Gorakhpur: वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर दरिंदे को मिली सजा, गवाहों के मुकरने के बावजूद न्याय

Gorakhpur: वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर दरिंदे को मिली सजा, गवाहों के मुकरने के बावजूद न्याय

Gorakhpur: गोरखपुर के चिलुआताल क्षेत्र में एक साल पहले हुई एक जघन्य अपराध की घटना ने समाज को हिला कर रख दिया था। एक पड़ोसी द्वारा छह वर्षीय एक बच्ची के साथ बर्बरता की गई, जिसने न केवल कानून को चुनौती दी बल्कि मानवता को भी शर्मसार किया। दरिंदे ने खेल रही बच्ची को चॉकलेट देने के बहाने अपने घर ले जाकर उसके साथ अत्याचार किया।

इस घटना के बाद, बच्ची के परिवार और स्थानीय लोगों ने आरोपी को सजा दिलाने के लिए सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किए। इस घटना ने समाज के हर वर्ग को हिलाकर रख दिया और न्याय की मांग उठने लगी।

पुलिस की तत्परता और कार्रवाई

इस मामले में पुलिस ने कोई कसर नहीं छोड़ी। चिलुआताल पुलिस थाने के अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई की। 24 घंटे के भीतर आरोपी कृष्ण उर्फ कन्हैया को गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ बलात्कार और पीओसीएसओ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने घटना की जांच की और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने का कार्य प्रारंभ किया। इस दौरान, बलात्कार की घटना के बाद बच्ची का मेडिकल परीक्षण किया गया, जिसमें उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान पाए गए।

वैज्ञानिक साक्ष्य की भूमिका

जांच के दौरान पुलिस ने डीएनए परीक्षण किया और नमूनों को प्रयोगशाला में भेजा। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, जांच अधिकारी ने 11 नवंबर 2023 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मामले की सुनवाई के दौरान, पांच गवाहों ने पलटा खाया और आरोपी की संलिप्तता से इनकार कर दिया।

Gorakhpur: वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर दरिंदे को मिली सजा, गवाहों के मुकरने के बावजूद न्याय

हालांकि, वैज्ञानिक साक्ष्यों के कारण आरोपी कृष्ण उर्फ कन्हैया को सजा से बचने का कोई रास्ता नहीं मिला। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश पीओसीएसओ अधिनियम) राहुल आनंद ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा और ₹50,000 का जुर्माना लगाया।

न्यायालय का निर्णय

जेल में समय बिताने के बाद, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने यह भी आदेश दिया कि यदि आरोपी जुर्माना नहीं भरता है, तो उसकी सजा में छह महीने की अतिरिक्त अवधि जोड़ी जाएगी।

इस केस की जांच निरीक्षक शैलेंद्र कुमार द्वारा की गई, जिन्होंने मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों को मजबूत तरीके से पेश किया। इस केस में एडीजीसी राघवेंद्र त्रिपाठी, निरीक्षक अतुल कुमार श्रीवास्तव और वकील राम आशिष गौड़ ने भी अपने-अपने स्तर पर योगदान दिया।

समाज में प्रभाव

इस मामले ने समाज में एक संदेश दिया है कि भले ही गवाह मुकर जाएं, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर न्याय अवश्य मिलेगा। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायालय की तत्परता यह सुनिश्चित करती है कि अपराधियों को सजा मिले और समाज में सुरक्षा का वातावरण बना रहे।

इसके अलावा, यह घटना यह भी दर्शाती है कि समाज को ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता है। स्थानीय निवासियों का सहयोग और समर्थन अपराधियों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य सुधार

घटना के बाद बच्ची को एक सप्ताह तक चिकित्सा उपचार दिया गया, जिसके बाद उसकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ। यह दर्शाता है कि हालांकि ऐसे घटनाएं समाज को झकझोर देती हैं, लेकिन समुचित चिकित्सा देखभाल और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण है।

चिलुआताल की यह घटना एक काला अध्याय है, लेकिन न्यायालय द्वारा दी गई सजा ने यह साबित कर दिया है कि समाज में बुराई के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। न्याय का यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार के लिए सुकून लेकर आया है, बल्कि यह समाज के लिए एक सीख भी है कि न्याय के लिए संघर्ष करना आवश्यक है।

इस मामले से हमें यह भी सीख मिलती है कि वैज्ञानिक साक्ष्य और कानून के साथ दृढ़ता से खड़ा होना हमेशा महत्वपूर्ण होता है। हमें अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए और समाज में जागरूकता फैलाने का प्रयास करना चाहिए।

अंततः, यह मामला यह भी दर्शाता है कि समाज में न्याय का मंदिर केवल कागजों में नहीं, बल्कि वास्तविकता में भी काम करता है। यदि हम मिलकर एकजुट होकर इन मामलों का सामना करेंगे, तो हम एक सुरक्षित और बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।

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