की मासूम बच्ची की मौत की घटना ने चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है। यह मामला सिर्फ एक परिवार के दुख का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि हमें अस्पतालों में इलाज के दौरान लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। दोषियों को सजा दिलवाने के लिए परिवार और समाज की ओर से किए गए संघर्ष को अब न्याय की उम्मीद के साथ देखा जा रहा है।