Gorakhpur news: मानव तस्करी और अवैध लेन-देन के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम ने बड़ा कदम उठाया है। एनआईए की पटना यूनिट ने खजनी के खटुआभर गांव में छापेमारी की और अभय नाथ दुबे के घर की तलाशी ली। अभय नाथ दुबे, जो इस समय कंबोडिया की जेल में बंद हैं, के परिवार के सदस्यों से चार घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान उनकी पत्नी, पिता और भाई के आईडी (पहचान पत्र) की जांच की गई और उनकी तस्वीरें भी ली गई।
एनआईए की टीम ने इस मामले में अहम सुराग जुटाए हैं, जिनसे इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। इसके बाद एनआईए की टीम अयोध्या के लिए रवाना हो गई।
कंबोडिया में फंसा अभय नाथ दुबे
खटुआभर गांव के रहने वाले अभय नाथ दुबे ने 21 साल पहले रोजगार की तलाश में कंबोडिया का रुख किया था। वहां पहुंचने के बाद वह बुरी संगत में फंस गए और मानव तस्करी के कारोबार में शामिल हो गए। पिछले चार महीनों से वह कंबोडिया की जेल में बंद हैं। एनआईए के अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क के पीछे जो बड़े चेहरे हैं, उनका पर्दाफाश करना उनका प्राथमिक लक्ष्य है।
अभय नाथ दुबे का परिवार अब भी गांव में रह रहा है। उनके परिवार वालों का कहना है कि उन्हें विदेश में उसके हाल की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। अभय नाथ दुबे की पत्नी मीरा दुबे ने बताया कि घर के खर्चे उनके माता-पिता और रिश्तेदारों की मदद से चल रहे हैं।
गिरफ्तारी के बाद हुआ खुलासा
एनआईए की टीम ने अभय नाथ दुबे के घर पर छापेमारी करते हुए करीब छह लाख रुपये की एफडी, बैंक पासबुक और कुछ अन्य दस्तावेज जब्त किए। इस दौरान उनकी पत्नी और बड़े भाई सिद्धनाथ दुबे के बयान भी दर्ज किए गए। सिद्धनाथ ने बताया कि अभय की दो बेटियां दिल्ली में एमसीए और बीसीए की पढ़ाई कर रही हैं, और हाल ही में उन्होंने अपनी बेटियों के बैंक खाते में चार हजार रुपये भेजे थे क्योंकि उन्हें खाने तक के पैसे नहीं मिल पा रहे थे।
एनआईए ने इस मामले में अभय की बेटियों के बैंक खाते भी सील कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, अभय नाथ दुबे का यह पूरा परिवार इस तस्करी के कारोबार में शामिल था और यह मामले सिर्फ एक छोटे से इलाके तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर फैल चुके हैं।
कंबोडिया में किए गए गिरफ्तारियां और कार्रवाई
कंबोडिया में अभय नाथ दुबे की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने 17 भारतीयों को वहां से गिरफ्तार किया था। इनमें से 14 को भारतीय दूतावास के जरिए स्वदेश भेज दिया गया था। इसके अलावा, कंबोडिया पुलिस ने दो अन्य भारतीयों को भी गिरफ्तार किया था, जिनमें मुनना सिंह नामक व्यक्ति शामिल था, जो समस्तीपुर, बिहार का निवासी है और वह इस गिरोह का एक अहम सदस्य था।
कंबोडिया पुलिस के मुताबिक, मुनना सिंह छापेमारी के दौरान फरार हो गया और अब वह एनआईए के रडार पर है। पुलिस ने इस पूरे मामले में अभय नाथ दुबे और उनके साथियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
ठगी का शिकार हुआ एक युवक
गोरखपुर के कोडरी गांव के एक निवासी ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे कंबोडिया में काम दिलाने का झांसा देकर राहुल चौबे ने 80,000 रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी की थी। इसके अलावा, राहुल ने 1 लाख रुपये की नकद राशि भी ली थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि 25 फरवरी 2024 को उसे एक महीने का पर्यटक वीजा दिलाया गया और उसे कोलकाता से कंबोडिया भेज दिया गया। कंबोडिया पहुंचने पर उसने अभय नाथ दुबे से मुलाकात की और दुबे ने उसे एक कंप्यूटर दिया और भारतीयों से धोखाधड़ी करने का काम सौंपा। जब उस युवक ने काम करने से मना किया, तो अभय नाथ ने उसे जान से मारने की धमकी दी और कहा कि अगर काम नहीं करेगा तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
इसके बाद, पीड़ित ने भारतीय दूतावास से मदद ली और दूसरे पासपोर्ट के जरिए भारत वापस लौटा। दूतावास ने उसकी पूरी मदद की और उसे स्वदेश भेज दिया।
मानव तस्करी का बड़ा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा है, जो न केवल बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगता है, बल्कि उन्हें धोखाधड़ी करने के लिए भी मजबूर करता है। इन आरोपियों का मुख्य उद्देश्य भारत से गरीब और बेरोजगार युवाओं को कंबोडिया जैसे देशों में ले जाकर उन्हें बंधक बना लेना था।
एनआईए ने अब इस पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है और इसके मास्टरमाइंड्स को पकड़ने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, जो मानव तस्करी के इस घिनौने कारोबार का पर्दाफाश करने में मददगार साबित होंगी।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
एनआईए और स्थानीय पुलिस की टीमें अब इस मामले के अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई हैं। कंबोडिया में पकड़े गए अभय नाथ दुबे और उनके साथियों के खिलाफ जांच जारी है और उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एनआईए अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ करेंगे और इसमें शामिल अन्य आरोपियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त करेंगे।
इस पूरी कार्रवाई के बाद मानव तस्करी और धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है और इस मामले के खुलासे से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर काबू पाया जा सकेगा।