Gorakhpur के बेलघाट क्षेत्र स्थित यूको बैंक की शाहपुर शाखा में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें बैंक के कर्मचारियों पर ग्राहकों के खातों से पैसे निकालने का आरोप लगा है। बैंक के पूर्व प्रमुख कैशियर, कार्यवाहक कैशियर और स्वीपर ने मिलकर ग्राहक अफसाना, अलीमुद्दीन और रहीमुद्दीन के खातों से 3.80 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है। इस मामले में बेलघाट थाने में तीन बैंक कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जब यह बात सामने आई कि 20 से अधिक ग्राहकों के साथ 50 लाख रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की गई, तो एसएसपी ने इस मामले की जांच एसपी साउथ को सौंप दी है।
घटना का विवरण
ग्राहक अफसाना, जो शाहपुर (जिगिन) की निवासी हैं, ने गोरखपुर एसएसपी को शिकायत आवेदन देकर बताया कि उनके खाते से चार अलग-अलग तारीखों पर कुल दो लाख रुपये निकाले गए, जो उनके बिना जानकारी के किए गए थे। इनमें से प्रत्येक तारीख पर 50,000 रुपये की निकासी की गई। 1 अक्टूबर, 16 नवंबर, 27 नवंबर और 29 नवंबर 2024 को यह निकासी हुई। अफसाना का आरोप है कि इन निकासी के दौरान उनके हस्ताक्षर भी फर्जी तरीके से किए गए थे।
इसके अलावा, अफसाना ने बताया कि उनके एक लाख रुपये जमा करने का रसीद कलीम को दिया गया था, लेकिन वह राशि उनके खाते में जमा नहीं की गई। इसके बाद बेलघाट पुलिस ने जांच शुरू की और यह पता चला कि बैंक के प्रमुख कैशियर मोहम्मद कलीम, कार्यवाहक कैशियर प्रेमचंद साहनी और स्वीपर शमीम इस धोखाधड़ी में शामिल थे।
अलीमुद्दीन और रहीमुद्दीन की शिकायत
ग्राहक अलीमुद्दीन ने बताया कि उनके बेटे रहीमुद्दीन का यूको बैंक में जॉइंट अकाउंट है, जिसमें इन कर्मचारियों ने उनकी जानकारी के बिना 1.50 लाख रुपये निकाल लिए। इन कर्मचारियों ने एक रसीद भी दी थी, जिसमें 30 रुपये जमा करने की बात कही गई थी, लेकिन वास्तविकता में वह राशि उनके खाते में जमा नहीं की गई और इसे धोखाधड़ी से हड़प लिया गया।
अलीमुद्दीन और अफसाना की शिकायतों के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है। एसपी (साउथ) जितेंद्र तोमर ने कहा कि फिलहाल दो लोगों की धोखाधड़ी की शिकायत मिली है और मामले की जांच चल रही है। अगर और किसी ग्राहक द्वारा शिकायत की जाती है, तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी और जांच के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
धोखाधड़ी के तरीके
यह घटना यूको बैंक में कर्मचारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी का एक नया उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिसमें बैंक के कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करके ग्राहकों के खातों से पैसे निकालते हैं। अफसाना और अलीमुद्दीन के खातों से रकम की निकासी के दौरान फर्जी हस्ताक्षर और गड़बड़ी से यह साबित होता है कि कर्मचारियों ने धोखाधड़ी की योजना बनाई थी और उसे लागू किया था।
इन आरोपों के तहत तीन कर्मचारियों का नाम सामने आया है: मोहम्मद कलीम, प्रेमचंद साहनी और शमीम। इन कर्मचारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है। इन कर्मचारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी न केवल बैंक के विश्वास को हिलाती है, बल्कि ग्राहकों के पैसे के साथ खिलवाड़ करने की गंभीर घटना को उजागर करती है।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका
बैंक कर्मचारियों का काम ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा करना और उनके वित्तीय लेन-देन को सुरक्षित रखना होता है। लेकिन जब वही कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी करते हैं, तो यह न केवल बैंक की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाता है, बल्कि ग्राहकों के विश्वास को भी तोड़ता है। इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर बैंक में सही निगरानी नहीं की जाती है, तो ऐसे कर्मचारियों का पता लगाना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना मुश्किल हो सकता है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
बेलघाट पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने यह भी कहा है कि अगर और ग्राहकों द्वारा धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आती हैं, तो उन पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम बनाई है, जो इस धोखाधड़ी की जांच करेगी और दोषियों को सजा दिलवाएगी।
एसएसपी ने भी जांच की दिशा को मजबूत किया है और एसपी साउथ को इस मामले की जिम्मेदारी सौंपी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दिलवाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
बैंक में सुरक्षा और निगरानी की आवश्यकता
यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि बैंक की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है। बैंक में हुए धोखाधड़ी को रोकने के लिए कड़ी निगरानी और नियंत्रण की आवश्यकता है ताकि ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, बैंक में कर्मचारियों की नियमित जांच और उनकी कार्यप्रणाली पर निगरानी रखना भी महत्वपूर्ण है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
गोरखपुर के यूको बैंक की शाहपुर शाखा में हुई धोखाधड़ी की घटना ने बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की भूमिका और उनकी जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि बैंकिंग प्रक्रिया और कर्मचारियों की निगरानी में कमी हो, तो ऐसी घटनाएँ हो सकती हैं। पुलिस की जांच के बाद, यह उम्मीद की जाती है कि दोषियों को सजा मिलेगी और इस घटना से अन्य बैंकों को भी सीख मिल सकेगी कि ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा सबसे अहम है।